फ्लैट खरीदा, लेकिन पार्किंग नहीं! पड़ोसी ने कब्जा किया तो कोर्ट ने भी नहीं दी राहत, जानिए कहां हुई चूक

मुंबई के एक पार्किंग विवाद में फ्लैट खरीदार को कोर्ट से राहत नहीं मिली. अदालत ने कहा कि फ्लैट खरीदने से पार्किंग का अधिकार स्वतः ट्रांसफर नहीं होता. पार्किंग का नया आवंटन सोसाइटी के नियमों के अनुसार कराना जरूरी है.

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मुंबई में एक पार्किंग विवाद ने घर खरीदने वालों के लिए बड़ा सबक छोड़ दिया है. एक दंपति ने फ्लैट खरीदने के बाद उसी पार्किंग में अपनी कार खड़ी करनी शुरू कर दी, जिसका इस्तेमाल पहले फ्लैट का मालिक करता था. लेकिन जब पड़ोसी ने उस पार्किंग में अपनी दूसरी कार खड़ी कर दी और मामला अदालत पहुंचा, तो कोर्ट ने नए फ्लैट मालिकों के पक्ष में फैसला नहीं दिया. वजह थी कि उन्होंने सोसाइटी के नियमों के मुताबिक पार्किंग दोबारा अपने नाम आवंटित नहीं कराई थी.

क्या है पूरा मामला?

यह मामला मुंबई के सांताक्रूज (पश्चिम) स्थित एक को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी का है. धोलकिया दंपति ने वर्ष 2007 में एक फ्लैट खरीदा था. फ्लैट खरीदने के बाद वे उसी पार्किंग स्लॉट का इस्तेमाल करते रहे, जो पहले फ्लैट के पुराने मालिक को मिला हुआ था. उन्हें लगा कि फ्लैट के साथ पार्किंग का अधिकार भी अपने आप उनके पास आ गया है.

लेकिन वर्ष 2021 में एक पड़ोसी ने अपनी दूसरी कार उसी जगह पर खड़ी करनी शुरू कर दी. इसके बाद धोलकिया दंपति ने सोसाइटी से शिकायत की और बाद में मामला अदालत तक पहुंच गया.

कोर्ट ने क्यों खारिज कर दी मांग?

महाराष्ट्र स्टेट को-ऑपरेटिव अपीलीय अदालत (Maharashtra State Co-operative Appellate Court) ने कहा कि सोसाइटी के मॉडल बायलॉज के अनुसार पार्किंग स्लॉट किसी फ्लैट मालिक की निजी संपत्ति नहीं होता और उसे दूसरे व्यक्ति को ट्रांसफर नहीं किया जा सकता. अदालत ने स्पष्ट किया कि पार्किंग का आवंटन करने का अधिकार केवल सोसाइटी की मैनेजिंग कमेटी के पास होता है.

कोर्ट ने बायलॉ 78(बी) का हवाला देते हुए कहा कि पुराने फ्लैट मालिक को पार्किंग का अधिकार नए खरीदार को देने का अधिकार नहीं था. वहीं बायलॉ 82 के अनुसार, नया फ्लैट मालिक यदि पार्किंग चाहता है तो उसे सोसाइटी के चेयरमैन या प्रबंधन समिति के पास अलग से आवेदन करना होगा.

15 साल इस्तेमाल करने के बावजूद नहीं मिला अधिकार

धोलकिया दंपति का कहना था कि वे करीब 15 साल से बिना किसी आपत्ति के उसी पार्किंग का इस्तेमाल कर रहे थे. हालांकि अदालत ने कहा कि केवल लंबे समय तक पार्किंग का उपयोग करने से उस पर कानूनी अधिकार नहीं बन जाता. चूंकि उन्होंने पार्किंग का आधिकारिक आवंटन नहीं कराया था, इसलिए वे उस स्थान पर अपना दावा साबित नहीं कर सके.

घर खरीदने वालों के लिए क्या है सबक?

यह फैसला उन सभी लोगों के लिए अहम है जो फ्लैट खरीदते समय मान लेते हैं कि पार्किंग भी स्वतः उनके नाम हो जाएगी. विशेषज्ञों का कहना है कि फ्लैट खरीदने के बाद सोसाइटी के नियमों के अनुसार पार्किंग के आवंटन की प्रक्रिया पूरी करना बेहद जरूरी है. यदि ऐसा नहीं किया गया, तो भविष्य में पार्किंग को लेकर विवाद होने पर कानूनी राहत मिलना मुश्किल हो सकता है.

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