Gold Price Updates: दिवाली से पहले सोने की कीमतों का क्या है हाल, 1 किलो चांदी के लिए कितनी खर्च करनी होगी रकम?
Gold Price Updates: व्यापारियों ने बताया कि सोने की कीमतें स्थिर रहीं, क्योंकि ऊंची कीमतों के बीच जौहरी और रिटेलर नई खरीदारी करने में सावधानी बरत रहे थे. कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती, फेड की नीति को लेकर अनिश्चितता और इक्विटी बाजारों में बिकवाली के कारण अस्थिरता बढ़ रही है.

Gold Price Updates: गुरुवार को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सोने की कीमतें 1.46 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर स्थिर रहीं. ऊंची कीमतों के कारण जौहरी और रिटेलर नई खरीदारी को लेकर सतर्क रहे. ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के अनुसार, चांदी की कीमतों में 500 रुपये की बढ़ोतरी हुई और यह सभी टैक्स को मिलाकर 1,98,500 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई. बुधवार को चांदी की कीमत 1.98 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर स्थिर रही थी.
जौहरी और रिटेलर सतर्क
व्यापारियों ने बताया कि सोने की कीमतें स्थिर रहीं, क्योंकि ऊंची कीमतों के बीच जौहरी और रिटेलर नई खरीदारी करने में सावधानी बरत रहे थे.
क्यों नहीं हुआ कीमतों में बदलाव?
HDFC सिक्योरिटीज के कमोडिटी सीनियर एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा, ‘अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मिले-जुले संकेतों और सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव के बीच, गुरुवार को घरेलू बाजार में सोने की कीमतें स्थिर रहीं.’
उन्होंने कहा कि US फेडरल रिजर्व के सख्त रुख (Hawkish Stance) का असर, US ट्रेजरी यील्ड और कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट से मिलने वाले समर्थन पर भारी पड़ गया.
इंटरनेशनल मार्केट में गोल्ड-सिल्वर
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में स्पॉट गोल्ड 49.38 USD (यानी 1.21%) गिरकर 4,018.08 USD प्रति औंस पर आ गया, जबकि चांदी 3% गिरकर 52.41 USD प्रति औंस पर पहुंच गई.
दबाव में गोल्ड-सिल्वर की कीमतें
आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स लिमिटेड की कमोडिटी और करेंसी रिसर्च एनालिस्ट वेदिका नारवेकर ने कहा, ‘गुरुवार को सोना 4,024 USD प्रति औंस के आसपास दबाव में रहा. फेडरल रिजर्व के सख्त रुख और ऊर्जा की कीमतों से जुड़ी लगातार महंगाई के कारण, मॉनिटरी पॉलिसी को और सख्त किए जाने की उम्मीदें बढ़ गई हैं.’
उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती, फेड की नीति को लेकर अनिश्चितता और इक्विटी बाजारों में बिकवाली के कारण अस्थिरता बढ़ रही है. हालांकि, भू-राजनीतिक जोखिम और केंद्रीय बैंकों की ओर से की जा रही खरीदारी बाजार को कुछ सहारा दे सकती है.