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Adani की यूरोप में बड़ी डील की तैयारी, $3.3 अरब में Evos Terminals को खरीदने के लिए लगाई बोली

गौतम अडानी की कंपनी अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन ने यूरोप की Evos Terminals को खरीदने के लिए 3.3 अरब डॉलर यानी करीब 3 अरब यूरो की बाध्यकारी बोली लगाई है. Evos के पास 5 देशों के 7 प्रमुख यूरोपीय बंदरगाहों पर 8 टैंक टर्मिनल हैं. कंपनी की कुल स्टोरेज क्षमता 64 लाख क्यूबिक मीटर है. इस संभावित एक्विजिशन से अडानी समूह यूरोप में अपना पोर्ट और एनर्जी स्टोरेज बिजनेस मजबूत करना चाहता है.

Adani Ports ने Evos Terminals के लिए 3.3 अरब डॉलर की बोली लगाई. Image Credit: Canva, tv9

Highlights

  • Adani Ports ने Evos Terminals के लिए 3.3 अरब डॉलर की बाध्यकारी बोली लगाई. .
  • Evos के पास 5 देशों के 7 यूरोपीय बंदरगाहों पर 8 टैंक टर्मिनल हैं.
  • संभावित एक्विजिशन से अडानी समूह यूरोप में पोर्ट और एनर्जी स्टोरज बिजनेस बढ़ाना चाहता है

गौतम अडानी की कंपनी अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन (APSEZ) अब यूरोप में अपना बिजनेस बढ़ाने की तैयारी में है. कंपनी ने यूरोप की लिक्विड स्टोरेज और टर्मिनल ऑपरेटर Evos Terminals को खरीदने के लिए 3.3 अरब डॉलर यानी करीब 3 अरब यूरो की बोली लगाई है. इस डील के जरिए अडानी समूह यूरोप के एनर्जी स्टोरेज और पोर्ट बिजनेस में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है. हालांकि, एक्विजिशन पर अंतिम फैसला आने वाले कुछ हफ्तों में होने की उम्मीद है.

क्या करती है Evos Terminals?

Evos Terminals यूरोप में लिक्विड स्टोरेज और टर्मिनल बिजनेस की प्रमुख कंपनी है. इसके पास 5 देशों के 7 बड़े यूरोपीय बंदरगाहों पर 8 टैंक टर्मिनल हैं. इनकी कुल स्टोरेज क्षमता 64 लाख क्यूबिक मीटर है.

कंपनी पेट्रोल और दूसरे ट्रेडिशनल फ्यूल के अलावा बायोडीजल, सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल, बायो-एथेनॉल और ई-मेथेनॉल जैसे वैकल्पिक ईंधनों के स्टोरेज का काम भी करती है. साल 2025 में इसका EBITDA करीब 20 करोड़ यूरो रहने का अनुमान था.

कौन बेच रहा है Evos?

इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, Evos Terminals का मालिकाना हक Igneo Infrastructure Partners के पास है, जो First Sentier Group का हिस्सा है. इस साल की शुरुआत में Igneo ने कंपनी की बिक्री प्रक्रिया के लिए Morgan Stanley को नियुक्त किया था.

इस एक्विजिशन की दौड़ में कई वैश्विक निवेशकों और कंपनियों ने दिलचस्पी दिखाई है. इनमें KKR, EQT, Macquarie, Goldman Sachs Alternatives और BlackRock जैसे नाम शामिल हैं. APSEZ ने कॉम्पिटेटिव बिल्डिंग प्रोसेस के तहत इसी हफ्ते अपनी बाध्यकारी पेशकश जमा की है.

एनर्जी सुरक्षा के लिए क्यों अहम है यह डील?

पश्चिम एशिया में संघर्ष और तेल-गैस की सप्लाई में रुकावटों ने दुनिया भर में एनर्जी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाई है. ऐसे माहौल में ईंधन के स्टोरेज और उसकी सप्लाई से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर की अहमियत बढ़ रही है.

Evos के एक्विजिशन से APSEZ को यूरोप के अहम बंदरगाहों पर लिक्विड स्टोरेज क्षमता मिल सकती है. कंपनी भारत, पश्चिम एशिया और यूरोप के बीच पोर्ट नेटवर्क तैयार करना चाहती है. इससे अंतरराष्ट्रीय बिजनेस और एनर्जी सप्लाई चेन में उसकी भूमिका बढ़ सकती है.

Adani का कितना बड़ा है ग्लोबल नेटवर्क?

APSEZ भारत में 15 पोर्ट और टर्मिनल संचालित करती है. इसके अलावा इजरायल, तंजानिया, श्रीलंका और ऑस्ट्रेलिया में भी कंपनी की मौजूदगी है. कंपनी के पास 140 से ज्यादा तरह के लिक्विड कार्गो को संभालने की क्षमता है.

कंपनी की अंतरराष्ट्रीय पोर्ट बिजनेस से FY26 में कुल रेवेन्यू का 12 फीसदी और कंसोलिडेटेड EBITDA का 6 फीसदी आया था. अडानी समूह यूरोप में अपने मरीन बिजनेस को भी बढ़ा रहा है. उसकी मरीन कंपनी Astro Offshore ने यूरोप में डीपवाटर इंजीनियरिंग और ऑफशोर ऑपरेशन की क्षमता बढ़ाने के लिए Oceaneering International के साथ करार किया है.

भारत में भी निवेश बढ़ा रही है कंपनी

APSEZ ने वित्त वर्ष 2027 के लिए अपना कैपेक्स लक्ष्य बढ़ाकर 15000 से 17000 करोड़ रुपये कर दिया है. पहले यह लक्ष्य 12000 से 14000 करोड़ रुपये था. कंपनी के मुताबिक, बढ़ा हुआ निवेश मुख्य रूप से भारत में चल रही परियोजनाओं पर खर्च होगा. इसमें मुंद्रा, धामरा, हजीरा और विझिंजम जैसे प्रमुख पोर्ट शामिल हैं.

कंपनी ने FY27 के लिए रेवेन्यू गाइडेंस भी बढ़ाकर 44000 से 46000 करोड़ रुपये और EBITA गाइडेंस 26000 से 27000 करोड़ रुपये कर दी है. दोनों अनुमानों में पहले के मुकाबले 1000 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी की गई है.

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पहले भी विदेशी एक्विजिशन की कोशिश

APSEZ की विदेशी विस्तार योजना में Evos अकेली संभावित डील नहीं है. पिछले हफ्ते कंपनी ब्रिटेन की Associated British Ports को खरीदने की करीब 10 अरब पाउंड की दौड़ में पिछड़ गई थी. इसके अलावा Bloomberg की रिपोर्ट के मुताबिक, अडानी समूह एक अन्य डच एनर्जी स्टोरेज कंपनी VTTI के लिए भी इसी साइज की बोली लगाने पर विचार कर रहा है.