ईरान-इजरायल युद्ध ने बढ़ाई सोने-चांदी की चमक, क्या जारी रहेगी रैली? जानें एक्सपर्ट्स ने क्या कहा
ईरान से जुड़े युद्ध तनाव और वैश्विक अनिश्चितता के माहौल में जहां शेयर बाजार दबाव में नजर आ रहे हैं, वहीं सोना और चांदी निवेशकों को बेहतर रिटर्न दे रहे हैं. संकट की घड़ी में पारंपरिक रूप से सोना-चांदी को ‘सेफ-हेवन’ निवेश माना जाता है, और इस बार भी निवेशकों का रुझान तेजी से कीमती धातुओं की ओर बढ़ा है.
हाल के दिनों में गोल्ड और सिल्वर की कीमतों में तेज उछाल देखा गया है. बाजार में अस्थिरता, डॉलर की चाल और वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रम इनकी दिशा तय कर रहे हैं. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या सोने-चांदी की यह रैली लंबे समय तक जारी रहेगी या फिर यह केवल तनाव के बीच की अस्थायी तेजी है?
कमोडिटी एक्सपर्ट अनुज गुप्ता के मुताबिक, मौजूदा हालात में सोने की कीमतों को मजबूत सपोर्ट मिल रहा है. अगर वैश्विक तनाव बना रहता है, तो सोना नए ऊंचे स्तर छू सकता है. वहीं चांदी में भी तेजी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, और अनुकूल परिस्थितियों में ऊंचे स्तरों की ओर बढ़त संभव है.
Promore Fintech की डायरेक्टर निशा सांघवी का मानना है कि निवेशकों को जल्दबाजी में पूरा पैसा सोना-चांदी में नहीं लगाना चाहिए. पोर्टफोलियो में संतुलन बनाए रखना जरूरी है. उनका सुझाव है कि कुल निवेश का एक हिस्सा लगभग 10-15% सोने या सिल्वर जैसे सेफ-हेवन एसेट्स में रखा जा सकता है, खासकर जब बाजार में अनिश्चितता हो.
कुल मिलाकर, सोना-चांदी में मौजूदा तेजी भू-राजनीतिक तनाव से प्रेरित है. आगे की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि वैश्विक हालात कैसे बदलते हैं और निवेशकों का जोखिम उठाने का रुख कैसा रहता है.