2047 तक विकसित भारत का सपना! 7% ग्रोथ से नहीं बनेगी बात, जानें कितनी चाहिए रफ्तार
2047 तक भारत को विकसित देश बनाने के लक्ष्य के लिए मौजूदा 7% आर्थिक वृद्धि पर्याप्त नहीं मानी जा रही है. विशेषज्ञों के मुताबिक, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए लंबे समय तक 9% से अधिक ग्रोथ, निवेश, रोजगार और मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाना जरूरी होगा.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने का लक्ष्य रखा है. इसे ‘विकसित भारत’ की महत्वाकांक्षी योजना के तौर पर देखा जाता है. लेकिन इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत को आर्थिक मोर्चे पर मौजूदा रफ्तार से कहीं ज्यादा तेज चलना होगा. हालिया आर्थिक विश्लेषण के मुताबिक, 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था बनने के लिए भारत को लंबे समय तक 9% से अधिक की सालाना आर्थिक वृद्धि दर बनाए रखने की जरूरत पड़ सकती है.
7% की ग्रोथ मजबूत, लेकिन लक्ष्य के लिए कम
भारत इस समय दुनिया की तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है. करीब 7% की आर्थिक वृद्धि दर कई बड़े देशों के मुकाबले मजबूत है. इसके बावजूद 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य के लिए यह रफ्तार पर्याप्त नहीं मानी जा रही है. वजह यह है कि भारत को अगले करीब दो दशकों में न सिर्फ अपनी अर्थव्यवस्था का आकार कई गुना बढ़ाना होगा, बल्कि आम लोगों की प्रति व्यक्ति आय भी काफी ऊंचे स्तर पर ले जानी होगी.
क्यों जरूरी है 9% से ज्यादा की ग्रोथ?
भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ GDP बढ़ाना नहीं, बल्कि प्रति व्यक्ति आय बढ़ाना भी है. बड़ी आबादी के कारण अर्थव्यवस्था की कुल वृद्धि का असर हर व्यक्ति की आय पर उसी अनुपात में नहीं पड़ता. इसलिए तेज आर्थिक विकास के साथ रोजगार के अवसर बढ़ाना और उत्पादकता में सुधार करना भी जरूरी होगा.
विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर भारत को 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था बनना है तो लंबे समय तक ऊंची विकास दर बनाए रखनी होगी. इसके लिए निवेश, उत्पादन और निर्यात में तेज बढ़ोतरी जरूरी होगी.
मैन्युफैक्चरिंग को बनाना होगा मजबूत
भारत के लिए मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूत करना सबसे अहम कदमों में से एक हो सकता है. इससे देश में उत्पादन बढ़ेगा, विदेशी कंपनियों से निवेश आएगा और बड़ी संख्या में रोजगार पैदा किए जा सकेंगे.
भारत को वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के साथ-साथ ज्यादा से ज्यादा उत्पादों का निर्यात करना होगा. इसके लिए बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, कुशल श्रम और कारोबार के लिए आसान माहौल जरूरी है.
निजी निवेश और विदेशी पूंजी की जरूरत
तेज विकास के लिए सरकारी खर्च के साथ निजी क्षेत्र का निवेश भी बढ़ना जरूरी है. घरेलू बचत को निवेश में बदलने और विदेशी पूंजी को आकर्षित करने की जरूरत होगी. भारत की 2047 की महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश और आर्थिक सुधारों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
रोजगार और उत्पादकता पर देना होगा जोर
भारत के पास दुनिया की बड़ी युवा आबादी है. यह देश के लिए बड़ी ताकत बन सकती है, लेकिन इसके लिए पर्याप्त और बेहतर गुणवत्ता वाली नौकरियां पैदा करनी होंगी. केवल GDP बढ़ना पर्याप्त नहीं होगा. लोगों की आय, जीवन स्तर, शिक्षा, स्वास्थ्य और उत्पादकता में भी सुधार होना चाहिए.
आने वाले वर्षों में भारत को यह सुनिश्चित करना होगा कि आर्थिक विकास का फायदा समाज के बड़े हिस्से तक पहुंचे. यही विकसित भारत के लक्ष्य को वास्तविक रूप देने की सबसे बड़ी कसौटी होगी.
आगे की राह आसान नहीं
भारत के पास तेज विकास की क्षमता जरूर है, लेकिन 2047 का लक्ष्य हासिल करने के लिए लगातार ऊंची वृद्धि दर बनाए रखना आसान नहीं होगा. वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, व्यापारिक तनाव और निवेश में उतार-चढ़ाव जैसी चुनौतियां भी सामने रहेंगी.
ऐसे में 7% की मौजूदा रफ्तार को आधार बनाकर भारत को विकास की गति और बढ़ानी होगी. अगर मैन्युफैक्चरिंग, निवेश, निर्यात, रोजगार और उत्पादकता पर एक साथ जोर दिया जाता है, तभी 2047 तक विकसित भारत का सपना पूरा करने की राह मजबूत हो सकती है.
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