तेजी से बढ़ रहा भारत में मेंटल हेल्थ मार्केट, 2034 तक 2.3 लाख करोड़ होने का अनुमान

वर्क प्रेशर बढ़ता जा रहा है और लाइफ में व्यक्तिगत चुनौतियों की वजह से मेंटल वेलनेस और बिहेवियरल इंटेलिजेंस की मांग तेजी से बढ़ रही है. IMARC ग्रुप के अनुसार, भारतीय मेंटल हेल्थ मार्केट 2034 तक 27.36 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है.

मेंटल हेल्थ मार्केट Image Credit: Jay/500px/ Getty images

Highlights

  • तेजी से बढ़ रहा भारत में मेंटल वेलनेस मार्केट.
  • बिहेवियरल इंटेलिजेंस की अहम भूमिका.
  • SynqSol ने लॉन्च किया नया डिसीजन प्लेटफॉर्म.

भारत में तेजी से मानसिक स्वास्थ्य और वेलनेस की जरूरत बढ़ रही है और इसके पीछे बढ़ता वर्क प्रेशर, रिश्तों में चुनौतियां, करियर को लेकर असमंजस और बदलता सामाजिक माहौल जैसे कई कारण हैं. अब लोगों के सामने चुनौती मानसिक स्वस्थय सेवाओं तक पहुंच की नहीं है बल्कि लोग अब अपने फैसले लेने की क्षमता, अपने व्यवहार और सोचने के तरीके को बेहतर तरीके से समझना चाहते हैं.

2034 तक हेल्थ मार्केट के बढ़ने का अनुमान

मार्केट रिसर्च फर्म IMARC ग्रुप के अनुसार, 2025 में भारत का मेंटल हेल्थ मार्केट 20.82 अरब डॉलर (लगभग 1.75 लाख करोड़) का था. 2034 तक इसके बढ़कर 27.36 अरब डॉलर (लगभग 2.3 लाख करोड़) होने का अनुमान है. वर्कप्लेस स्ट्रेस, बढ़ती जागरूकता, रिश्तों की चुनौतियां, डिजिटल मेंटल हेल्थ सर्विसेज और पैसे की अनिश्चितता का बढ़ता इस्तेमाल इस मार्केट को आगे बढ़ा रहा है.

डिसीजन क्लैरिटी की जरूरत

मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाओं और जानकारी की उपलब्धता बढ़ने के बावजूद एक बड़ी समस्या बनी हुई है और वो ये है कि लोगों के पास जानकारी तो है लेकिन उसे सही फैसले में बदलना हमेशा आसान नहीं होता. करियर चुनने से लेकर वर्कप्लेस रिलेशनशिप, लीडरशिप के फैसले और पर्सनल रिलेशनशिप तक, हर जगह एक व्यक्ति को अपने हालात के साथ-साथ अपने बिहेवियरल पैटर्न को भी समझना होता है.

बढ़ रही है बिहेवियरल इंटेलिजेंस की भूमिका

बिहेवियरल इंटेलिजेंस, स्ट्रक्चर्ड असेसमेंट और बिहेवियरल साइंस की मदद से इस बात को समझा जाता है कि व्यक्ति कैसे सोचता है, अलग-अलग सिचुएशन में कैसे रिस्पॉन्ड करता है, दूसरों के साथ कैसे इंटरैक्ट करता है और फैसले कैसे लेता है. बिहेवियरल इंटेलिजेंस का फोकस सिर्फ किसी व्यक्ति की पर्सनैलिटी की खासियतों को पहचानने तक ही सीमित नहीं है. इसका इस्तेमाल रिलेशनशिप कम्पैटिबिलिटी, करियर प्लानिंग, लीडरशिप डेवलपमेंट और वर्कप्लेस एंगेजमेंट जैसे प्रैक्टिकल एरिया में भी किया जा सकता है.

SynqSol ने पेश किया डिसीजन इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म

इस उभरते हुए मौके को पहचानते हुए, बिहेवियरल इंटेलिजेंस स्टार्टअप SynqSol ने अपना डिसीजन इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म पेश किया है. यह प्लेटफॉर्म कंपनी के Synq ह्यूमन ऑपरेटिंग सिस्टम पर बेस्ड है. कंपनी के मुताबिक, यह प्लेटफॉर्म साइकोलॉजिस्ट के डिजाइन किए गए बिहेवियरल असेसमेंट, स्ट्रक्चर्ड इनसाइट्स और ह्यूमन-रिव्यूड रिपोर्ट्स को एक साथ लाता है. यह करियर असेसमेंट, रिलेशनशिप और कम्पैटिबिलिटी असेसमेंट, स्ट्रेस और वेल-बीइंग रिपोर्ट्स, बिहेवियरल ट्रैकिंग, काउंसलिंग सपोर्ट और सेल्फ-हेल्प रिसोर्स देता है.

ऐसे प्लेटफॉर्म के लिए इंडियन मार्केट इसलिए भी जरूरी है क्योंकि हर किसी के फैसले सिर्फ उसकी पसंद से नहीं होते. फैमिली की उम्मीदें, सोशल रिलेशनशिप, पढ़ाई, काम का माहौल और कल्चरल फैक्टर भी फैसले लेने में बड़ी भूमिका निभाते हैं.

SynqSol के फाउंडर वेंकेट राव के अनुसार, आज लोगों के पास पहले से कहीं ज्यादा जानकारी और चॉइस है लेकिन ज्यादा ऑप्शन होने का मतलब यह नहीं है कि फैसला लेना आसान हो गया है. बिहेवियरल इंटेलिजेंस लोगों को उनके बिहेवियरल पैटर्न, ताकत और अलग-अलग सिचुएशन में उनके रिस्पॉन्स को समझने में मदद कर सकती है.

बिहेवियरल इंटेलिजेंस का मार्केट सिर्फ पर्सनल वेलनेस तक ही सीमित नहीं है. कंपनियां एम्प्लॉई एंगेजमेंट, टीम डायनामिक्स, लीडरशिप और वर्कप्लेस रिलेशनशिप को बेहतर ढंग से समझने के लिए भी बिहेवियरल इनसाइट्स का इस्तेमाल कर सकती हैं. एजुकेशन सेक्टर में इसका इस्तेमाल स्टूडेंट्स को उनकी ताकत, पसंद और करियर की संभावित दिशाओं को समझने में मदद करने के लिए किया जा सकता है.

मेंटल वेलनेस से डिसीजन इकोनॉमी तक में मदद

भारत में मेंटल वेलनेस पर बढ़ती चर्चा अब एक बड़े ट्रेंड की ओर इशारा कर रही है, रोकथाम, खुद के बारे में जागरूकता और अर्ली इंटरवेंशन. जहां पारंपरिक मेंटल हेल्थ सर्विसेज़ में मुख्य रूप से प्रॉब्लम की पहचान और इलाज पर फोकस किया जाता है, वहीं बिहेवियरल इंटेलिजेंस रोज़ाना के फैसलों में सेल्फ-अवेयरनेस और क्लैरिटी की एक और लेयर जोड़ने की कोशिश करती है.

आने वाले सालों में, मेंटल वेलनेस इकोसिस्टम सिर्फ काउंसलिंग और इलाज से आगे बढ़कर, बिहेवियरल इनसाइट्स, डिसीजन इंटेलिजेंस और पर्सनलाइज़्ड सेल्फ-अवेयरनेस सॉल्यूशंस को शामिल कर सकता है. यह बदलाव इस तेजी से बढ़ते मार्केट में स्टार्टअप्स और टेक्नोलॉजी कंपनियों के लिए नए बिजनेस के मौके पैदा कर सकता है.

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