भारत की ऑयल सिक्योरिटी होगी मजबूत, होर्मुज पर निर्भरता घटाने के लिए तैयार हो रहे 5 नए प्रोजेक्ट
भारत की तेल सिक्योरिटी मजबूत करने के लिए खाड़ी क्षेत्र में पांच अहम पाइपलाइन और पोर्ट प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है. इन प्रोजेक्ट का मकसद होर्मुज स्ट्रेट पर निर्भरता कम करना है. UAE का फुजैराह मार्ग भारत के लिए सबसे उपयोगी विकल्प माना जा रहा है. सऊदी अरब और इराक भी नए तेल निर्यात मार्ग विकसित कर रहे हैं.

Hormuz Strait:l भारत अपनी एनर्जी सिक्योरिटी मजबूत करने की दिशा में एक और अहम कदम की ओर बढ़ रहा है. खाड़ू क्षेत्र के कई देश ऐसे तेल पाइपलाइन और पोर्ट प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं, जिनसे होर्मुज स्ट्रेट पर निर्भरता कम होगी. इन प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद भारत समेत एशियाई देशों को तेल की सप्लाई बिना होर्मुज के भी संभव हो सकेगी. हाल के ईरान संघर्ष के बाद इन प्रोजेक्ट का महत्व और बढ़ गया है. इससे तेल सप्लाई में आने वाले रिस्क कम होने की उम्मीद है.
फुजैराह बनेगा भारत के लिए सबसे अहम विकल्प
UAE की अबुधाबी नेशनल ऑयल कंपनी फुजैराह तक जाने वाली वेस्ट ईस्ट पाइपलाइन का विस्तार कर रही है. यह प्रोजेक्ट 2027 तक पूरी होने की उम्मीद है. इसके बाद फुजैराह से तेल निर्यात कैपिसिटी दोगुनी हो जाएगी. यह बंदरगाह सीधे अरब सागर से जुड़ा है और होर्मुज से होकर गुजरने की जरूरत नहीं पड़ती. भारत के लिए यह सबसे तेज और आसान वैकल्पिक मार्ग माना जा रहा है.
सऊदी और ईराक भी तैयार कर रहे नए रास्ते
सऊदी अरब की ईस्ट वेस्ट पाइपलाइन पहले से चालू है और जरूरत पड़ने पर तेल को रेड सी के रास्ते भारत भेजा जा सकता है. इसी तरह इराक बसरा हदीथा पाइपलाइन पर काम कर रहा है, जिससे तेल तुर्किये, जॉर्डन और सीरिया तक पहुंचाया जा सकेगा. इसके अलावा इराक और जॉर्डन के बीच अकाबा तक नई पाइपलाइन प्रोजेक्ट पर भी तेजी से काम आगे बढ़ाने की योजना है.
डीपी वर्ल्ड बनाएगा नया डीप वाटर पोर्ट
UAE की डीपी वर्ल्ड फुजैराह के पास नया डीप वाटर पोर्ट बनाने की तैयारी कर रही है. इसके साथ मौजूदा बंदरगाह का भी विस्तार किया जाएगा. इस परियोजना के पूरा होने के बाद जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की जरूरत कम होगी. इससे भारत समेत एशिया के कई देशों को तेल सप्लाई और आसान हो सकती है.
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पूरी तरह खत्म नहीं होगी होर्मुज की अहमियत
जानकारों का कहना है कि नई प्रोजेक्ट के बावजूद होर्मुज स्ट्रेट की भूमिका बनी रहेगी. अनुमान है कि भविष्य में भी हर दिन 7 से 9 मिलियन बैरल कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद इसी रास्ते से गुजरेंगे. कतर की एलएनजी सप्लाई और कुवैत तथा इराक का बड़ा हिस्सा अब भी होर्मुज पर निर्भर रहेगा. ऐसे में नए प्रोजेक्ट जोखिम कम करेंगे, लेकिन होर्मुज का महत्व पूरी तरह समाप्त नहीं होगा.