20 दिन में 51.5% उछली कच्चे तेल की कीमत, तेल कंपनियों पर फिर बढ़ा दबाव; क्या महंगा होंगे पेट्रोल-डीजल
देश के क्रूड ऑयल का बास्केट 20 दिन में 51.5 फीसदी बढ़कर 103.33 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया है. इससे सरकारी ऑयल कंपनियों पर फिर से वित्तीय दबाव बढ़ गया है. जून तिमाही में HPCL और BPCL को भारी नुकसान हुआ था, जबकि LPG पर अंडर रिकवरी भी बढ़ी है.

Indian Crude Basket: देश का क्रूड ऑयल बास्केट 20 दिन में 51.5 फीसदी बढ़कर 103.33 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है. 3 जुलाई को इसकी कीमत 68.21 डॉलर प्रति बैरल था. क्रूड ऑयल की इस तेज तेजी से सरकारी ऑयल कंपनियों पर एक बार फिर दबाव बढ़ने लगा है. अगर आने वाले कुछ सप्ताह तक कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो दूसरी और तीसरी तिमाही के नतीजों पर असर पड़ सकता है. पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ऑयल सप्लाई को लेकर बढ़ती चिंता ने बाजार की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं.
20 दिन में तेजी से बढ़ी कीमत
भारत के क्रूड ऑयल का बास्केट 23 जुलाई को 103.33 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. यह 3 जुलाई के 68.21 डॉलर प्रति बैरल के मुकाबले 51.5 फीसदी ज्यादा है. जुलाई की औसत कीमत 79.10 डॉलर रही थी, जबकि मौजूदा स्तर इससे 30.6 फीसदी ऊपर है. जून की औसत कीमत 83.22 डॉलर थी और मौजूदा भाव उससे भी 24.2 फीसदी अधिक है.इससे साफ है कि हाल के दिनों में क्रूड ऑयल की कीमतों में तेज उछाल आया है.
सरकारी ऑयल कंपनियों पर बढ़ सकता है दबाव
ऑयल कंपनियों का कहना है कि सितंबर के कॉन्ट्रैक्ट में भी इस तेजी का असर दिखाई देने लगा है. अगर क्रूड ऑयल की कीमतें कुछ और सप्ताह तक ऊंची बनी रहती हैं तो सरकारी ऑयल कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है. दूसरी और तीसरी तिमाही के वित्तीय नतीजे कमजोर हो सकते हैं. इससे कंपनियों की लागत और नुकसान दोनों बढ़ने की आशंका है.
जून तिमाही में पहले ही हुआ भारी नुकसान
हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम को जून तिमाही में मिलाकर 14000 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ. इसके अलावा LPG पर अंडर रिकवरी 7000 करोड़ रुपये से अधिक रही. BPCL के वित्त निदेशक ने कहा कि जून में बाजार कुछ समय के लिए स्थिर था लेकिन नए भू राजनीतिक घटनाक्रम ने फिर से स्थिति बदल दी है. रूसी क्रूड ऑयल पर मिलने वाली छूट कम होने से भी चिंता बढ़ी है.
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LPG पर भारी अंडर रिकवरी
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार 30 जून तक पेट्रोल डीजल और LPG की बिक्री पर सरकारी ऑयल कंपनियों को 74781 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. अप्रैल से जून के दौरान पेट्रोल पर 19905 करोड़ रुपये, डीजल पर 1.44 लाख करोड़ रुपये और LPG पर 24148 करोड़ रुपये की अंडर रिकवरी दर्ज की गई. पिछले वर्ष के LPG नुकसान को जोड़ने पर कुल अंडर रिकवरी 2.1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है.