कच्चे तेल ने बिगाड़ा रुपये का खेल, डॉलर के मुकाबले 95.46 पर पहुंचा; FII बिकवाली ने बढ़ाई चिंता
भारतीय रुपया गुरुवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 38 पैसे कमजोर होकर 95.46 के स्तर पर बंद हुआ. रुपये में गिरावट की बड़ी वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमत रही. ब्रेंट क्रूड 102.51 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने भी रुपये पर दबाव बढ़ाया.

भारतीय रुपये पर एक बार फिर दबाव बढ़ गया है. गुरुवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 38 पैसे कमजोर होकर 95.46 के स्तर पर बंद हुआ. रुपये में यह गिरावट कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़त के बीच आई है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है. इससे भारत के आयात बिल को लेकर चिंता बढ़ी है. इसके अलावा विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने भी रुपये पर दबाव बढ़ाया है. हालांकि मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार और आरबीआई की सक्रिय भूमिका से रुपये को कुछ सपोर्ट मिल रहा है.
डॉलर के मुकाबले 95.46 पर रुपया
गुरुवार को इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में रुपया 95.15 के स्तर पर खुला था. कारोबार के दौरान रुपये में कमजोरी बढ़ी और यह 95.46 के स्तर पर बंद हुआ. पिछले कारोबारी दिन रुपया 34 पैसे गिरकर 95.08 पर बंद हुआ था. इस तरह लगातार दूसरे दिन रुपये में गिरावट देखने को मिली. दो दिनों में रुपये पर कुल 72 पैसे का दबाव आया है.
रुपये की कमजोरी की बड़ी वजह
रुपये की गिरावट में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों की अहम भूमिका रही है. ब्रेंट क्रूड 1.28 फीसदी बढ़कर 102.51 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. तेल की कीमत 100 डॉलर के ऊपर जाने से भारत के आयात खर्च पर दबाव बढ़ता है. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल आयात करता है. ऐसे में महंगा तेल रुपये के लिए नेगेटिव माना जाता है.
विदेशी निवेशकों की बिकवाली से दबाव
रुपये पर विदेशी निवेशकों की बिकवाली का भी असर देखने को मिल रहा है. जुलाई और अगस्त में विदेशी निवेश का रुख पॉजिटिव रहने के बाद सितंबर में फिर से निकासी शुरू हुई है. एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 582 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की. विदेशी पूंजी की निकासी से डॉलर की मांग बढ़ सकती है. इससे रुपये पर अतिरिक्त दबाव बनता है.
डॉलर कमजोर फिर भी रुपया क्यों गिरा
खास बात यह है कि रुपये की गिरावट सिर्फ डॉलर की मजबूती की वजह से नहीं हुई है. डॉलर इंडेक्स 98.81 पर था और इसमें मामूली गिरावट रही. जानकारों के मुताबिक इस समय रुपये पर सबसे ज्यादा असर तेल की कीमतों का है. अमेरिका में ऊंची बॉन्ड यील्ड भी रुपये के लिए दबाव की वजह बनी हुई है. इसके बावजूद डॉलर की कमजोरी रुपये को कुछ राहत दे रही है.
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विदेशी मुद्रा भंडार से सपोर्ट मिला
रुपये को भारतीय रिजर्व बैंक की सक्रिय भूमिका से भी समर्थन मिल रहा है. बाजार में आरबीआई की मौजूदगी से रुपये में तेज गिरावट को रोकने में मदद मिल रही है. भारत का विदेशी मुद्रा भंडार भी 740 अरब डॉलर से ज्यादा के रिकॉर्ड स्तर पर है. हालांकि कच्चे तेल की ऊंची कीमत और विदेशी पूंजी की निकासी आगे चुनौती बनी रह सकती है.