GST में बड़े बदलाव की तैयारी, खुलेगा टैक्स क्रेडिट का रास्ता; बिजनेस करने में होगी आसानी
प्रस्तावों में कई तरह के बिजनेस इनपुट के लिए क्रेडिट बढ़ाने की भी मांग है जो पहले ब्लॉक थे. GST काउंसिल बुधवार को होने वाली अपनी बैठक में कई ऐसे प्रस्तावों पर विचार करेगी. इनमें ई-वे बिल की जरूरतों से जुड़े नियमों को तर्कसंगत बनाना और GST कानून के तहत गिरफ्तार करने की शक्तियों को हटाना शामिल है.

देश गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) व्यवस्था में बड़े बदलाव की योजना बना रहा है. इससे जमा पड़ा हजारों करोड़ रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट मिल सकेगा, नियमों का पालन करना आसान होगा और कानूनी कार्रवाई (प्रॉसिक्यूशन) के लिए सीमाएं बढ़ाई जा सकेंगी. साथ ही, नियमों के उल्लंघन पर आपराधिक कार्रवाई के प्रावधानों को कम करने पर भी जोर दिया जाएगा.
किन प्रस्तावों पर होगा विचार?
GST काउंसिल बुधवार को होने वाली अपनी बैठक में कई ऐसे प्रस्तावों पर विचार करेगी. इनमें ई-वे बिल की जरूरतों से जुड़े नियमों को तर्कसंगत बनाना और GST कानून के तहत गिरफ्तार करने की शक्तियों को हटाना शामिल है.
ET ने मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के हवाले से बताया कि ये प्रस्ताव टैक्सपेयर से जुड़े सभी पहलुओं- जैसे रजिस्ट्रेशन, रिटर्न, रिफंड, इनपुट टैक्स क्रेडिट और कानूनी विवाद- को कवर करते हैं. ये बदलाव प्रक्रिया-प्रधान अनुपालन (Compliance) से हटकर ऑटोमेटेड, डेटा-ड्रिवेन और रिस्क बेस्ड प्रशासन की ओर बढ़ने का संकेत हैं.
उनमें से एक ने कहा, ‘डेटा की उपलब्धता और सिस्टम में सुधार के कारण, GST के शुरुआती वर्षों में लागू किए गए सुरक्षा उपायों में ढील दी जा सकती है, बिना इसके कि नियमों के पालन (Enforcement) में कोई कमी आए. प्रक्रिया में ये सुधार GST 2.0 के बदलाव को पूरा करेंगे.
बिजनेस करने में आसानी
पिछले सितंबर में रेट को बड़े पैमाने पर तर्कसंगत बनाने के साथ यह बदलाव शुरू हुआ, जिससे GST सिस्टम बिजनेस के साथ जिस तरह से इंटरैक्ट करता है, उसे फिर से सेट किया गया. एक अहम प्रस्ताव इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) को आसान बनाने से जुड़ा है, जो कैपिटल को फ्री करके इंडस्ट्री को इनडायरेक्ट स्टिमुलस दे सकता है.
जिन लोगों का जिक्र पहले किया गया था, उन्होंने बताया कि काउंसिल प्लांट और मशीनरी और इनपुट सर्विसेज पर चुकाए गए टैक्स को पांच साल में महीने की किश्तों में रिफंड करने की इजाजत देने पर विचार करेगी, क्योंकि बिजनेस ITC के तहत इसे रिकवर नहीं कर सकते थे.
क्रेडिट बढ़ाने की मांग
प्रस्तावों में कई तरह के बिजनेस इनपुट के लिए क्रेडिट बढ़ाने की भी मांग है जो पहले ब्लॉक थे. इनमें कर्मचारियों के लिए हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस, आउटडोर केटरिंग, टेलीकम्युनिकेशन टावर, फैक्ट्रियों के बाहर पाइपलाइन, कुछ फ्री सैंपल और एक्सपायर हो चुके सामान जिन्हें नष्ट करने की जरूरत है, 13 लोगों तक बैठने वाली गाड़ियां उनके इंश्योरेंस और मेंटेनेंस के साथ, और गाड़ियों को लीज या किराये पर लेना शामिल हैं.
इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर
मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने कहा कि टेलीकम्युनिकेशन टावर और पाइपलाइन पर प्रस्तावित क्रेडिट टेलीकॉम, रिफाइनिंग, पेट्रोकेमिकल, फर्टिलाइजर, गैस डिस्ट्रीब्यूशन और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर द्वारा किए जाने वाले बड़े कैपिटल खर्च को पूरा करेगा.
खाद्य, फार्मा, टेक्सटाइल और इलेक्ट्रिक गाड़ियों सहित 5% ब्रैकेट में बड़ी संख्या में सामान इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर का सामना करते हैं, जिससे हजारों करोड़ रुपये का ITC जमा होता है.
मुकदमेबाजी का एक बड़ा कारण
एक्सपर्ट्स ने कहा कि इस अटके हुए कैपिटल को रिलीज करने से कई इंडस्ट्री इसे कैपेक्स के रूप में वापस पंप करेंगी. एक और जरूरी प्रस्ताव ITC के ट्रीटमेंट में बदलाव का है, जब चेन में आगे कोई सप्लायर डिफॉल्ट करता है, जिससे असली खरीदारों को टैक्स क्रेडिट खोना पड़ता है- यह एक ऐसा मुद्दा है जो GST सिस्टम के तहत मुकदमेबाजी के सबसे बड़े कारणों में से एक बनकर उभरा है.
प्रस्तावित तरीके के तहत, अगर ट्रांजैक्शन सही है तो असली खरीदार को क्रेडिट रखने की इजाजत होगी, जबकि रिकवरी चेन में आगे उस सप्लायर से की जाएगी जो टैक्स नहीं चुका पाया. जिन लोगों ने बताया, ऐसा इसलिए मुमकिन है क्योंकि सिस्टम अब मिसमैच या फ्रॉड क्रेडिट को उसके सोर्स के करीब पहचान सकता है क्योंकि सेलर और खरीदार का डेटा इनवॉइस दर इनवॉइस जुड़ा होता है.
उन्होंने बताया कि कस्टम, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के एक्सपोर्ट मॉनिटरिंग सिस्टम और दूसरे सरकारी सिस्टम के पास पहले से मौजूद जानकारी को सीधे रिफंड प्रोसेस में शामिल किया जाएगा, बजाय इसके कि टैक्सपेयर्स को अधिकारियों द्वारा मैन्युअल रूप से जांचे जाने के लिए डॉक्यूमेंट अपलोड करने की जरूरत हो.
सेक्टरल राहत
IT/ITeS सेक्टर को बड़ी राहत देने के लिए, काउंसिल विदेशी ब्रांच ऑफिस को सप्लाई को एक्सपोर्ट मानने पर विचार करेगी, जिससे ऐसे ट्रांजैक्शन ITC के लिए एलिजिबल हो जाएंगे.
ऊपर बताए गए लोगों ने बताया कि विदेशी खरीदारों को बेचा गया, लेकिन यहां स्पेशल इकोनॉमिक जोन में डिलीवर किया गया सामान भी एक्सपोर्ट माना जा सकता है, अगर पेमेंट विदेशी करेंसी में हो. GST नॉर्म्स को भी एक्सपोर्ट के लिए पेमेंट मिलने के RBI के नियमों के साथ अलाइन करने का प्रस्ताव है.
कम्प्लायंस और लिटिगेशन
प्रस्तावित सुधारों में कम कीमत वाले कम्प्लायंस और लिटिगेशन को भी कम करने की कोशिश की गई है. सूत्रों ने कहा कि जहां अमाउंट 10,000 से कम है, वहां कोई शो-कॉज नोटिस जारी नहीं किया जा सकता है, प्रस्तावित बदलाव पेंडिंग केस तक भी लागू होगा.
उन्होंने बताया कि हर साल लगभग 95,000 नोटिस रिटर्न के बीच अंतर से आते हैं, और ऐसे नोटिस के बदले रिकवरी कुल अमाउंट का केवल 0.08% होती है.
5 करोड़ तक के टर्नओवर वाले और सिर्फ अनरजिस्टर्ड कस्टमर्स को सप्लाई करने वाले छोटे बिजनेस को हर तीन महीने में टैक्स पेमेंट के साथ सालाना रिटर्न फाइल करने की इजाजत दी जा सकती है. रजिस्ट्रेशन को आसान बनाने का प्रस्ताव है, जिसमें ऑटोमेटेड रूट के लिए क्वालिफाई करने वाले एप्लीकेंट को तीन वर्किंग टाइम के अंदर रजिस्टर होना होगा.