₹13 किलो का कचरा, ₹90 में बिक्री: शादी में Rolex ने खोला लाखों के प्लास्टिक बिजनेस का राज

₹13 किलो में खरीदा गया प्लास्टिक कचरा प्रोसेसिंग के बाद ₹80-90 किलो तक बिकता है. करीब 50 टन मासिक उत्पादन से कारोबार की बिक्री लगभग ₹40 लाख पहुंचती है. यह मॉडल कचरे को कमाई और पर्यावरण संरक्षण दोनों में बदल रहा है.

बेस्‍ट प्‍लास्टिक बिजनेस Image Credit:

कई बार किसी बिजनेस की असली कमाई का अंदाजा उसके ऑफिस, फैक्ट्री या दुकान से नहीं, बल्कि उसके मालिक की जिंदगी देखकर लगता है. ऐसा ही एक दिलचस्प मामला इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा में है. एक शादी में रिश्तेदार की कलाई पर लिमिटेड एडिशन Rolex देखकर एक शख्स ने उसके काम के बारे में पूछा. जवाब मिला- “प्लास्टिक का बिजनेस.” इसके बाद जो जानकारी सामने आई, उसने सभी को हैरान कर दिया. रिपोर्ट के मुताबिक, यह कारोबारी हर महीने करीब 40 लाख रुपये की बिक्री कर रहा है.

₹13 किलो में खरीदा जाता है प्लास्टिक कचरा

Economic Times की रिपोर्ट के मुताबिक, यह बिजनेस सामान्य प्लास्टिक खरीद-बिक्री का कारोबारी नहीं है. इसमें अलग-अलग जगहों से प्लास्टिक कचरा करीब 13 रुपये प्रति किलो की कीमत पर खरीदा जाता है. इसमें बोतल, डिब्बे और दूसरी तरह का प्लास्टिक स्क्रैप शामिल होता है.

पहली नजर में यह कचरा बेहद कम कीमत का नजर आता है. लेकिन इसकी असली वैल्यू तब बढ़ती है, जब इसे सही तरीके से छांटकर और प्रोसेस किया जाता है. यही इस बिजनेस मॉडल की सबसे बड़ी खासियत है.

छंटाई और सफाई के बाद बनते हैं प्लास्टिक ग्रैन्यूल्स

फैक्ट्री में पहुंचने के बाद प्लास्टिक को अलग-अलग प्रकार के हिसाब से छांटा जाता है. इसके बाद इसकी सफाई की जाती है. अलग-अलग तरह के प्लास्टिक को मिलाने से तैयार माल की क्वालिटी खराब हो सकती है, इसलिए यह प्रक्रिया काफी महत्वपूर्ण होती है.

छंटाई और सफाई के बाद प्लास्टिक को प्रोसेस करके छोटे-छोटे दानों यानी रीसाइकल्ड प्लास्टिक ग्रैन्यूल्स में बदला जाता है. इन ग्रैन्यूल्स का इस्तेमाल कंपनियां नए प्लास्टिक उत्पाद बनाने में करती हैं.

₹80-90 किलो तक पहुंच जाती है कीमत

रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 13 रुपये किलो में खरीदे गए प्लास्टिक को प्रोसेस करने के बाद तैयार ग्रैन्यूल्स लगभग 80 से 90 रुपये प्रति किलो में बेचे जाते हैं. यानी कच्चे माल और तैयार उत्पाद की कीमत में काफी बड़ा अंतर है.

इन रीसाइकल्ड प्लास्टिक ग्रैन्यूल्स का इस्तेमाल ऑटो पार्ट्स, पैकेजिंग, पाइप, घरेलू सामान, कपड़ों के लिए इस्तेमाल होने वाले फाइबर और कई औद्योगिक उत्पादों में किया जा सकता है.

हर महीने करीब 50 टन उत्पादन

इस कारोबारी की कमाई का अंदाजा इसके उत्पादन से लगाया जा सकता है. रिपोर्ट में बताया गया है कि यह बिजनेस हर महीने करीब 50 टन रीसाइकल्ड प्लास्टिक ग्रैन्यूल्स तैयार करता है. अगर 50 टन यानी 50,000 किलो माल को करीब 80 रुपये प्रति किलो की दर से बेचा जाए, तो बिक्री लगभग 40 लाख रुपये महीने बैठती है.

हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि 40 लाख रुपये मासिक बिक्री है, सीधे तौर पर मुनाफा नहीं. इसमें प्लास्टिक खरीदने की लागत, बिजली, मशीनरी, कर्मचारियों की सैलरी, परिवहन, रखरखाव और दूसरी परिचालन लागत शामिल होती है.

कचरे से कमाई और पर्यावरण दोनों को फायदा

इस कहानी की खास बात सिर्फ कमाई नहीं है. प्लास्टिक कचरे को लैंडफिल या सड़कों पर जाने से रोककर दोबारा इस्तेमाल योग्य सामग्री में बदलना पर्यावरण के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है. रीसाइक्लिंग के जरिए पुराने प्लास्टिक को नए उत्पादों के लिए कच्चे माल में बदला जा सकता है.

एक शादी में दिखाई दी महंगी Rolex ने जिस बिजनेस का राज खोला, वह दिखाता है कि कुछ ऐसे कारोबारी भी हैं जो बाहर से साधारण नजर आते हैं, लेकिन सही प्रक्रिया, बड़े पैमाने और बाजार की मांग के कारण काफी बड़ा कारोबारी खड़ा कर सकते हैं.

₹13 किलो में खरीदा गया प्लास्टिक कचरा प्रोसेसिंग के बाद ₹80-90 किलो तक बिकता है. करीब 50 टन मासिक उत्पादन से कारोबारी की बिक्री लगभग ₹40 लाख पहुंचती है. यह मॉडल कचरे को कमाई और पर्यावरण संरक्षण दोनों में बदल रहा है.

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