ईरान पर अमेरिका लगाएगा इतिहास के सबसे कड़े प्रतिबंध, दोहरे प्रहार की रणनीति पर दांव लगा रहा वॉशिंगटन
ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने बताया कि अमेरिका, ईरान पर 'इतिहास के सबसे कड़े प्रतिबंध' लगाएगा. इससे पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच तेहरान को झुकने पर मजबूर करने के लिए वॉशिंगटन का आर्थिक दबाव अभियान और तेज हो जाएगा.
Highlights
- प्रतिबंध ईरान पर पहले से लगी नाकेबंदी के साथ मिलकर काम करेंगे.
- सोमवार को होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन विस्तार से दी जाएगी जानकारी.
- अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए अपना रुख तय करने का समय आ गया है.
ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष और तल्ख होते जा रहा है. दोनों ही देश समझौते पर अब तक राजी नहीं हो सके हैं, क्योंकि उनकी अपनी-अपनी शर्तें हैं. इसलिए अमेरिका अब ईरान पर अब तक सबसे कड़े प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहा है. गुरुवार को ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने बताया कि अमेरिका, ईरान पर ‘इतिहास के सबसे कड़े प्रतिबंध’ लगाएगा. इससे पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच तेहरान को झुकने पर मजबूर करने के लिए वॉशिंगटन का आर्थिक दबाव अभियान और तेज हो जाएगा.
वन-टू पंच
बेसेंट ने कहा कि ये प्रतिबंध ईरान पर पहले से लगी नाकेबंदी के साथ मिलकर काम करेंगे. उन्होंने इसे ‘वन-टू पंच’ (दोहरे प्रहार) जैसा बताया और कहा कि इससे ईरानी सरकार कमजोर पड़ जाएगी. उन्होंने कहा कि वह सोमवार को होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन उपायों के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे.
बेसेंट ने CNBC से कहा, ‘यह एक के बाद एक दोहरे प्रहार (one-two punch) जैसा है. हम नाकेबंदी कर रहे हैं और हम इतिहास की सबसे सख्त पाबंदियां लगाने जा रहे हैं. उन्होंने आगे कहा, ‘इसका असर ईरान पर होगा और हम इस सरकार को गिरा देंगे.’
अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए अहम समय
ट्रेजरी सेक्रेटरी ने अमेरिका के सहयोगियों और दूसरे देशों से यह तय करने को भी कहा कि क्या वे वॉशिंगटन के दबाव बनाने वाले अभियान का समर्थन करेंगे. उन्होंने कहा कि अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए अपना रुख तय करने का समय आ गया है.
उनकी टिप्पणी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी के एक दिन बाद आई है कि ईरान को किसी भी प्रकार की लाइफ लाइन की पेशकश करने वाले देशों को आर्थिक परिणामों का सामना करना पड़ सकता है. यह संकेत देते हुए कि प्रशासन ईरानी अर्थव्यवस्था को बनाए रखने वाले देशों को लक्षित करने के लिए तेहरान से परे अपने प्रयासों को बढ़ा सकता है.
तेल बाजार निकाल रहे गलत अर्थ
हालांकि, बेसेंट ने सुझाव दिया कि सख्त आर्थिक कार्रवाई को जरूरी नहीं कि नए सिरे से बड़े पैमाने पर सैन्य वृद्धि के रूप में समझा जाए. तेल की कीमतों में हालिया वृद्धि पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि बाजार वाशिंगटन की रणनीति के निहितार्थों को गलत समझ रहे हैं.
उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि तेल बाजार इस आर्थिक दबाव का गलत मतलब निकाल रहे हैं.’ उन्होंने तर्क दिया कि अधिकतम आर्थिक दबाव एक प्रमुख पुनः आरंभ की संभावना को कम कर सकता है. गुरुवार को तेल की कीमतें तीन सप्ताह से अधिक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं.
ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध
ईरान ने 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से लगभग पांच दशकों तक व्यापक अमेरिकी प्रतिबंधों को सहन किया है, जिसमें क्रमिक प्रशासन ने इसके बैंकिंग, ऊर्जा और व्यापार क्षेत्रों पर प्रतिबंध लगाए हैं. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने ट्रंप की नई चेतावनी को बढ़ते कर्ज और ब्याज दरों सहित अमेरिका की घरेलू आर्थिक चुनौतियों से ध्यान हटाने का प्रयास बताया.
होर्मुज जलडमरूमध्य
बेसेंट ने कहा, ‘हमें यकीन है कि हर कोई चाहता है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) फिर से खुले और ऊर्जा की कीमतें कम हों. याद रखें कि चीन अपनी 50% ऊर्जा खाड़ी क्षेत्र से ही हासिल करता है. इसलिए, इस योजना में शामिल होना उनके लिए भी बहुत फायदेमंद होगा.’
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