UPI पेमेंट पर लगने वाला है चार्ज! 2000 रुपये से ऊपर ट्रांजैक्शन पर 0.3% MDR, 2 हफ्ते में हो सकता है ऐलान

UPI Payment को लेकर बड़ा बदलाव हो सकता है. सरकार 2000 रुपये या उससे अधिक के UPI ट्रांजैक्शन पर 0.3 फीसदी MDR लागू करने की तैयारी में है. सूत्रों के मुताबिक, अगले 2 हफ्ते में इसका ऐलान हो सकता है, हालांकि, कंज्यूमर के लिए यूपीआई ट्रांजैक्शन फ्री रहने की बात कही गई है. प्रस्तावित एमडीआर का असर मुख्य रूप से मर्चेंट्स और बिजनेसेज पर पड़ सकता है.

यूपीआई पेमेंट Image Credit: Money9live/Canva

Highlights

  • 2000 रुपये या उससे अधिक के UPI ट्रांजैक्शन पर 0.3% MDR लागू करने की तैयारी, 2 हफ्ते में हो सकता है ऐलान.
  • कंज्यूमर के लिए UPI पेमेंट फ्री रहेगा, प्रस्तावित चार्ज का असर मुख्य रूप से मर्चेंट्स और बिजनेस पर पड़ेगा.
  • UPI के बढ़ते ऑपरेशनल खर्च और सरकार पर सब्सिडी के बोझ को कम करने के लिए MDR लागू करने की तैयारी है.

UPI Transaction Charge: भारत में UPI पेमेंट को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. सरकार 2000 रुपये या उससे अधिक के UPI ट्रांजैक्शन पर 0.3 फीसदी मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR लागू करने की तैयारी में है. सूत्रों के मुताबिक, इस संबंध में अगले 2 हफ्ते के भीतर ऐलान किया जा सकता है. हालांकि, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस प्रस्तावित चार्ज का बोझ आम कंज्यूमर पर सीधे नहीं डाला जाएगा. सरकार ने स्पष्ट किया है कि कंज्यूमर के लिए UPI ट्रांजैक्शन फ्री रहेगा.

जल्द जारी होगा गजट नोटिफिकेशन

Financialexpress की एक रिपोर्ट के मतुबिक, वित्तीय सेवा विभाग जल्द ही गजट नोटिफिकेशन जारी कर सकता है. यह नोटिफिकेशन डिजिटल पेमेंट के किन-किन तरीकों को ट्रांजैक्शन चार्ज से कानूनी सुरक्षा मिलती रहेगी, इसका दायरा स्पष्ट करेगा. इसके बाद UPI और सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी, जिसकी अध्यक्षता नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानी NPCI करता है, MDR की दर, दायरा और स्ट्रक्चर तय कर सकती है.

कंज्यूमर के लिए UPI रहेगा फ्री

UPI पर MDR लागू करने की चर्चा के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या आम लोगों को हर ट्रांजैक्शन पर चार्ज देना पड़ेगा. सरकार की ओर से फिलहाल ऐसा नहीं है. संसद में टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026 पर चर्चा के दौरान सरकार ने भरोसा दिलाया था कि UPI ट्रांजैक्शन कंज्यूमर के लिए फ्री रहेगा.

प्रस्तावित MDR मुख्य रूप से मर्चेंट यानी दुकानदार और बिजनेस के स्तर पर लागू होगा. MDR वह फीस है, जो डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने वाले बिजनेस से पेमेंट प्रोसेसर को मिलती है. इसका उद्देश्य UPI पेमेंट इकोसिस्टम में शामिल बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और अन्य कंपनियों की लागत को पूरा करने में मदद करना है.

2019 तक UPI पर लगता था MDR

UPI पर MDR कोई नई व्यवस्था नहीं है. दिसंबर 2019 तक पर्सन-टू-मर्चेंट यानी P2M UPI ट्रांजैक्शन पर 0.3 फीसदी तक MDR लागू था. इसके बाद जनवरी 2020 में डिजिटल पेमेंट को तेजी से बढ़ावा देने और कैश पेमेंट को कम करने के उद्देश्य से UPI पर जीरो MDR व्यवस्था लागू कर दी गई. इसके बाद सरकार ने बैंकों और पेमेंट इकोसिस्टम से जुड़े दूसरे पार्टिसिपेंट्स को आर्थिक सहायता देने के लिए इंसेंटिव स्कीम शुरू की.

इसके तहत 2000 रुपये तक के UPI ट्रांजैक्शन पर 0.15 फीसदी MDR के बराबर इंसेंटिव दिया गया. हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में UPI ट्रांजैक्शन में तेज वृद्धि के साथ पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च भी बढ़ा है. इसी वजह से इंडस्ट्री लंबे समय से UPI पर MDR दोबारा लागू करने की मांग कर रही है, ताकि पेमेंट सिस्टम को लंबे समय तक सस्टेनेबल बनाया जा सके.

क्रेडिट और डेबिट कार्ड से काफी कम होगा चार्ज

अगर 0.3 फीसदी MDR लागू होता है तो यह क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड के मुकाबले काफी कम होगा. फिलहाल क्रेडिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर MDR सामान्य तौर पर 1-3 फीसदी तक हो सकता है, जबकि डेबिट कार्ड पर यह लगभग 0.9 फीसदी तक हो सकता है. ऐसे में UPI पर प्रस्तावित 0.3 फीसदी MDR इन दोनों पेमेंट मोड्स की तुलना में कम रहेगा.

UPI पर बढ़ता जा रहा है पेमेंट का दबाव

UPI आज भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम का सबसे बड़ा हिस्सा बन चुका है. वित्त वर्ष 2025-26 में UPI के जरिए करीब 241.62 बिलियन ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल वैल्यू 314.23 लाख करोड़ रुपये रही. इसी अवधि में भारत के डिजिटल पेमेंट ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में UPI की हिस्सेदारी करीब 85 फीसदी रही.

UPI के इतने बड़े स्केल पर पहुंचने के साथ इसके इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाए रखने की लागत भी लगातार बढ़ रही है. बैंकों, पेमेंट ऐप्स और अन्य पेमेंट इंटरमीडियरीज को टेक्नोलॉजी, सर्वर, साइबर सिक्योरिटी और ट्रांजैक्शन प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगातार निवेश करना पड़ रहा है.

सरकार के सामने सब्सिडी का बोझ भी बढ़ा

UPI पर MDR को लेकर एक बड़ा कारण सरकार पर बढ़ता सब्सिडी बर्डन भी है. वित्त मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने हाल ही में UPI के लिए टियर्ड MDR फ्रेमवर्क को जल्द लागू करने की जरूरत बताई थी. कमेटी के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए UPI से जुड़े इंसेंटिव के लिए करीब 2000 करोड़ रुपये का बजटीय आवंटन किया गया है, जबकि इंडस्ट्री के अनुमान के मुताबिक UPI को ऑपरेट करने की लागत लगभग 20700 करोड़ रुपये हो सकती है.

यानी सरकारी आवंटन अनुमानित परिचालन लागत का करीब 10 फीसदी ही है. इंडस्ट्री के अनुमान में लगभग 150 बिलियन P2M ट्रांजैक्शन को आधार बनाया गया है और प्रति ट्रांजैक्शन करीब 1.38 रुपये की ऑपरेशनल लागत मानी गई है.

0.3 फीसदी MDR से क्या बदलेगा?

सरकार के सामने मुख्य उद्देश्य UPI को कंज्यूमर के लिए फ्री रखते हुए पेमेंट इकोसिस्टम की वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करना है. इसके लिए हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन या कुछ खास मर्चेंट्स पर MDR लागू करने का विकल्प अपनाया जा सकता है. हालांकि, MDR की अंतिम दर, किन ट्रांजैक्शन पर यह लागू होगा और इसका पूरा स्ट्रक्चर क्या होगा, यह अभी तय होना बाकी है. अंतिम व्यवस्था गवर्नमेंट नोटिफिकेशन और इसके बाद UPI से संबंधित स्टीयरिंग कमेटी के फैसले के बाद स्पष्ट होगी.

अगर 2000 रुपये से ऊपर के UPI ट्रांजैक्शन पर 0.3 फीसदी MDR लागू होता है, तो इससे बड़े ट्रांजैक्शन करने वाले मर्चेंट्स पर लागत बढ़ सकती है. वहीं, आम कंज्यूमर के लिए UPI पेमेंट फ्री रहने से रोजमर्रा के छोटे डिजिटल पेमेंट पर सीधे चार्ज पड़ने की संभावना नहीं होगी.

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