विदेश में हजारों करोड़ लगाने वाली कंपनियों की बढ़ेगी मुश्किल! RBI अब मांगेगा पूरा हिसाब-किताब

रुपये पर दबाव के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने घरेलू कंपनियों के बड़े विदेशी निवेश की जांच बढ़ा दी है. RBI ने प्रमुख बैंकों को 1 बिलियन डॉलर से ज्यादा के विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (ODI) और कंपनी की नेटवर्थ की चार गुना नियामकीय सीमा से अधिक वाले लेनदेन की विस्तृत जानकारी जुटाने के लिए एक चेकलिस्ट जारी की है.

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया Image Credit: Sudipta Das/NurPhoto via Getty Images

रुपये में गिरावट और डॉलर की बढ़ती मांग के बीच RBI ने बड़ी कंपनियों के विदेशी निवेश पर निगरानी बढ़ा दी है. अब विदेश में बड़ा निवेश करने वाली कंपनियों के सौदों की बारीकी से जांच होगी. द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, RBI ने बड़े बैंकों को एक चेकलिस्ट दी है. इसके तहत बैंकों को 1 अरब डॉलर यानी करीब 9,495 करोड़ रुपये से ज्यादा के विदेशी निवेश और तय सीमा से बड़े सौदों की जांच करनी होगी. बैंकों को सिर्फ वैल्यूएशन रिपोर्ट के आधार पर फैसला नहीं करना होगा, बल्कि निवेश की कीमत से लेकर कंपनी की वित्तीय हालत तक की पड़ताल करनी होगी.

किन विदेशी निवेशों पर रहेगी RBI की नजर?

रिपोर्ट के मुताबिक, RBI ने पिछले सप्ताह बड़े बैंकों को एक मानकीकृत चेकलिस्ट जारी की. इसके तहत 1 अरब डॉलर से ज्यादा के विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (Overseas Direct Investment) की जानकारी जुटानी होगी. इसके अलावा ऐसे सौदों की भी जांच होगी, जिनका वैल्यू निवेश करने वाली कंपनी की नेटवर्थ के चार गुना की नियामकीय सीमा से ज्यादा है.

इसका मतलब है कि बैंकों को बड़े विदेशी निवेश के मामलों में ज्यादा सावधानी बरतनी होगी. उन्हें यह देखना होगा कि कंपनी जिस विदेशी संपत्ति या कारोबार को खरीद रही है, उसकी कीमत सही है या नहीं और सौदे की शर्तें उचित हैं या नहीं.

सिर्फ वैल्यूएशन रिपोर्ट से नहीं चलेगा काम

अब बैंकों को विदेशी निवेश से जुड़े सौदों की जांच करते समय केवल वैल्यूएशन रिपोर्ट पर निर्भर नहीं रहना होगा. उन्हें विदेशी संपत्तियों की कीमत, अधिग्रहण के लिए चुकाए जा रहे अतिरिक्त प्रीमियम और शेयरों की अदला-बदली के अनुपात की स्वतंत्र रूप से जांच करनी होगी यानी अगर कोई कंपनी विदेश में किसी कारोबार को खरीदती है या शेयरों की अदला-बदली के जरिए निवेश करती है, तो बैंक को यह भी परखना होगा कि सौदे में तय कीमत और शर्तें सही हैं या नहीं.

कंपनी की कमाई और वित्तीय हालत भी जांचेंगे बैंक

बैंकों को निवेश करने वाली कंपनी की वित्तीय स्थिति का भी आकलन करना होगा. इसमें कंपनी की कमाई की गुणवत्ता, पहले किए गए विदेशी निवेश, पहले से मौजूद वित्तीय प्रतिबद्धताओं और किसी बड़े वित्तीय झटके को सहने की क्षमता की जांच शामिल है. इस प्रक्रिया का मकसद यह देखना है कि कंपनी विदेश में बड़ा निवेश करने की स्थिति में है या नहीं और क्या वह इस सौदे से जुड़े वित्तीय जोखिमों को संभाल सकती है.

रुपये में गिरावट के बीच बढ़ी निगरानी

रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल रुपये में 5 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है. डॉलर की लगातार बढ़ती मांग और विदेशी पूंजी के बाहर जाने से रुपये पर दबाव बना हुआ है. इससे पहले भी RBI ने कंपनियों के मुद्रा जोखिम से बचाव यानी करेंसी हेजिंग से जुड़े नियम सख्त किए थे. साथ ही आयातकों की डॉलर खरीद को सीमित करने के कदम भी उठाए थे. हालांकि, रिपोर्ट में यह भी साफ किया गया है कि RBI ने विदेशी निवेश पर कोई नई पाबंदी नहीं लगाई है. उसने बड़े निवेश से जुड़े सौदों की जांच के लिए बैंकों को चेकलिस्ट दी है. इस मामले पर टिप्पणी के लिए भेजे गए अनुरोध का RBI ने तुरंत जवाब नहीं दिया.

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