Rupee vs Dollar: 97 रुपये तक पहुंच सकता है डॉलर, US Iran तनाव से बढ़ेगा दबाव, रिपोर्ट में दावा
BMI के मुताबिक भारतीय रुपया FY2026 27 के अंत तक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 97 रुपये और FY2027 28 के अंत तक 99 रुपये तक कमजोर हो सकता है. अभी रुपया करीब 95.4 रुपये प्रति डॉलर है. US Iran संघर्ष, महंगा कच्चा तेल, वैश्विक जोखिम और भारत अमेरिका ब्याज दरों का अंतर रुपये पर दबाव बढ़ा सकता है.

भारतीय रुपया आने वाले समय में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले और कमजोर हो सकता है. Fitch Solutions की रिसर्च कंपनी BMI ने रुपये को लेकर नया अनुमान जारी किया है. BMI के मुताबिक FY2026-27 के अंत तक रुपया 97 रुपये प्रति डॉलर तक पहुंच सकता है. FY2027 28 के अंत तक इसके 99 रुपये प्रति डॉलर तक कमजोर होने का अनुमान है. अभी रुपया करीब 95.4 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर है. महंगा कच्चा तेल, वैश्विक जोखिम और ब्याज दरों का अंतर रुपये पर दबाव बढ़ा सकते हैं.
FY27 के अंत तक 97 रुपये हो सकता है रुपया
BMI के अनुसार भारतीय रुपया FY2026-27 के अंत तक 97 रुपये प्रति डॉलर तक कमजोर हो सकता है. इसके बाद FY2027-28 के अंत तक रुपये के 99 रुपये प्रति डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है. मौजूदा स्तर से देखें तो यह रुपये में आगे और कमजोरी का संकेत है. रिसर्च फर्म के मुताबिक आने वाले दो वित्त वर्ष में कई ऐसे कारण हैं जो रुपये पर दबाव बनाए रख सकते हैं.
US Iran तनाव से रुपये पर दबाव
BMI के मुताबिक US Iran संघर्ष शुरू होने के बाद रुपया अब तक करीब 4 फीसदी कमजोर हो चुका है. संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और दुनिया भर के बाजारों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ी है. इसका सीधा असर उभरते बाजारों की करेंसी पर पड़ रहा है. अगर US Iran तनाव लंबा खिंचता है तो रुपये पर दबाव और बढ़ सकता है.
महंगा तेल बढ़ाएगा डॉलर की मांग
भारत अपनी तेल जरूरत का करीब 90 फीसदी हिस्सा आयात करता है. ऐसे में Brent Crude की कीमत लंबे समय तक ऊंची रहने पर भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ सकता है. तेल आयात के भुगतान के लिए ज्यादा डॉलर की जरूरत होगी. इससे रुपये पर दबाव बढ़ सकता है. BMI ने कहा कि भारत की ऊर्जा पर निर्भरता रुपये के लिए सबसे बड़े जोखिमों में से एक बनी हुई है.
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ब्याज दरों का अंतर भी रुपये के लिए चिंता
भारत और अमेरिका की ब्याज दरों में अंतर भी रुपये के लिए पहले की तुलना में कम मददगार हो सकता है. BMI को उम्मीद है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व 2026 के बाकी हिस्से में ब्याज दर 3.75 फीसदी पर रख सकता है. इसके बाद 2027 में 50 बेसिस प्वाइंट की कटौती का अनुमान है. वहीं RBI से फरवरी 2027 में 25 बेसिस प्वाइंट की दर बढ़ोतरी की उम्मीद जताई गई है.