CAS बंद होगा या रहेगा जारी? SEBI चीफ ने साफ किया रुख, ट्रेडर्स के लिए कही बड़ी बात

CAS को लेकर SEBI Chief तुहिन कांता पांडे ने बड़ा बयान दिया है. SEBI नए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन से जुड़े मुद्दों का एनालिसिस कर रहा है और जल्द अपना व्यू सामने रख सकता है. CAS अब मार्केट स्ट्रक्चर का हिस्सा बना रहेगा, लेकिन पार्टिसिपेशन बढ़ाने और मौजूदा इश्यूज को दूर करने पर फोकस किया जाएगा.

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SEBI: भारतीय शेयर बाजार में क्लोजिंग ऑक्शन सेशन यानी CAS को लेकर उठ रही चिंताओं के बीच SEBI Chief तुहिन कांता पांडे ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि मार्केट रेगुलेटर CAS से जुड़े मुद्दों का एनालिसिस कर रहा है और जल्द ही इस पर अपना व्यू सामने रखेगा. पांडे के मुताबिक, CAS को लेकर मार्केट पार्टिसिपेंट्स की चिंताओं को देखा जा रहा है और जरूरत पड़ने पर सिस्टम में बदलाव या सुधार पर विचार किया जाएगा.

CAS को लेकर क्या है पूरा मामला

क्लोजिंग ऑक्शन सेशन एक अलग 20 मिनट का ट्रेडिंग सेशन है, जिसे पिछले सप्ताह लागू किया गया. इसका मकसद स्टॉक्स का क्लोजिंग प्राइस ज्यादा फेयर और ट्रांसपेरेंट तरीके से तय करना है. इस सेशन में एक्सचेंजेज बाय और सेल ऑर्डर्स को कलेक्ट करते हैं और उस प्राइस लेवल को निर्धारित करते हैं, जहां अधिकतम वॉल्यूम में ट्रांजैक्शंस एग्जीक्यूट हो सकें.

इससे पहले स्टॉक्स का क्लोजिंग प्राइस रेगुलर ट्रेडिंग के आखिरी 30 मिनट में हुए ट्रेड्स के एवरेज प्राइस के आधार पर तय किया जाता था. नए CAS मैकेनिज्म का उद्देश्य बड़े ऑर्डर्स के लिए एग्जीक्यूशन एफिशिएंसी बेहतर करना और क्लोजिंग प्राइस को ज्यादा ट्रांसपेरेंट बनाना है.

हालांकि, सिस्टम लागू होने के बाद कुछ मार्केट पार्टिसिपेंट्स ने इसके असर को लेकर चिंता जताई है. खास तौर पर ट्रेडिंग पार्टिसिपेशन कम होने और कुछ मार्केट प्लेयर्स को होने वाले संभावित लॉस को लेकर सवाल उठाए गए हैं.

‘CAS रहेगा, पार्टिसिपेशन बढ़ाना जरूरी’

SEBI Chief तुहिन कांता पांडे ने 17 अगस्त को CAS को लेकर पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए कहा कि SEBI इन मुद्दों का एनालिसिस कर रहा है और जल्द ही अपना व्यू सामने रखेगा. पांडे के मुताबिक, CAS अब मार्केट स्ट्रक्चर का हिस्सा बना रहेगा. उन्होंने कहा कि ज्यादा पार्टिसिपेशन सुनिश्चित करना और मौजूदा इश्यूज को दूर करना सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण है.

उन्होंने यह भी कहा कि CAS को रोजाना के आधार पर ट्रैक नहीं किया जा सकता और मार्केट में अननेसेसरी इश्यूज पैदा नहीं किए जाने चाहिए. उनके मुताबिक, इंडिकेटिव प्राइसेज ट्रेडर्स के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं.

SEBI कर रहा स्टेकहोल्डर्स से कंसल्टेशन

SEBI CAS से जुड़े मुद्दों को समझने के लिए अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स से फीडबैक ले रहा है. मार्केट पार्टिसिपेंट्स से मिलने वाले इनपुट्स के अलावा सोशल मीडिया पर होने वाली डिस्कशंस और फीडबैक को भी देखा जा रहा है. पांडे ने बताया कि SEBI CAS से जुड़े प्रॉब्लम्स की पहचान कर रहा है. खास तौर पर PMS यानी पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज से जुड़े पहलुओं को भी देखा जा रहा है.

SEBI का मानना है कि नए सिस्टम को समझने और उसमें सहज होने के लिए मार्केट पार्टिसिपेंट्स को कुछ समय की जरूरत है. ब्रोकर्स और ट्रेडिंग पार्टिसिपेंट्स को पुरानी मेथडोलॉजी के हिसाब से बनाए गए ट्रेडिंग एल्गोरिदम्स और सिस्टम्स को भी नए मैकेनिज्म के अनुसार अडैप्ट करना पड़ रहा है.

इंडिकेटिव प्राइस को लेकर भी अहम बात

CAS को लेकर सबसे अहम मुद्दों में से एक इंडिकेटिव प्राइस की उपलब्धता है. SEBI Chief के मुताबिक, ट्रेडर्स के लिए इंडिकेटिव प्राइसेज बेहद महत्वपूर्ण हैं. कई ब्रोकर्स ने अपनी वेबसाइट्स पर इंडिकेटिव प्राइसेज दिखाना शुरू कर दिया है. आने वाले समय में और बड़े ब्रोकर्स के अपने ऐप्स पर भी यह इंफॉर्मेशन उपलब्ध कराने की उम्मीद है.

SEBI के अनुसार, नए सिस्टम की शुरुआत के दौरान सामने आई कुछ डिस्क्रेपेंसीज हाल के दिनों में कम हुई हैं. पांडे ने बताया कि 3 अगस्त को देखी गई डिस्क्रेपेंसीज की तुलना में बाद के आंकड़ों में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में सुधार देखने को मिला है.

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