लगातार पांचवें दिन मजबूत हुआ रुपया, डॉलर के मुकाबले 9 पैसे चढ़ा, विदेशी निवेश से मिला सपोर्ट

घरेलू शेयर बाजार में मजबूती और विदेशी निवेशकों की खरीदारी के दम पर रुपया लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में मजबूत हुआ. गुरुवार को रुपया 9 पैसे चढ़कर 95.67 प्रति डॉलर पर बंद हुआ. कमजोर डॉलर इंडेक्स से भी सपोर्ट मिला, हालांकि पश्चिम एशिया में तनाव के कारण कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने तेजी को सीमित रखा.

रुपया लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में मजबूत हुआ. Image Credit: @Money9live

Rupee US Dollar: भारतीय रुपया गुरुवार को लगातार पांचवें कारोबारी दिन मजबूत होकर बंद हुआ. डॉलर के मुकाबले रुपया 9 पैसे की तेजी के साथ 95.67 पर पहुंच गया. घरेलू शेयर बाजार में तेजी और विदेशी निवेशकों की खरीदारी से रुपये को मजबूती मिली. हालांकि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने इसकी तेजी पर कुछ असर डाला. बाजार की नजर अब अमेरिका के आर्थिक आंकड़ों पर बनी हुई है.

पांचवें दिन भी रुपये में तेजी

गुरुवार को इंटरबैंक फॉरेन करेंसी मार्केट में रुपया 95.59 पर खुला. कारोबार के दौरान यह 95.56 के हाई लेवल और 95.75 के निचले स्तर तक गया. आखिर में रुपया 9 पैसे की मजबूती के साथ 95.67 प्रति डॉलर पर बंद हुआ. इससे पहले बुधवार को भी रुपया 6 पैसे मजबूत होकर 95.76 पर बंद हुआ था. 23 जुलाई के बाद से रुपया लगातार मजबूत हो रहा है.

विदेशी निवेश का मिला सपोर्ट

जानकारों के मुताबिक, घरेलू शेयर बाजार में तेजी और विदेशी निवेशकों की लगातार खरीदारी ने रुपये को मजबूती दी. गुरुवार को सेंसेक्स 273.55 अंक चढ़कर 77928.15 पर बंद हुआ. वहीं निफ्टी 66.95 अंक की तेजी के साथ 24317.15 पर पहुंच गया. एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बुधवार को 2981.87 करोड रुपये की शुद्ध खरीदारी की.

पश्चिम एशिया के तनाव से दबाव

रुपये की मजबूती पर कच्चे तेल की कीमतों ने दबाव बनाए रखा. ब्रेंट क्रूड 90.63 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता रहा. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बाद ग्लोबल एनर्जी सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है. इससे कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं.

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डॉलर इंडेक्स में नरमी से मिला फायदा

डॉलर इंडेक्स में हल्की कमजोरी भी रुपये के लिए पॉजिटिव रही. डॉलर इंडेक्स 0.05 फीसदी की गिरावट के साथ 101.67 पर कारोबार करता दिखा. इससे उभरते बाजारों की मुद्राओं को कुछ राहत मिली. हालांकि वैश्विक अनिश्चितता के कारण रुपये की तेजी सीमित रही.