8th Pay Commission: सरकार ने तोड़ी चुप्पी! 8वें वेतन आयोग के फिटमेंट फैक्टर पर आया बड़ा अपडेट

केंद्र सरकार ने संसद में स्पष्ट किया है कि 8वां वेतन आयोग अपनी कार्यप्रणाली और फिटमेंट फैक्टर पर खुद फैसला करेगा. कर्मचारी संगठनों की मांगों पर सरकार ने कोई टिप्पणी नहीं की. आयोग की रिपोर्ट 2027 के मध्य तक आने की उम्मीद है.

8वां केंद्रीय वेतन आयोग

Highlights

  • फिटमेंट फैक्टर पर सरकार ने जवाब दिया
  • आयोग स्वयं तय करेगा पूरी प्रक्रिया
  • रिपोर्ट 2027 मध्य तक आने की उम्मीद

8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के फिटमेंट फैक्टर को लेकर लंबे समय से चल रही चर्चाओं के बीच केंद्र सरकार ने पहली बार संसद में अपनी स्थिति स्पष्ट की है. सरकार ने कहा है कि फिटमेंट फैक्टर समेत सभी सिफारिशों पर फैसला करना 8वें केंद्रीय वेतन आयोग का अधिकार है. आयोग अपनी कार्यप्रणाली और परामर्श प्रक्रिया खुद तय करेगा तथा उसे अपनी आंतरिक बैठकों या विचार-विमर्श की जानकारी सरकार को देने की जरूरत नहीं है.

यह जानकारी वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने राज्यसभा में एक लिखित प्रश्न के जवाब में दी. कर्मचारी संगठनों की ओर से फिटमेंट फैक्टर बढ़ाने और न्यूनतम वेतन तय करने के तरीके में बदलाव की मांग को लेकर सरकार से सवाल पूछा गया था.

क्या थी कर्मचारी संगठनों की मांग?

राज्यसभा सांसद जावेद अली खान ने सरकार से पूछा था कि क्या कर्मचारी संगठनों ने फिटमेंट फैक्टर तय करते समय तीन की बजाय पांच पारिवारिक इकाइयों (Family Units) को आधार बनाने की मांग की है. इस प्रस्ताव में कर्मचारियों के आश्रित माता-पिता को भी परिवार का हिस्सा मानने की बात कही गई है. सांसद ने यह भी जानना चाहा कि आयोग ने अब तक कितनी बैठकें की हैं, किन कर्मचारी संगठनों से चर्चा हुई है और सरकार का इन मांगों पर क्या रुख है.

सरकार ने क्या कहा?

वित्त राज्य मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार ने 3 नवंबर 2025 को 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के गठन की अधिसूचना जारी की थी. इसी अधिसूचना में आयोग का टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) भी तय किया गया था.

उन्होंने कहा कि अधिसूचना में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि 8वां वेतन आयोग अपनी प्रक्रिया स्वयं तय करेगा. आयोग अपनी बैठकों, विचाराधीन सिफारिशों या कर्मचारी संगठनों से हुई बातचीत की जानकारी सरकार को देने के लिए बाध्य नहीं है. यही वजह है कि सरकार के पास फिलहाल यह जानकारी नहीं है कि आयोग ने अब तक कितनी बैठकें की हैं या कर्मचारी संगठनों की किन मांगों पर विचार किया गया है.

फिटमेंट फैक्टर क्यों है सबसे अहम?

फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक (Multiplier) होता है, जिसके आधार पर केंद्रीय कर्मचारियों का बेसिक वेतन संशोधित किया जाता है. इसका सीधा असर कर्मचारियों के वेतन, पेंशन और अन्य रिटायरमेंट लाभों पर पड़ता है.

इसी कारण हर वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर सबसे ज्यादा चर्चा का विषय रहता है. कर्मचारी संगठनों का मानना है कि बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की लागत को देखते हुए इस बार फिटमेंट फैक्टर पहले से काफी अधिक होना चाहिए.

कितने फिटमेंट फैक्टर की मांग?

कई कर्मचारी संगठन 3.68 फिटमेंट फैक्टर लागू करने की मांग कर रहे हैं. वहीं कुछ संगठनों ने इसे 3.0 से 3.5 के बीच रखने का सुझाव दिया है. उनका तर्क है कि परिवार का खर्च पहले की तुलना में काफी बढ़ चुका है, इसलिए न्यूनतम वेतन तय करते समय परिवार के सदस्यों की संख्या भी बढ़ाई जानी चाहिए. हालांकि सरकार ने इन मांगों को न स्वीकार किया है और न ही खारिज किया है. उसने स्पष्ट कर दिया है कि इस पर अंतिम फैसला 8वां वेतन आयोग ही करेगा.

पिछले वेतन आयोग में क्या हुआ था?

6वें वेतन आयोग में प्रभावी फिटमेंट बेनिफिट करीब 1.86 था. इसके बाद 7वें वेतन आयोग ने 2.57 फिटमेंट फैक्टर की सिफारिश की थी. इसके लागू होने पर केंद्रीय कर्मचारियों का न्यूनतम बेसिक वेतन 7,000 रुपये से बढ़ाकर 18,000 रुपये कर दिया गया था.

इसी वजह से कर्मचारियों को उम्मीद है कि 8वें वेतन आयोग में भी न्यूनतम वेतन में अच्छी-खासी बढ़ोतरी हो सकती है. हालांकि अंतिम फैसला महंगाई, सरकारी वित्तीय स्थिति और आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आयोग ही करेगा.

रिपोर्ट कब तक आएगी?

सरकार ने यह भी बताया कि 8वां केंद्रीय वेतन आयोग अपने गठन की तारीख से 18 महीने के भीतर अपनी सिफारिशें सौंपेगा. चूंकि आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को हुआ था, इसलिए इसकी रिपोर्ट 2027 के मध्य तक आने की संभावना है. इसके बाद केंद्र सरकार रिपोर्ट की समीक्षा करेगी और सिफारिशों को लागू करने पर अंतिम निर्णय लेगी. फिलहाल लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की नजर आयोग की रिपोर्ट और खासतौर पर फिटमेंट फैक्टर पर टिकी हुई है.

यह भी पढ़ें- भारत बना रक्षा बाजार का नया सुपरस्टार! सस्ती मिसाइलों पर दुनिया की नजर