भारत ने सितंबर में तोड़ा क्रूड ऑयल इंपोर्ट का रिकॉर्ड, होर्मुज खतरे के बावजूद गल्फ सप्लाई में उछाल

सितंबर में भारत का क्रूड ऑयल इंपोर्ट 2026 के सबसे ऊंचे लेवल 5.26 मिलियन बैरल प्रति दिन पर पहुंच गया, क्योंकि गल्फ सप्लाई बढ़ी और रूस के बाद इराक देश का दूसरा सबसे बड़ा सप्लायर बन गया. Strait of Hormuz से फ्लो बढ़ने से भारतीय रिफाइनरियों को रूसी तेल से अलग होने के दबाव के बीच मिडिल ईस्टर्न क्रूड तक ज़्यादा पहुंच मिली है.

क्रूड ऑयल Image Credit: Getty image

Highlights

  • क्रूड ऑयल इंपोर्ट रिकॉर्ड 5.26 mbd.
  • इराक बना रूस के बाद दूसरा सप्लायर.
  • गल्फ देशों से बढ़ी कच्चे तेल सप्लाई.

सितंबर में भारत का क्रूड ऑयल इंपोर्ट साल के सबसे ज्यादा 5.26 मिलियन बैरल प्रति दिन (mbd) पर पहुंच गया, जिसकी वजह गल्फ सप्लाई में अचानक बढ़ोतरी थी. फरवरी में यूएस-ईरान लड़ाई शुरू होने के बाद पहली बार, रूस के बाद इराक दूसरा सबसे बड़ा सप्लायर बना. Strait of Hormuz से गुजरने वाले वॉल्यूम में तेज बढ़ोतरी गल्फ प्रोड्यूसर और ट्रेडर द्वारा अपनाए गए एक तरीके की वजह से हुई है, जिससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या पानी के रास्ते पर ईरान का कंट्रोल कमजोर हो रहा है.

भारतीय रिफाइभारतीय रिफाइनरियों के लिए राहत

इकनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, दर्जनों बड़े क्रूड कैरियर अब UAE और ओमानी वाटर में शिप-टू-शिप (STS) ऑपरेशन के जरिए अपना माल ट्रांसफर करने से पहले, अपने ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) ट्रांसपोंडर बंद करके Strait of Hormuz को पार कर रहे हैं. दूसरे जहाज क्रूड को कस्टमर तक ले जाते हैं, जबकि ओरिजिनल कैरियर दूसरे रन के लिए गल्फ टर्मिनल पर लौट आते हैं. गल्फ सप्लाई का फिर से शुरू होना भारतीय रिफाइनरियों के लिए राहत की बात है, जिनमें से कई मिडिल ईस्टर्न क्रूड को प्रोसेस करने के लिए बने हैं.

कमोडिटी एनालिटिक्स फर्म केप्लर में रिफाइनिंग के लीड एनालिस्ट निखिल दुबे ने कहा, मिडिल ईस्ट में बैरल की ज्यादा उपलब्धता न सिर्फ खोई हुई सप्लाई को वापस लाने में मदद करती है, बल्कि मजबूत मिडिल-डिस्टिलेट यील्ड वाले क्रूड ग्रेड तक पहुंच भी देती है, जो भारत के घरेलू प्रोडक्ट की मांग के हिसाब से सही है. ग्राहम बिल के हाल ही में पास होने के बाद गल्फ क्रूड की बढ़ी हुई उपलब्धता खास तौर पर जरूरी है, जो अमेरिकी राष्ट्रपति को भारत और रूसी तेल के दूसरे खरीदारों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है.

इतनी रही गल्फ देशों की हिस्सेदारी

दुबे ने कहा, मिडिल ईस्ट में बैरल की काफी उपलब्धता भारतीय रिफाइनरियों को रूसी बैरल में अपना एक्सपोजर कम करने के लिए एक्स्ट्रा सोर्सिंग ऑप्शन देती है. केप्लर के मुताबिक, सितंबर में भारत के कुल क्रूड इंपोर्ट में सऊदी अरब, इराक, UAE, कुवैत, ओमान और कतर का हिस्सा 39 फीसदी था. इराक ने 525,000 bpd सप्लाई किया, उसके बाद सऊदी अरब ने 517,000 bpd और UAE ने 438,000 bpd सप्लाई किया. सबसे बड़ा सरप्राइज कुवैत से आया, जिसने 335,000 bpd सप्लाई की, जो एक साल में उसका सबसे ज्यादा वॉल्यूम है.

28 फरवरी को ईरान युद्ध शुरू होने के बाद महीनों तक भारत के इंपोर्ट स्लेट से इराक और कुवैत से सप्लाई लगभग गायब हो गई थी. खाड़ी की नेशनल तेल कंपनियां, कुछ ग्लोबल ट्रेडर्स के साथ मिलकर, जहाजों का इंतजाम कर रही हैं और Strait of Hormuz को पार करने का रिस्क उठा रही हैं, जबकि जहाजों पर कुछ हमलों की खबरें आ रही हैं. सऊदी अरब की जरूरी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन, जिस पर सितंबर में हूतियों ने हमला किया था ने भी ऑपरेशन फिर से शुरू कर दिया है और यानबू के रेड सी पोर्ट पर क्रूड लोड करना शुरू कर दिया है.

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