रुपया हुआ मजबूत, 1 फीसदी बढ़कर 95.76 पर खुला; RBI के इस कदम से बदली चाल

यह सुधार तब आया है जब रुपया कैलेंडर वर्ष 2026 में 7 फीसदी से अधिक और वित्त वर्ष 2027 में अब तक लगभग 3.5 फीसदी कमजोर हो चुका है. केंद्रीय बैंक ने 'फॉरेन एक्सचेंज रिस्क रिजर्व' (FERR) भी शुरू किया है.

रुपया हुआ मजबूत. Image Credit: Money9live

सोमवार को भारतीय रुपया 95.76 प्रति डॉलर पर खुला, जबकि शुक्रवार को यह 96.73 पर बंद हुआ था. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा वीकेंड पर स्पॉट मार्केट में डॉलर की मांग को कम करने और करेंसी में सट्टेबाजी वाले ट्रेड पर रोक लगाने के उपायों की घोषणा के बाद इसमें लगभग 1 फीसदी की बढ़त देखी गई.

रुपये पर दबाव

यह सुधार तब आया है जब रुपया कैलेंडर वर्ष 2026 में 7 फीसदी से अधिक और वित्त वर्ष 2027 में अब तक लगभग 3.5 फीसदी कमजोर हो चुका है, और मई में बने 96.96 प्रति डॉलर के अपने रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब पहुंच गया है. कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, मजबूत डॉलर और लगातार विदेशी पूंजी की निकासी ने करेंसी पर दबाव बनाए रखा है.

तेल कंपनियों के लिए खास सुविधा

RBI ने इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन के लिए एक खास सुविधा शुरू की, ताकि वे तय बैंकों के जरिए अपनी रोजाना की डॉलर की जरूरतें पूरी कर सकें और रेगुलर स्पॉट मार्केट से खरीदारी न करें.

इसके अलावा, RBI ने बिना अंडरलाइंग एक्सपोजर वाले खास फॉरेक्स डेरिवेटिव ट्रांजैक्शन के लिए लिमिट को $100 मिलियन से घटाकर $5 मिलियन कर दिया और कुछ विदेशी मुद्रा कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए 20 फीसदी कैश रिजर्व की जरूरत लागू की.

फॉरेक्स एनालिस्ट का कहना है कि इन उपायों से भारतीय करेंसी को कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और मजबूत डॉलर के दबाव का सामना करने में मदद मिलने की उम्मीद है.

RBI ने 10 अक्टूबर के अपने सर्कुलर में अधिकृत डीलरों को यह निर्देश दिया कि वे ट्रेडर्स को रद्द किए गए रुपये से जुड़े विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट को दोबारा बुक करने की अनुमति न दें, जबकि मौजूदा नियमों के तहत मैच्योरिटी पर रोलओवर की अनुमति जारी रहेगी.

फॉरेन एक्सचेंज रिस्क रिजर्व

केंद्रीय बैंक ने ‘फॉरेन एक्सचेंज रिस्क रिजर्व’ (FERR) भी शुरू किया. इसके तहत अधिकृत डीलरों को RBI के पास नकद में उस राशि का 20 फीसदी हिस्सा रखना होगा, जो रुपये से जुड़े प्रत्येक विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट की नोशनल राशि (जो 2 मिलियन डॉलर से ज्यादा हो) के बराबर हो.

यह नियम उन ट्रांजैक्शन पर लागू होगा जो रुपये के बदले विदेशी मुद्रा की खरीद से जुड़े करंट अकाउंट एक्सपोजर को हेज करने के लिए किए जाते हैं.

RBI ने कहा कि इन उपायों का मकसद मार्केट में अनुशासन को मजबूत करना और सही रिस्क मैनेजमेंट सुनिश्चित करना है, साथ ही विदेशी मुद्रा बाजार को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाए रखना है.

17 पैसे की बढ़त

भारतीय करेंसी शुक्रवार के सेशन में 17 पैसे की बढ़त के साथ 96.71 पर बंद हुई थी, जबकि उससे एक दिन पहले इसमें 13 पैसे की गिरावट आई थी और यह डॉलर के मुकाबले 96.88 के अपने सबसे निचले क्लोजिंग स्तर पर पहुंच गई थी.

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