10 साल बाद चीनी आयात करेगा भारत! 1 मिलियन टन रॉ शुगर मंगाने की तैयारी
भारत करीब 10 साल बाद 1 मिलियन टन रॉ शुगर का आयात करने की तैयारी में है. घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने, स्टॉक घटने और खपत बढ़ने के बीच सरकार बिना ड्यूटी के रॉ शुगर आयात की अनुमति देने पर विचार कर रही है. महाराष्ट्र में एक्स-मिल चीनी की कीमत 5,400-5,560 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है.

Sugar Import India: भारत करीब 10 साल बाद फिर से चीनी आयात करने की तैयारी में है. घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने, स्टॉक घटने और खपत बढ़ने के बीच सरकार करीब 1 मिलियन टन रॉ शुगर को बिना ड्यूटी के आयात की अनुमति देने पर विचार कर रही है. इसका उद्देश्य त्योहारी सीजन से पहले घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाना और कीमतों को नियंत्रित करना है.
10 साल बाद आयात की नौबत
बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने आखिरी बार 2016-17 सीजन में रॉ शुगर का आयात किया था. अब करीब एक दशक बाद फिर से आयात की जरूरत महसूस हो रही है. महाराष्ट्र में बेंचमार्क एक्स-मिल चीनी की कीमत 5,400-5,560 रुपये प्रति क्विंटल के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई है.
मार्च 2026 से चीनी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है. इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक, 2025-26 सीजन में खपत उत्पादन से ज्यादा रहने के कारण मिलों के पास मौजूद स्टॉक तेजी से कम हुआ है. इसके अलावा, त्योहारी सीजन में चीनी की मांग बढ़ने से सप्लाई पर दबाव और बढ़ गया है.
एक्सपोर्ट से भी बढ़ा दबाव
कुछ इंडस्ट्री विशेषज्ञों का मानना है कि 2025-26 सीजन में चीनी के एक्सपोर्ट की अनुमति देने से भी मौजूदा स्थिति बनी है. नवंबर 2025 में केंद्र सरकार ने पहले 1.5 मिलियन टन चीनी के एक्सपोर्ट की अनुमति दी थी. बाद में इसे बढ़ाकर 2 मिलियन टन कर दिया गया. इंडस्ट्री के अनुमान के मुताबिक, एक्सपोर्ट पर रोक लगने से पहले करीब 0.8 मिलियन टन चीनी देश से बाहर भेजी जा चुकी थी. अब करीब इतनी ही मात्रा के बराबर रॉ शुगर के आयात की योजना बनाई जा रही है.
कितना है चीनी का स्टॉक?
अनुमान के मुताबिक, 2025-26 सीजन में भारत का वास्तविक नेट शुगर प्रोडक्शन करीब 27.9 मिलियन टन रहा. इसमें 2.4 मिलियन टन का इस्तेमाल एथेनॉल के लिए किया गया. सीजन की शुरुआत में ओपनिंग स्टॉक करीब 4.7 मिलियन टन था. इस तरह कुल उपलब्धता करीब 32.6 मिलियन टन रही. वहीं, इस साल घरेलू चीनी खपत करीब 28 मिलियन टन रहने का अनुमान है. सामान्य स्थिति में इससे करीब 4.7 मिलियन टन का क्लोजिंग स्टॉक बचना चाहिए था.
लेकिन एक्सपोर्ट को शामिल करने के बाद यह स्टॉक घटकर करीब 3.5-3.9 मिलियन टन रह सकता है. इंडस्ट्री के मुताबिक, सामान्य तौर पर देश में करीब 6 मिलियन टन का क्लोजिंग स्टॉक होना चाहिए, जो लगभग 3 महीने की खपत के बराबर है. ऐसे में 1 अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाले 2026-27 सीजन की शुरुआत में स्टॉक सामान्य स्तर से काफी कम रह सकता है.
कीमतों पर कितना असर होगा?
सरकार की ओर से करीब 1 मिलियन टन रॉ शुगर के आयात से बाजार में सप्लाई बढ़ सकती है, लेकिन इससे कीमतों में बहुत बड़ी गिरावट की उम्मीद नहीं है. सूत्रों के मुताबिक, कीमतों में अधिकतम करीब 500 रुपये प्रति क्विंटल की कमी आ सकती है. हालांकि, शुगर मिलों के लिए यह स्थिति पूरी तरह नकारात्मक नहीं होगी. मौजूदा कीमतों में 500 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट के बाद भी कीमतें करीब 4,200-4,300 रुपये प्रति क्विंटल की अनुमानित प्रोडक्शन कॉस्ट से ऊपर रह सकती हैं.
इससे मिलों को गन्ना किसानों का बकाया तेजी से चुकाने में मदद मिल सकती है. इस बीच, भारत के आयात की खबर से न्यूयॉर्क में रॉ शुगर की कीमत करीब 17.47 सेंट प्रति पाउंड के 14 महीने के हाई पर पहुंच गई. अनुमान के मुताबिक, बिना ड्यूटी के आयात करने पर लैंडेड प्राइस करीब 3,840 रुपये प्रति क्विंटल रह सकता है, जिससे आयातकों के लिए भी पर्याप्त मार्जिन की गुंजाइश बनती है.
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