चंद्रशेखरन और नोएल टाटा के बीच हुई सीक्रेट मीटिंग, पुराने दिग्गजों की सुलह कराने की कोशिश, क्या बन गई बात?
Tata Group Controversy: टाटा ग्रुप के पूर्व अधिकारियों और कुछ अंदरूनी लोगों के दखल के बाद रविवार को यह बैठक हुई. ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि इस विवाद से ग्रुप के ब्रांड पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंताएं जताई जा रही थीं.

Tata Group Controversy: टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन और टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा के बीच रविवार को एक सीक्रेट मीटिंग हुई. इस बैठक का आयोजन ग्रुप के पूर्व दिग्गज एन.ए. सूनावाला ने किया था, जिसका मकसद भारत के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में से एक के नेतृत्व में चल रहे मतभेदों को सुलझाना था. मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के अनुसार, यह बैठक बिना किसी नतीजे के खत्म हुई.
उन्होंने बताया कि बातचीत के मुख्य मुद्दों में होल्डिंग कंपनी की लिस्टिंग, टाटा संस में शापूरजी पलोनजी (SP) ग्रुप की हिस्सेदारी खरीदने का प्रस्ताव और चेयरमैन के तौर पर चंद्रशेखरन का कार्यकाल शामिल था.
मीटिंग में नहीं बन सकी सहमति
ईटी की रिपोर्ट के अनुसार, हालांकि, 25 अक्टूबर को हुई यह बैठक आगे और बातचीत करने की आपसी सहमति के साथ खत्म हुई थी, लेकिन अगले ही दिन नोएल टाटा ने एक पत्र जारी कर 17 सितंबर को हुई टाटा संस की बोर्ड बैठक में लिए गए फैसलों पर सवाल उठाए.
उन्होंने चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को मंजूरी देने की प्रक्रिया, वोटिंग के नियमों और हितों के टकराव (कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट) की संभावना पर सवाल खड़े किए. नोएल टाटा ने 26 अक्टूबर के अपने पत्र में बोर्ड बैठक की रिकॉर्डिंग, अंतिम मिनट्स (कार्यवाही का विवरण) और वोटिंग रिकॉर्ड की मांग की.
अंदरूनी लोगों के दखल बाद हुई बैठक
ईटी ने अपने सोर्स के हवाले से बताया कि टाटा ग्रुप के पूर्व अधिकारियों और कुछ अंदरूनी लोगों के दखल के बाद रविवार को यह बैठक हुई. ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि इस विवाद से ग्रुप के ब्रांड पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंताएं जताई जा रही थीं. 17 सितंबर को हुई बोर्ड बैठक के बाद दोनों पक्षों के बीच यह पहली ऐसी मुलाकात थी. उस बोर्ड बैठक में चंद्रशेखरन को एक और कार्यकाल देने और टाटा संस की लिस्टिंग को मंजूरी दी गई थी.
बातचीत की कमी पर जताई चिंता
मामले से जुड़े लोगों ने बताया कि समूह के पुराने दिग्गजों- जैसे एस. रामादोराई, ईशात हुसैन और आर. गोपालकृष्णन – के साथ-साथ नोएल टाटा की पत्नी आलू टाटा और किर्लोस्कर सिस्टम्स की चेयरपर्सन व MD गीतांजलि किर्लोस्कर ने दोनों पक्षों के बीच इस बैठक को बढ़ावा दिया था.
हालांकि, स्वतंत्र रूप से इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है. आलू टाटा, SP ग्रुप के चेयरमैन शापूर मिस्त्री की बहन हैं. नोएल टाटा के बेटे नेविल की शादी गीतांजलि किर्लोस्कर की बेटी मानसी से हुई है.
कहां हुई थी मीटिंग?
सूत्रों के अनुसार, यह बैठक दक्षिण मुंबई में नोएल टाटा के आवास पर हुई थी. उन्होंने बताया कि चंद्रशेखरन ने दोनों पक्षों के बीच बातचीत की कमी पर चिंता जताई और कहा कि असहमति को आपसी सहमति से सुलझाया जाना चाहिए.
नोएल टाटा ने दोहराया अपना रुख
नोएल टाटा ने फिर दोहराया कि टाटा संस को एक प्राइवेट कंपनी ही रहना चाहिए. उन्होंने सुझाव दिया कि SP ग्रुप की 18.4% हिस्सेदारी का आंशिक मॉनेटाइजेशन करके उन्हें 25,000 करोड़ रुपये दिए जा सकते हैं. बताया जाता है कि चंद्रशेखरन ने जवाब दिया कि टाटा संस इस पर विचार करेगा, लेकिन कंपनी को लिस्ट (शेयर बाजार में लिस्ट) करने से मामला और जटिल हो जाएगा.
लिस्टिंग पर चंद्रशेखरन ने क्या कहा?
चंद्रशेखरन ने स्पष्ट किया कि लिस्टिंग का फैसला उनके हाथ में नहीं है, बल्कि यह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के तहत अनिवार्य है.शापूर मिस्त्री के नेतृत्व वाला SP ग्रुप लिस्टिंग का समर्थन कर रहा है, ताकि पारदर्शिता बढ़ाई जा सके और अपने निवेश से रकम निकाली जा सके. टाटा संस में मेजॉरिटी हिस्सेदारी रखने वाले ‘टाटा ट्रस्ट्स’ लिस्टिंग का विरोध कर रहे हैं और उनका कहना है कि इसके बजाय अन्य विकल्पों पर विचार किया जाना चाहिए.
तीन साल के भीतर लिस्टिंग जरूरी
RBI ने टाटा संस के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था, जिसमें कंपनी ने ‘अपर-लेयर नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी’ (NBFC) के रूप में अपना रजिस्ट्रेशन वापस लेने की मांग की थी. इसका मतलब यह है कि कंपनी पर वे नियम लागू होते हैं, जिनके तहत ऐसी संस्थाओं को अपनी कैटेगरी में आने के तीन साल के भीतर शेयर बाजार में लिस्ट होना जरूरी है.
चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति का मुद्दा
माना जा रहा है कि नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति का मुद्दा भी उठाया और कहा कि समूह की नीति के अनुसार, उन्हें 65 साल की उम्र में रिटायर हो जाना चाहिए.
सूत्रों के अनुसार, चंद्रशेखरन ने संकेत दिया है कि वह नीति का पालन करेंगे, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, एयर इंडिया और टाटा डिजिटल जैसी कंपनियों में चल रहे बड़े प्रोजेक्ट्स को पूरा करना है. बताया जा रहा है कि नोएल टाटा ने कहा है कि अगर यह मामला नहीं सुलझता है, तो वह इसे कोर्ट में ले जा सकते हैं.
ईटी की रिपोर्ट के अनुसार, एक व्यक्ति ने कहा कि बड़ी बात यह है कि टाटा समूह किसी भी व्यक्ति से बड़ा है और इसकी रक्षा की जानी चाहिए. हालांकि, नोएल टाटा चाहते हैं कि उनके द्वारा उठाए गए अहम मुद्दों पर टाटा संस ध्यान दे. उक्त व्यक्ति ने बताया, ‘नोएल टाटा का मानना है कि उनके द्वारा उठाए गए मुद्दे जायज हैं और उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.’
विवाद को सुलझाने की कोशिश
इस बातचीत की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि टाटा संस के चेयरमैन इस विवाद को आपसी सहमति से सुलझाना चाहते हैं, न कि गतिरोध को और लंबा खींचना चाहते हैं.
टाटा संस बोर्ड ने चंद्रशेखरन को फरवरी 2027 से शुरू होने वाले दूसरे पांच साल के कार्यकाल के लिए फिर से नियुक्त किया था. इस फैसले के खिलाफ केवल नोएल टाटा ने वोट दिया था. चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को खत्म हो रहा है.
सूत्रों के मुताबिक, नोएल टाटा ने टाटा संस बोर्ड के सामने यह मुद्दा भी उठाया है कि समूह की सहायक कंपनियों में 100 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के लिए उनकी मंजूरी जरूरी होनी चाहिए. इससे टाटा संस बोर्ड और टाटा ट्रस्ट्स के अधिकारों को लेकर सवाल खड़े हो सकते हैं, क्योंकि टाटा ट्रस्ट्स के पास होल्डिंग कंपनी की लगभग 66 फीसदी हिस्सेदारी है.