चंद्रशेखरन के इस्तीफे पर टाटा संस का बोर्ड दो फाड़, डायरेक्टर्स के बीच इस बात पर बहस, क्या रद्द हो जाएगी आज की AGM?

चंद्रशेखरन ने टाटा संस बोर्ड को सूचित किया था कि वे दोबारा नियुक्ति के लिए प्रयास नहीं करेंगे, क्योंकि उन्हें दोबारा नियुक्ति के लिए सर्वसम्मत समर्थन नहीं मिल रहा था. इस बीच टाटा संस की AGM 18 अगस्त (मंगलवार) को होनी है.

एन. चंद्रशेखरन ने टाटा संस के चैयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया है. Image Credit: Getty image

टाटा संस के भीतर लंबे समय से जारी तूफान, चेयरमैन एन.चंद्रशेखरन के पद छोड़ने के ऐलान के बाद भी थमा नहीं है. टाटा संस की सालाना आम बैठक (AGM) आज यानी मंगलवार 18 अगस्त को होनी है. लेकिन इस वक्त टाटा संस का बोर्ड दो फाड़ हो गया है. ईटी ने मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के हवाले से बताया कि टाटा संस के कुछ डायरेक्टर इस बात पर बहस कर रहे हैं कि चेयरमैन एन.चंद्रशेखरन के दोबारा अपॉइंटमेंट न लेने के फैसले पर बोर्ड को औपचारिक रूप से क्या प्रतिक्रिया देनी चाहिए.

बंटी हुई है राय

इस बात पर राय बंटी हुई है कि क्या इस मुद्दे पर बोर्ड मीटिंग में वोटिंग कराई जाए. वहीं, कुछ डायरेक्टरों का मानना ​​है कि बोर्ड को चंद्रशेखरन का फैसला स्वीकार नहीं करना चाहिए और इसके बजाय उनसे इस पर फिर से विचार करने के लिए कहना चाहिए.

माना जा रहा है कि टाटा संस के दो मुख्य ट्रस्टी शेयरधारकों में से एक, सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) ने टाटा संस बोर्ड को पत्र लिखकर उनके फैसले पर ध्यान देने और उनके उत्तराधिकारी को चुनने के लिए एक सिलेक्शन कमिटी बनाने की प्रक्रिया शुरू करने का सुझाव दिया है.

कोरम की कमी

मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि चंद्रशेखरन के दोबारा नियुक्ति के लिए खुद को पेश न करने के अचानक लिए गए फैसले ने टाटा संस बोर्ड के एक हिस्से को चौंका दिया है. मुख्य स्टेकहोल्डर्स के बीच यह मुद्दा अभी भी चर्चा का विषय बना हुआ है.

SDTT के करीबी एक अधिकारी ने कहा, ‘चूंकि टाटा संस के चेयरमैन ने बोर्ड को अपनी मर्जी से दोबारा नियुक्ति न चाहने का फैसला बता दिया है, इसलिए डायरेक्टर्स की जिम्मेदारी बनती है कि वे उत्तराधिकार की योजना (सक्सेशन प्लानिंग) पर ध्यान दें.’ टाटा संस के बोर्ड में छह डायरेक्टर हैं, जिनमें दो ट्रस्ट के नॉमिनी और चेयरमैन शामिल हैं.

क्या रद्द हो जाएगी मीटिंग?

इस बीच टाटा संस की AGM 18 अगस्त (मंगलवार) को होनी है. अधिकारियों का कहना है कि हालांकि दूसरे स्टेकहोल्डर्स ऑनलाइन मीटिंग में शामिल हो सकते हैं, लेकिन सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) के SDTT के साथ मिलकर कोई प्रतिनिधि नॉमिनेट न कर पाने की वजह से कोरम पूरा नहीं हो पाएगा और मीटिंग रद्द करनी पड़ सकती है.

अगर दोपहर में होने वाली यह AGM रद्द होती है, तो टाटा संस के इतिहास में ऐसा पहली बार होगा. इस संकट के बीच नई दिल्ली में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा और एन चंद्रशेखरन की कैबिनेट मंत्री के साथ अलग-अलग मीटिंग्स को लेकर अटकलें तेज हैं.

वोटिंग की कोई मिसाल नहीं

अधिकारियों ने बताया कि चंद्रशेखरन के पद छोड़ने के प्रस्ताव जैसे मामलों पर बोर्ड-लेवल पर वोटिंग होना असामान्य है और इस साल फरवरी और जून में बोर्ड इस मामले पर लगभग वोटिंग की स्थिति में पहुंच गया था. इस मामले से जुड़े एक अन्य अधिकारी ने कहा, ‘SDTT का एक पत्र चंद्रा को फरवरी 2027 में पद छोड़ने के अपने बयान पर कायम रहने के लिए बाध्य नहीं करता है.’

मामले से जुड़े एक डायरेक्टर ने कहा कि इस बात की संभावना कम है कि चंद्रशेखरन के फैसले पर वोटिंग होगी, क्योंकि यह उनका व्यक्तिगत फैसला है. अधिकारी ने कहा, ‘उन्हें पुनर्विचार के लिए मनाया या अनुरोध किया जा सकता है, लेकिन ऐसे मामले वोटिंग के लिए नहीं आ सकते.’ टाटा संस और नोएल टाटा ने कोई टिप्पणी नहीं की.

वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री से चंद्रशेखरन की मुलाकात

ये घटनाक्रम ऐसी अटकलों के बीच सामने आया है कि एन चंद्रशेखरन को एक वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री ने दिल्ली बुलाया था ताकि वे दोबारा नियुक्ति न लेने के अपने फैसले पर पुनर्विचार करें. लोगों ने कहा कि हालांकि यह देखना बाकी है कि क्या बोर्ड आखिरकार इस मामले पर वोट करेगा, लेकिन चर्चाओं से नेतृत्व परिवर्तन को लेकर बेचैनी का पता चलता है, जो कुछ स्टेकहोल्डर्स की उम्मीद से कहीं अधिक अचानक हुआ है.

सत्ता का संघर्ष

चंद्रशेखरन ने टाटा संस बोर्ड को सूचित किया था कि वे दोबारा नियुक्ति के लिए प्रयास नहीं करेंगे, क्योंकि उन्हें दोबारा नियुक्ति के लिए सर्वसम्मत समर्थन नहीं मिल रहा था. यह घटनाक्रम उनके प्रस्तावित तीसरे पांच साल के कार्यकाल को लेकर लंबे समय तक चले गतिरोध के बाद सामने आया.

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