UPI की रफ्तार पर लगा ब्रेक, FY27 के पहले 4 महीनों में ट्रांजैक्शन ग्रोथ घटा
UPI की Transaction Growth FY27 के पहले 4 महीनों में घटकर 23.5 फीसदी रह गई, जबकि FY26 की इसी अवधि में यह 33.5 फीसदी थी. अप्रैल से जुलाई के दौरान UPI पर 92 बिलियन ट्रांजैक्शंस दर्ज हुए. इस बीच MDR को लेकर बहस तेज है. Zero MDR व्यवस्था को UPI की पहुंच बढ़ाने में अहम माना जा रहा है.

UPI Transaction Growth: भारत के सबसे बड़े डिजिटल पेमेंट्स प्लेटफॉर्म UPI की ट्रांजैक्शन ग्रोथ में FY27 के शुरुआती महीनों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है. नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के आंकड़ों के मुताबिक, FY27 के पहले 4 महीनों यानी अप्रैल से जुलाई के दौरान UPI पर कुल 92 बिलियन ट्रांजैक्शन दर्ज किए गए. FY26 की इसी अवधि में यह आंकड़ा 74.5 बिलियन था. इस तरह ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में सालाना आधार पर 23.5 फीसदी की ग्रोथ दर्ज हुई है.
हालांकि, FY26 के पहले 4 महीनों में UPI ट्रांजैक्शन वॉल्यूम ग्रोथ 33.5 फीसदी रही थी. यानी एक साल में ग्रोथ रेट करीब 10 परसेंटेज पॉइंट कम हो गई है. इससे साफ है कि देश में UPI का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है, लेकिन इसकी रफ्तार पहले के मुकाबले धीमी हुई है.
FY25 में 41 फीसदी थी ग्रोथ
UPI की ग्रोथ में पिछले कुछ वर्षों में लगातार गिरावट देखने को मिली है. FY25 में UPI ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में सालाना आधार पर करीब 41 फीसदी की ग्रोथ दर्ज हुई थी. इसके बाद FY26 में पूरे साल की ग्रोथ करीब 30 फीसदी रही. अब FY27 के शुरुआती 4 महीनों में यह ग्रोथ घटकर 23.5 फीसदी रह गई है.
हालांकि, पूरे फाइनेंशियल ईयर की ग्रोथ और शुरुआती 4 महीनों की ग्रोथ की सीधी तुलना नहीं की जा सकती, लेकिन आंकड़े UPI की ग्रोथ में स्पष्ट डि-सेलेरेशन की ओर इशारा कर रहे हैं. पिछले 2 वर्षों में UPI की ग्रोथ रेट लगभग आधी हो गई है या करीब 20 परसेंटेज पॉइंट कम हुई है.
MDR को लेकर बहस तेज
UPI ट्रांजैक्शन ग्रोथ में आई इस सुस्ती के बीच मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR को लेकर बहस भी तेज हो गई है. MDR वह कमीशन है, जो डिजिटल ट्रांजैक्शन की सुविधा देने के लिए मर्चेंट की ओर से बैंकों को दिया जाता है. सरकार ने डिजिटल पेमेंट्स को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2020 से UPI पर जीरो MDR की व्यवस्था लागू की हुई है.
इसका मतलब है कि UPI के जरिए पेमेंट लेने वाले मर्चेंट्स से ट्रांजैक्शन पर कोई MDR नहीं लिया जाता. फिनटेक और पेमेंट कंपनियों का तर्क है कि UPI पर रेवेन्यू मॉडल नहीं होने की वजह से बैंकों, पेमेंट फर्म्स और फिनटेक कंपनियों के लिए प्लेटफॉर्म के एक्सपैंशन में इन्वेस्टमेंट करना मुश्किल हो रहा है.
उनका मानना है कि MDR लागू होने से कंपनियों के पास नए कस्टमर्स जोड़ने, मर्चेंट्स का नेटवर्क बढ़ाने और सेल्स टीम्स का विस्तार करने के लिए ज्यादा रिसोर्सेज उपलब्ध हो सकते हैं. एक पेमेंट कंपनी के फाउंडर के मुताबिक, MDR से फिनटेक कंपनियों को नए कस्टमर्स के लिए कैशबैक्स देने और अपनी सेल्स टीम्स का विस्तार करने में मदद मिल सकती थी.
कैशबैक और इंसेंटिव्स भी हुए कम
UPI के तेज एक्सपैंशन में फिनटेक कंपनियों की बड़ी भूमिका रही है. कंपनियों ने नए यूजर्स और मर्चेंट्स को अपने प्लेटफॉर्म पर लाने के लिए कैशबैक्स और इंसेंटिव्स का इस्तेमाल किया. हालांकि, अब कई कंपनियां प्रॉफिटेबिलिटी पर ज्यादा फोकस कर रही हैं और कैशबैक्स तथा इंसेंटिव्स में कमी आई है. इसका असर नए यूजर्स को जोड़ने की रफ्तार पर भी पड़ा है.
एक सीनियर बैंकर के मुताबिक, UPI की पेनिट्रेशन फिलहाल करीब 40 फीसदी है. ऐसे में देश में UPI के लिए अभी काफी ग्रोथ पोटेंशियल मौजूद है. उन्होंने ब्राजील का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां MDR होने के बावजूद डिजिटल पेमेंट्स की पेनिट्रेशन करीब 90 फीसदी है. ऐसे में भारत में भी UPI के लिए आगे काफी बड़ा मार्केट उपलब्ध है.
ट्रांजैक्शन वैल्यू ग्रोथ में राहत
जहां ट्रांजैक्शन वॉल्यूम ग्रोथ में गिरावट आई है, वहीं UPI ट्रांजैक्शन वैल्यू ग्रोथ में मामूली सुधार देखने को मिला है. FY26 में पूरे साल ट्रांजैक्शन वैल्यू ग्रोथ 18.5 फीसदी रही थी, जबकि FY27 के पहले 4 महीनों में यह बढ़कर करीब 20 फीसदी हो गई. इसका मतलब है कि UPI पर ट्रांजैक्शंस की संख्या बढ़ने की रफ्तार भले ही कम हुई हो, लेकिन इसके जरिए होने वाले ट्रांजैक्शंस की कुल वैल्यू अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है.
हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शंस पर MDR की तैयारी
UPI पर MDR को लेकर सरकार की ओर से भी अहम कदम उठाया गया है. लोकसभा ने 6 अगस्त को द टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026 पास किया. इससे UPI पर कुछ कैटेगरीज के ट्रांजैक्शंस में MDR लागू करने का रास्ता साफ हो सकता है.
रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार लार्ज मर्चेंट्स के हाई-वैल्यू UPI ट्रांजैक्शंस पर 0.25 फीसदी से 0.30 फीसदी तक MDR लगाने पर विचार कर रही है. हालांकि, कंज्यूमर्स के लिए UPI पेमेंट्स को फ्री रखने की बात कही गई है.
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