अमेरिका-ईरान युद्ध से तेल बाजार में मचा घमासान, जुलाई में क्रूड ऑयल 21% उछला; IMF ने दी चेतावनी
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष का असर वैश्विक तेल बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है. जुलाई में WTI क्रूड ऑयल की कीमत में करीब 21 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि ब्रेंट क्रूड 89 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया. होर्मुज स्ट्रेट, लाल सागर और ब्लैक सी में बढ़ते तनाव से तेल सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है.

Crude Oil Price: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष ने वैश्विक कच्चे तेल के बाजार में भारी उथल-पुथल मचा दी है. युद्ध के चलते तेल सप्लाई प्रभावित होने की आशंकाओं के बीच जुलाई में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 21 फीसदी की जोरदार तेजी दर्ज की गई है. यह मार्च के बाद किसी भी महीने की सबसे बड़ी मासिक बढ़त है. विश्लेषकों का मानना है कि यदि मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ता है, तो तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच सकती हैं, जिससे दुनियाभर में महंगाई पर भी असर पड़ सकता है.
89 डॉलर पहुंची ब्रेंट क्रूड की कीमत
अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) शुक्रवार को 84 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखा. पूरे सप्ताह के दौरान इसकी कीमत में 8 डॉलर से अधिक का उतार-चढ़ाव देखने को मिला. वहीं, ब्रेंट क्रूड पिछले कारोबारी सत्र में लगभग 89 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ. जुलाई के दौरान WTI में करीब 21 फीसदी की बढ़त इस बात का संकेत है कि बाजार अब तेल सप्लाई को लेकर गंभीर जोखिम देख रहा है.
अमेरिका-ईरान के हमलों ने बढ़ाई चिंता
गुरुवार को अमेरिका और ईरान ने एक-दूसरे पर फिर से हमले किए. इससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई. हालांकि, दुनिया के सबसे अहम तेल मार्ग होर्मुज स्ट्रेट से तेल टैंकरों की आवाजाही हाल के दिनों में कुछ बढ़ी है, लेकिन बाजार अभी भी पूरी तरह आश्वस्त नहीं है. दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है. ऐसे में यहां किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों पर पड़ सकता है.
लाल सागर में सुरक्षा गठबंधन बनाने की तैयारी
इधर, सऊदी अरब ने लाल सागर और उसके आसपास के समुद्री मार्गों की सुरक्षा के लिए 43 देशों के प्रतिनिधियों के साथ गठबंधन बनाने पर चर्चा शुरू की है. इसका मकसद ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा लगाए गए समुद्री अवरोध का मुकाबला करना है.
हालांकि, हूती संगठन ने सऊदी अरब को खुली चेतावनी भी दी है. संगठन के प्रमुख अब्दुल मलिक अल-हूती ने कहा कि यदि सऊदी अरब सैन्य कार्रवाई बढ़ाता है, तो उसका जवाब पहले से अधिक आक्रामक तरीके से दिया जाएगा. हाल के दिनों में हूती विद्रोहियों ने कई तेल टैंकरों और तेल प्रतिष्ठानों पर हमले करने का दावा भी किया है.
जुलाई में एनर्जी मार्केट में आई जबरदस्त तेजी
जुलाई महीने में केवल कच्चे तेल ही नहीं, बल्कि डीजल समेत कई पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में भी दो अंकों की बढ़त दर्ज की गई है. इसकी सबसे बड़ी वजह अमेरिका-ईरान के बीच संघर्ष विराम की कोशिशों का विफल होना है. इसके अलावा, यमन के हूती विद्रोहियों के युद्ध में शामिल होने और सऊदी अरब द्वारा अमेरिका के साथ मिलकर इराक में ईरान समर्थित समूहों पर हमले करने से भी तनाव बढ़ा है. दूसरी ओर, अमेरिका में कच्चे तेल का भंडार लगातार घट रहा है. इससे सप्लाई को लेकर चिंता और गहरी हो गई है. यही कारण है कि निवेशक तेल की खरीदारी बढ़ा रहे हैं.
ट्रंप के सामने मुश्किल फैसला
विश्लेषकों के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने अब बड़ा रणनीतिक सवाल है. उन्हें एक तरफ ईरान द्वारा अमेरिकी ठिकानों पर किए गए हमलों का जवाब देना है, जबकि दूसरी तरफ वैश्विक ऊर्जा बाजार को अस्थिर होने से भी बचाना है. यदि अमेरिका सैन्य कार्रवाई और तेज करता है, तो तेल बाजार में नई तेजी देखने को मिल सकती है.
ब्लैक सी से भी बढ़ी सप्लाई की चिंता
मध्य पूर्व के अलावा ब्लैक सी क्षेत्र से भी तेल सप्लाई प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है. कजाकिस्तान के तेल निर्यात के लिए अहम कैस्पियन पाइपलाइन कंसोर्टियम (CPC) टर्मिनल पर लगातार टैंकर हमलों के कारण लोडिंग एक बार फिर रोकनी पड़ी है. जुलाई में अब तक इस टर्मिनल से जुड़े 9 जहाजों पर हमले हो चुके हैं. वर्ष 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यह सबसे बड़ा हमला माना जा रहा है.
IMF ने दी वैश्विक अर्थव्यवस्था को चेतावनी
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने कहा है कि यदि मध्य पूर्व में तेल सप्लाई का संकट लंबा खिंचता है, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है. हालांकि, यदि हॉर्मुज स्ट्रेट जल्द सामान्य स्थिति में लौट आता है, तो वैश्विक मंदी का खतरा सीमित रह सकता है.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
इंफ्रास्ट्रक्चर कैपिटल मैनेजमेंट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जे हैटफील्ड ने ब्लूमबर्ग से कहा कि जब तक युद्ध जारी रहेगा, तब तक WTI कच्चे तेल की कीमत 80 से 100 डॉलर प्रति बैरल के बीच रह सकती है. वहीं, यदि युद्ध समाप्त हो जाता है, तो कीमतें घटकर 50 से 60 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकती हैं.
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