अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को बड़ा झटका, सुप्रीम कोर्ट ने ग्लोबल टैरिफ को किया रद्द

US सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के बड़े ग्लोबल टैरिफ को रद्द कर दिया है. कोर्ट ने बड़े ट्रेड उपायों को सही ठहराने के लिए इमरजेंसी पावर के इस्तेमाल को खारिज कर दिया. इन टैरिफ को ड्यूटी से प्रभावित बिजनेस और 12 US राज्यों ने चुनौती दी थी.

ट्रंप को झटका Image Credit: WhiteHouse/Youtube

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका लगा है. US सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के बड़े ग्लोबल टैरिफ को रद्द कर दिया है. यूनाइटेड स्टेट्स के सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के ग्लोबल टैरिफ के खिलाफ फैसला सुनाया, जिन्हें नेशनल इमरजेंसी के लिए बनाए गए एक फेडरल कानून के तहत लागू किया गया था. कोर्ट ने बड़े ट्रेड उपायों को सही ठहराने के लिए इमरजेंसी पावर के इस्तेमाल को खारिज कर दिया.

पावर का किया अधिक इस्तेमाल

इन टैरिफ को ड्यूटी से प्रभावित बिजनेस और 12 US राज्यों ने चुनौती दी थी, जिनमें से ज्यादातर डेमोक्रेट्स के शासन वाले थे, जब निचली अदालतों ने पाया कि ट्रंप ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत उन्हें दी गई शक्तियों का ज्यादा इस्तेमाल किया है.

ट्रंप की क्या थी दलील

पिछले साल 5 नवंबर को हुई सुनवाई के दौरान, कंजर्वेटिव और लिबरल दोनों जज एडमिनिस्ट्रेशन की इस दलील पर शक करते दिखे कि ट्रेड डेफिसिट कानून के तहत नेशनल इमरजेंसी है. ट्रंप ने कई देशों से इंपोर्ट पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाए थे. उनका तर्क था कि लगातार ट्रेड डेफिसिट US की नेशनल सिक्योरिटी और इकोनॉमिक स्टेबिलिटी के लिए एक बहुत बड़ा खतरा है. अप्रैल 2025 में उन्होंने ट्रेड डेफिसिट को नेशनल इमरजेंसी घोषित कर दिया था और लगभग हर दूसरे देश पर बड़ी ड्यूटी लगाने की घोषणा की थी.

चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स के 6-3 के फैसले में कोर्ट ने निचली अदालत के उस फैसले को सही ठहराया जिसमें कहा गया था कि ट्रंप ने बड़े पैमाने पर इंपोर्ट टैक्स लगाने के लिए इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का इस्तेमाल करके अपने अधिकार का गलत इस्तेमाल किया. 1977 में बना यह कानून, प्रेसिडेंट को नेशनल इमरजेंसी के दौरान कॉमर्स को रेगुलेट करने की इजाजत देता है, लेकिन इसमें टैरिफ का साफ तौर पर जिक्र नहीं है.

भारत पर लगा था 50 फीसदी टैरिफ

अमेरिका ने 2025 में भारतीय एक्सपोर्ट पर 25 फीसदी एक्स्ट्रा टैरिफ लगाया था, जिसे बाद अगस्त में रूस से भारत के लगातार तेल इंपोर्ट पर विवादों के बीच दोगुना करके 50% तक कर दिया गया था. हालांकि, 3 फरवरी को भारत और अमेरिका के बीच एक अंतरिम ट्रेड डील फ्रेमवर्क पर बातचीत के बाद उन ड्यूटी को घटाकर 18 फीसदी कर दिया गया.

यह फैसला ट्रंप के लिए बहुत बड़ा झटका है, जिन्होंने टैरिफ को अपने प्रशासन की आर्थिक और विदेश नीतियों का एक अहम हिस्सा बना दिया है. उन्होंने यह फैसला कांग्रेस की राय के बिना ही लिया है.

आठ-डिजिट टैरिफ कोड

U.S. सेंसस ब्यूरो 233 देशों में आठ-डिजिट टैरिफ कोड के आधार पर लगभग 11,000 प्रोडक्ट इंपोर्ट कैटेगरी का इंपोर्ट डेटा इकट्ठा करता है, और रोजाना इकट्ठा होने वाले IEEPA-बेस्ड रेवेन्यू में लगभग $500 मिलियन का पता लगाने के लिए स्टैटिस्टिकल फोरकास्टिंग मेथड का इस्तेमाल करता है. गुरुवार तक, उस मॉडल ने IEEPA के तहत कुल $179 अरब की कमाई का अनुमान लगाया था, जब से ट्रंप ने फरवरी 2025 में उस कानून के तहत टैरिफ लगाना शुरू किया था.

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