कब खत्म होगा ईरान-अमेरिका का वॉर? ट्रंप ने बता दिया समय; कहा- अब अधिक समय तक टिक नहीं पाएगा तेहरान

ट्रंप ने कहा कि यह झगड़ा सिर्फ ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम के बारे में नहीं है, बल्कि वॉशिंगटन इससे कहीं अधिक बड़े नतीजे चाहता है. होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) अमेरिका-ईरान संघर्ष में सबसे खतरनाक तनावपूर्ण इलाकों में से एक बन गया है.

ट्रंप ने बताया कब खत्म होगा वॉर. Image Credit: @AI

पश्चिम एशिया में नए सिरे से तनाव के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के साथ युद्ध नवंबर में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के तुरंत बाद खत्म हो जाएगा, क्योंकि तेहरान इस टकराव को ज्यादा समय तक जारी नहीं रख पाएगा. ट्रंप ने कहा, ‘मुझे लगता है कि चुनाव के तुरंत बाद युद्ध खत्म हो जाएगा.’

उन्होंने अपनी बात दोहराते हुए कहा कि ईरान ‘अब और अधिक समय तक टिक नहीं पाएगा.’ साथ ही ट्रंप ने तेहरान पर अमेरिकी चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया.

ईरान पर ट्रंप का आरोप

अमेरिकी राष्ट्रपति ने आरोप लगाया कि ईरान चुनाव के नतीजों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है, ताकि उसे अमेरिकी नेताओं का एक ऐसा कमजोर गुट मिल सके जो उसे न छेड़े और उसे परमाणु हथियार बनाने दे. उन्होंने कहा, ‘वे बस परमाणु हथियार चाहते हैं और अगर उनके पास परमाणु हथियार आ गया, तो पूरी दुनिया बड़ी मुश्किल में पड़ जाएगी.’

अभी कोई बातचीत नहीं हो रही

ट्रंप ने कहा कि यह झगड़ा सिर्फ ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम के बारे में नहीं है, बल्कि वॉशिंगटन इससे कहीं अधिक बड़े नतीजे चाहता है. ट्रंप ने कहा, ‘मैं न्यूक्लियर डील से कहीं ज्यादा कुछ कर रहा हूं. इसमें न्यूक्लियर के अलावा और भी बहुत कुछ है. न्यूक्लियर डील तो होगी ही, इसकी 99.9% संभावना है, लेकिन बातचीत की मेज पर और भी कई चीजें होंगी.’

उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका तेहरान के साथ बातचीत की कोशिश नहीं कर रहा है, हालांकि उन्होंने बातचीत की संभावना को पूरी तरह से खारिज नहीं किया. ट्रंप ने कहा, ‘हम ईरान के साथ बातचीत नहीं करना चाहते.’ बातचीत हो सकती है, लेकिन अभी हम ऐसा कुछ नहीं कर रहे हैं.’

ट्रंप की चेतावनी: होर्मुज़ में और हमले हो सकते हैं

होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) अमेरिका-ईरान संघर्ष में सबसे खतरनाक तनावपूर्ण इलाकों में से एक बन गया है. दोनों पक्ष इस रणनीतिक जलमार्ग में और इसके आस-पास जहाजों पर हमले कर रहे हैं.

बुधवार को तनाव तब और बढ़ गया जब अमेरिकी सेना ने ईरानी तेल टैंकरों पर हमला किया. यह हमला वॉशिंगटन के उस दावे के जवाब में किया गया था जिसमें कहा गया था कि ईरान ने अमेरिकी नौसेना के जहाजों पर मिसाइल से हमला किया था.

इसके बाद ईरान ने दावा किया कि उसने जलडमरूमध्य के पास 10 जहाजों पर हमला किया है. यह युद्ध शुरू होने के बाद से एक-दूसरे के खिलाफ समुद्री हमलों की सबसे बड़ी लहरों में से एक थी.

कच्चे तेल की कीमतों में उबाल

इस टकराव ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर भी चिंताएं बढ़ा दी हैं. गुरुवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई, क्योंकि जलडमरूमध्य से तेल की आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई थी. होर्मुज जलडमरूमध्य में हुए हमलों के बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने कहा कि ये हमले अमेरिकी सेना द्वारा किए जा रहे हैं और चेतावनी दी कि और भी हमले हो सकते हैं.

सातवें महीने में ईरान-अमेरिका युद्ध

ईरान के साथ ट्रंप का संघर्ष अब सातवें महीने में प्रवेश कर चुका है और इस संघर्ष के जल्द खत्म होने के कोई आसार नहीं दिख रहे हैं. साथ ही, रिपब्लिकन नेता की लोकप्रियता रेटिंग रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गई है, क्योंकि मतदाता लंबे समय से चल रहे ईरान युद्ध और बढ़ती महंगाई से निराश हो रहे हैं. 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों पर अमेरिकी राष्ट्रपति और उनके प्रशासन के लिए एक अहम परीक्षा के तौर पर कड़ी नजर रखी जाएगी.

मिड-टर्म चुनाव

अमेरिका में मिड-टर्म चुनाव राष्ट्रपति के चार साल के कार्यकाल के बीच में होते हैं. ये चुनाव इसलिए अहम हैं क्योंकि इनसे कांग्रेस में सत्ता का संतुलन बदल सकता है, भले ही राष्ट्रपति खुद चुनाव नहीं लड़ रहे हों. 3 नवंबर को अमेरिकी नागरिक ‘हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स’ की सभी 435 सीटों और सीनेट की कुछ सीटों के लिए वोट डालेंगे. नतीजों से यह तय होगा कि कांग्रेस पर किस पार्टी का कब्जा होगा और इसके आधार पर यह भी तय होगा कि ट्रंप अपने एजेंडे को कितनी आसानी से आगे बढ़ा पाएंगे.

नतीजों का ट्रंप पर असर

इन चुनावों का सीधा असर ट्रंप के कार्यकाल के आखिरी दो सालों में उनके कामकाज पर पड़ सकता है. अगर रिपब्लिकन पार्टी का कांग्रेस पर कब्जा बना रहता है, तो उनकी सरकार के लिए कानून पास करवाना, फंड हासिल करना और अहम नीतियों को आगे बढ़ाना आसान हो सकता है. अगर डेमोक्रेट्स किसी भी सदन पर कब्जा कर लेते हैं, तो ट्रंप के प्रस्तावों का ज्यादा विरोध हो सकता है और कांग्रेस की तरफ से उन पर अधिक कड़ी नजर रखी जा सकती है.

राजनीतिक परीक्षा

मिड-टर्म चुनावों को राष्ट्रपति के कामकाज की राजनीतिक परीक्षा के तौर पर भी देखा जाता है. हालांकि, वोटर सीधे अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए वोट नहीं करते, बल्कि अलग-अलग सांसदों को चुनते हैं, फिर भी व्हाइट हाउस के एजेंडे में शामिल मुद्दे – जैसे इस मामले में ईरान युद्ध – उनके फैसलों पर असर डाल सकते हैं. अर्थव्यवस्था, जीवन-यापन का खर्च और टकराव जैसी बातें भी इस बात पर असर डाल सकती हैं कि अमेरिकी नागरिक कैसे वोट करते हैं.

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