होम लोन के साथ लाइफ इंश्योरेंस लेना चाहिए या नहीं, फ्लैट और रिड्यूसिंग कवर में कौन बेहतर, जानें पूरी डिटेल

होम लोन लेते समय बैंक या गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी लाइफ इंश्योरेंस का विकल्प दे सकती है. इसका मकसद कर्जदार की मृत्यु की स्थिति में बकाया होम लोन चुकाना होता है. इसमें फ्लैट कवर और घटता हुआ टर्म कवर प्रमुख विकल्प हैं. घटता कवर लोन की बकाया रकम के साथ कम होता है और आमतौर पर सस्ता होता है.

होम लोन के साथ मिलने वाला इंश्योरेंस केवल लोन की रकम को सेफ करता है. Image Credit:

होम लोन लेते समय बैंक या गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी यानी NBFC आपको लाइफ इंश्योरेंस लेने का विकल्प दे सकती है. इस इंश्योरेंस का मकसद कर्जदार की मृत्यु की स्थिति में बकाया होम लोन को चुकाने में परिवार की मदद करना है. होम लोन के साथ मिलने वाले इंश्योरेंस में मुख्य रूप से फ्लैट कवर और घटता हुआ टर्म कवर (रिड्यूसिंग) शामिल होते हैं. दोनों कवर का काम लोन की सुरक्षा करना है. हालांकि दोनों में इंश्योरेंस राशि और प्रीमियम को लेकर अंतर होता है. ऐसे में इंश्योरेंस लेने से पहले इनके बीच का फर्क समझना जरूरी है.

लाइफ इंश्योरेंस क्यों दिया जाता है

होम लोन की अवधि कई साल की हो सकती है और इस दौरान कर्जदार के साथ किसी तरह की अनहोनी होने पर परिवार पर लोन चुकाने का बोझ आ सकता है. इसी रिस्क को कम करने के लिए बैंक या गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी लाइफ इंश्योरेंस का विकल्प दे सकती है.

कर्जदार की मृत्यु होने पर इंश्योरेंस कंपनी पॉलिसी की शर्तों के अनुसार बकाया लोन चुकाने में मदद करती है. इससे परिवार को घर बचाने के लिए अलग से रकम जुटाने की जरूरत कम हो सकती है. हालांकि यह कवर लेना जरूरी है या नहीं यह आपकी जरूरत और मौजूदा इंश्योरेंस सुरक्षा पर निर्भर करता है.

घटता हुआ टर्म कवर क्या होता है

घटता हुआ टर्म कवर ऐसा इंश्योरेंस है जिसमें समय के साथ इंश्योरेंस की रकम कम होती जाती है. इसका कारण यह है कि होम लोन की बकाया रकम भी हर EMI के साथ धीरे-धीरे कम होती रहती है. उदाहरण के लिए अगर आपने 50 लाख रुपये का होम लोन लिया है तो शुरुआती समय में इंश्योरेंस कवर ज्यादा हो सकता है. जैसे- जैसे लोन की रकम कम होगी वैसे वैसे इंश्योरेंस कवर भी कम होता जाएगा. इस वजह से घटता हुआ टर्म कवर आमतौर पर फ्लैट कवर की तुलना में सस्ता हो सकता है.

फ्लैट कवर में क्या फायदा मिलता है

फ्लैट टर्म कवर में इंश्योरेंस की रकम पूरी पॉलिसी अवधि के दौरान समान रहती है. इसका मतलब है कि होम लोन की बकाया रकम कम होने के बाद भी इंश्योरेंस कवर अपनी तय रकम के आसपास बना रहता है. कर्जदार की मृत्यु होने पर इंश्योरेंस कंपनी पहले बकाया होम लोन को चुकाने में मदद कर सकती है. अगर इंश्योरेंस कवर बकाया लोन से ज्यादा है तो पॉलिसी की शर्तों के अनुसार बची रकम नामित व्यक्ति को मिल सकती है. हालांकि इस कवर का प्रीमियम घटते कवर से ज्यादा हो सकता है.

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होम लोन का इंश्योरेंस लेना कितना सही

होम लोन के साथ मिलने वाला इंश्योरेंस केवल लोन की रकम को सुरक्षित करता है. इससे परिवार की दूसरी वित्तीय जरूरतें पूरी नहीं होती हैं. इसलिए केवल होम लोन कवर पर निर्भर रहना हमेशा सही फैसला नहीं माना जाता है. परिवार की जरूरत के अनुसार सामान्य टर्म इंश्योरेंस लेना ज्यादा उपयोगी हो सकता है. सामान्य तौर पर टर्म इंश्योरेंस कवर सालाना इनकम के कम से कम दस गुना तक रखने की सलाह दी जाती है. हालांकि सही कवर आपकी इनकम, कर्ज, परिवार की जरूरत और भविष्य के खर्च पर निर्भर करता है.