होम लोन लेने वालों को लग सकता है झटका! अक्टूबर में 25 bps बढ़ सकता है रेपो रेट; जानें EMI पर क्या होगा असर?

होम लोन लेने वालों के लिए अक्टूबर में ब्याज दर बढ़ने का खतरा है. SBI Research ने RBI को रेपो रेटमें 25 bps बढ़ोतरी की सलाह दी है. अगर RBI रेपो रेट5.25 फीसदी से बढ़ाकर 5.50 फीसदी करता है, तो फ्लोटिंग रेट होम लोन की ब्याज दर बढ़ सकती है.

SBI Research ने अक्टूबर में रेपो रेट में 25 bps बढ़ोतरी की सलाह दी है. Image Credit: Getty image

Highlights

  • SBI Research ने अक्टूबर में रेपो रेटमें 25 bps बढ़ोतरी की सलाह दी है.
  • रेपो रेट5.25% से बढ़कर 5.50% हो सकता है.
  • Rate Hike होने पर फ्लोटिंग रेट होम लोन की ब्याज दर बढ़ सकती है.

अगर आपने होम लोन लिया है या जल्द लेने की तैयारी कर रहे हैं, तो आपके लिए एक अहम खबर है. SBI Research ने RBI से अक्टूबर में रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी करने की सलाह दी है. अगर RBI ऐसा करता है, तो फ्लोटिंग रेट होम लोन की ब्याज दर बढ़ सकती है और इसका सीधा असर आपकी EMI या लोन की अवधि पर पड़ सकता है. आइए समझते हैं कि रेपो रेट बढ़ने पर होम लोन लेने वालों की जेब पर कितना असर हो सकता है.

25 bps रेट हाइक की सलाह

SBI Research के मुताबिक ,RBI अक्टूबर में रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट बढ़ा सकता है. इसके बाद दिसंबर में भी 25 बेसिस पॉइंट की एक और बढ़ोतरी की सलाह दी गई है. RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक 5 से 7 अक्टूबर 2026 के बीच होनी है.

अभी रेपो रेट 5.25 फीसदी है और RBI ने लगातार चार बैठकों में इसे इसी स्तर पर बनाए रखा है. हालांकि, बढ़ते कच्चे तेल के दाम और महंगाई के दबाव ने आगे रेट हाइक की संभावना बढ़ाई है.

25 bps बढ़ोतरी का मतलब क्या है?

25 bps यानी 25 बेसिस पॉइंट का मतलब ब्याज दर में 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी है. उदाहरण के लिए, अगर रेपो रेट5.25 फीसदी से बढ़कर 5.50 फीसदी हो जाता है, तो यह 25 bps की बढ़ोतरी होगी.

रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI बैंकों को कर्ज देता है. जब रेपो रेट बढ़ता है तो बैंकों के लिए पैसा महंगा हो सकता है. इसका असर बैंक की लेंडिंग रेट पर पड़ सकता है और फ्लोटिंग रेट लोन की ब्याज दर भी बढ़ सकती है.

होम लोन की EMI पर कैसे पड़ेगा असर?

अगर आपका होम लोन फ्लोटिंग इंटरेस्ट रेट से जुड़ा है, तो रेपो रेट बढ़ने पर आपकी लोन रेट बढ़ सकती है. इसके बाद बैंक आपकी EMI बढ़ा सकता है या लोन की अवधि बढ़ा सकता है.

मान लीजिए किसी व्यक्ति ने 20 साल के लिए 50 लाख रुपये का होम लोन लिया है और ब्याज दर 8 फीसदी है. इस स्थिति में EMI करीब 41,822 रुपये होगी. अगर ब्याज दर 8.25 फीसदी हो जाती है और लोन की अवधि वही 20 साल रहती है, तो EMI करीब 42,619 रुपये हो सकती है.

यानी 25 bps की बढ़ोतरी पर इस उदाहरण में EMI करीब 797 रुपये प्रति माह बढ़ सकती है. वास्तविक असर आपके लोन की बाकी अवधि, ब्याज दर और बैंक की रीसेट पॉलिसी पर निर्भर करेगा.

EMI नहीं बढ़ी तो क्या होगा?

जरूरी नहीं कि ब्याज दर बढ़ने के बाद हर बैंक तुरंत EMI बढ़ा दे. कुछ मामलों में बैंक EMI को समान रखते हुए लोन की अवधि बढ़ा सकता है. इसका मतलब है कि आपकी हर महीने की EMI में तत्काल बड़ा बदलाव नहीं दिखेगा, लेकिन आप लंबे समय तक ब्याज चुकाएंगे. इसलिए लोन लेने वाले को सिर्फ EMI नहीं बल्कि कुल इंटरेस्ट कॉस्ट पर भी नजर रखनी चाहिए.

क्या रेपो रेट बढ़ना तय है?

नहीं. यहां यह समझना जरूरी है कि 25 bps Rate Hike RBI का फैसला नहीं है. यह SBI Research का अनुमान और सुझाव है. अंतिम फैसला RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी करेगी.