IPO लाने का था प्लान अब $17 करोड़ कर्ज के दलदल में फंसी ‘उड़ान’, सिंगापुर कोर्ट में दिवालिया प्रक्रिया शुरू

IPO की तैयारी कर रही B2B ई-कॉमर्स यूनिकॉर्न कंपनी Udaan पर कर्ज का संकट गहरा गया है. 17 करोड़ डॉलर के बॉन्ड भुगतान में चूक के बाद सिंगापुर हाई कोर्ट में उसकी पेरेंट कंपनी के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू हो गई है. इस बीच बड़े बैंकों ने वर्किंग कैपिटल सुविधाएं रोक दी हैं, हालांकि कंपनी का कहना है कि भारत में उसका कारोबार सामान्य रूप से जारी रहेगा.

दिवालिया प्रक्रिया Image Credit:

आईपीओ (IPO) लाने की तैयारी में जुटी देश की जानी-मानी बी2बी ई-कॉमर्स यूनिकॉर्न कंपनी ‘उड़ान’ की रफ्तार पर विदेशी कर्ज के बोझ ने ब्रेक लगा दिया है. 17 करोड़ डॉलर (करीब 1,600 करोड़ रुपये से ज्यादा) का बॉन्ड भुगतान न कर पाने की वजह से वैश्विक लेनदारों ने उड़ान की सिंगापुर स्थित पेरेंट कंपनी ‘ट्रस्टरूट इंटरनेट’ के खिलाफ सिंगापुर हाई कोर्ट में दिवालिया प्रक्रिया शुरू कर दी है. ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक, लेनदारों ने इस पूरी कानूनी कार्रवाई के लिए अल्वारेज एंड मार्सल (Alvarez & Marsal) को ऑफिशियल लिक्विडेटर भी नियुक्त कर दिया है.

बैंकों ने रोकी मदद, बातचीत रही नाकाम

उड़ान के लिए मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हो रहीं. सिंगापुर में मामला कोर्ट पहुंचने से ठीक पहले जेपी मॉर्गन, एचएसबीसी, डीबीएस और एक्सिस बैंक जैसे बड़े बैंकों ने भी कंपनी को मिलने वाली वर्किंग कैपिटल की सुविधाएं रोक दी हैं, जिससे संकट और गहरा गया है. लेनदारों के साथ कर्ज के पुनर्गठन (Debt Restructuring) को लेकर हफ्तों चली बातचीत भी नाकाम रही, क्योंकि दोनों पक्ष तुरंत किए जाने वाले भुगतान की रकम पर सहमत नहीं हो सके. ईटी रिपोर्ट में दिए आंकड़ों के मुताबिक, कंपनी पर अब तक करीब 13,000 करोड़ रुपये का Cumulative Loss है.

वैल्यूएशन में 70% की भारी गिरावट

फ्लिपकार्ट के पूर्व अधिकारियों वैभव गुप्ता, सुजीत कुमार और आमोद मालवीय द्वारा 2016 में शुरू की गई यह कंपनी कभी भारतीय स्टार्टअप जगत का चमकता सितारा थी. साल 2021 में उड़ान का वैल्यूएशन 3.2 अरब डॉलर के शिखर पर था. लेकिन लगातार होते नुकसान के कारण अब इसका वैल्यूएशन करीब 70% गिरकर महज 80 करोड़ से 1 अरब डॉलर के बीच रह गया है. कंपनी नए निवेशकों से फंड जुटाने की कोशिश कर रही है, लेकिन अब तक मुनाफा न कमा पाने (Ebitda Positive न होने) के कारण नए इन्वेस्टर भारी-भरकम वैल्यूएशन पर पैसा लगाने से कतरा रहे हैं.

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इस पूरे विवाद पर उड़ान ने आधिकारिक बयान में कहा है कि सिंगापुर में चल रही कानूनी चुनौतियों से उसके भारत के कारोबार पर कोई असर नहीं पड़ेगा और भारतीय इकाइयां पूरी तरह सुरक्षित हैं. कंपनी के सीईओ वैभव गुप्ता ने ईटी के हवाले से बताया है कि उड़ान अगले 9 से 18 महीनों में आईपीओ लाने की योजना पर काम कर रही है और वे सिंगापुर की होल्डिंग कंपनी का भारत में विलय (Reverse Merger) करने की प्रक्रिया में जुटे हैं. हालांकि, इस नए अदालती संकट ने कंपनी की लिस्टिंग की राह को बेहद मुश्किल बना दिया है.

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