क्या Jio पर लगे ₹5 लाख करोड़ के दांव से IPO मार्केट में आएगी रफ्तार? कतार में कई कंपनियां; लिस्टिंग पर सभी की नजरें
आने वाले बड़े IPO में वॉलमार्ट समर्थित फोनपे का नाम शामिल है. सोलर उपकरण बनाने वाली अवाडा इलेक्ट्रो 7,600 करोड़ रुपये तक का IPO लाने की तैयारी कर रही है. कैलेंडर ईयर 2025 में भारत के मेनबोर्ड IPO के जरिए रिकॉर्ड 1.76 लाख करोड़ रुपये जुटाए गए थे.

जियो प्लेटफॉर्म्स की मजबूत मांग से बड़े IPO लाने वाली कंपनियों की उम्मीदें बढ़ी हैं, लेकिन आगे की राह बाजार के रुख, वैल्यूएशन और निवेशकों को मिलने वाले रिटर्न पर निर्भर करेगी. रिलायंस इंडस्ट्रीज के मुकेश अंबानी की जियो प्लेटफॉर्म्स के 30,213 करोड़ रुपये के IPO को निवेशकों का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला है. यह 22.19 गुना सब्सक्राइब हुआ. इस मजबूत मांग ने भारतीय शेयर बाजार में बड़े IPO के लिए उपलब्ध कैपिटल और निवेशकों की दिलचस्पी को लेकर नई उम्मीदें जगाई हैं.
23 अक्टूबर को बंद हुए इस IPO में क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) का हिस्सा 70.55 गुना सब्सक्राइब हआ, जबकि रिटेल निवेशकों की कैटेगरी में 2.72 गुना बोलियां मिलीं. अब जियो के शेयरों की 28 अक्टूबर को होने वाली लिस्टिंग पर बाजार की नजर है. इसका प्रदर्शन आने वाले बड़े IPO की कीमत तय करने और उन्हें बाजार में उतारने के समय को प्रभावित कर सकता है.
बड़े IPO की राह में कितना दम?
भारत के प्राइमरी मार्केट में पहले से ही बड़ी संख्या में कंपनियां IPO लाने की तैयारी कर रही हैं. प्राइम डेटाबेस के आंकड़ों के मुताबिक, 25 सितंबर तक करीब 145 कंपनियों के पास सेबी की वैध मंजूरी थी. इनके प्रस्तावित इश्यू का कुल आकार लगभग 2.75 लाख करोड़ रुपये था. इस आंकड़े में जियो सहित वे इश्यू भी शामिल थे, जो बाद में बाजार में आ चुके हैं.
आने वाले बड़े IPO में वॉलमार्ट समर्थित फोनपे का नाम शामिल है. सोलर उपकरण बनाने वाली अवाडा इलेक्ट्रो 7,600 करोड़ रुपये तक का IPO लाने की तैयारी कर रही है. कंपनी ने सितंबर में निवेशकों के साथ रोडशो शुरू किए थे और बाजार की परिस्थितियां अनुकूल रहने पर 2026 के अंत से पहले लिस्टिंग का लक्ष्य रखा है.
कतार में कई कंपनियों के पब्लिक ऑफर
क्विक-कॉमर्स कंपनी जेप्टो का प्रस्तावित IPO भी चर्चा में है, जिसका साइज पहले के अनुमानों में 5,000 करोड़ रुपये से अधिक बताया गया था. वहीं, हॉस्पिटैलिटी कंपनी प्रिज्म, जो ओयो की पैरेंट कंपनी है, ने अक्टूबर में नियामकीय फाइलिंग के अनुसार अपने प्रस्तावित फ्रेश इश्यू का आकार 6,650 करोड़ रुपये से घटाकर 3,350 करोड़ रुपये कर दिया है.
इसके अलावा क्रेडिला फाइनेंशियल सर्विसेज, इंफ्रा मार्केट, इनॉक्स क्लीन एनर्जी और महानदी कोलफील्ड्स जैसी कंपनियां भी IPO की तैयारी कर रही कंपनियों की सूची में शामिल हैं. हालांकि, इनके इश्यू का आकार और लॉन्च की तारीख नियामकीय मंजूरी तथा बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगी.
प्राइम डेटाबेस के अनुसार, कैलेंडर ईयर 2025 में भारत के मेनबोर्ड IPO के जरिए रिकॉर्ड 1.76 लाख करोड़ रुपये जुटाए गए थे. हालांकि, 2026 में कुल फंड जुटाने का आंकड़ा बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा.
दूसरे शेयरों को मिलेगा सहारा?
जियो के IPO से जुड़ा एक अहम पहलू निवेशकों के खातों में वापस आने वाली रकम है. इस इश्यू में करीब 4.90 लाख करोड़ रुपये की बोलियां आईं, जबकि सार्वजनिक बोली के लिए उपलब्ध शेयरों का मूल्य लगभग 22,000 करोड़ रुपये था. जिन निवेशकों को शेयर अलॉट नहीं हुए, उनकी बड़ी रकम अब अनब्लॉक होकर दोबारा निवेश के लिए उपलब्ध हो सकती है.
ASBA और UPI व्यवस्था के तहत IPO में आवेदन की रकम आम तौर पर शेयर आवंटित होने तक बैंक खाते में ब्लॉक रहती है. आवंटन के बाद इस्तेमाल नहीं हुई रकम जारी कर दी जाती है.
इससे कुछ कैपिटल दूसरे IPO या शेयर बाजार में जा सकता है और निकट अवधि में मांग को सहारा मिल सकता है. हालांकि, निवेशक इस रकम को दूसरे एसेट में लगा सकते हैं या नकदी के रूप में भी रख सकते हैं.
क्या बदल सकती है कंपनियों की प्राइसिंग रणनीति?
जियो के IPO का असर भविष्य में बड़े इश्यू की कीमत तय करने के तरीके पर भी पड़ सकता है. कंपनी ने 1,065 रुपये से 1,119 रुपये प्रति शेयर के प्राइस बैंड पर इश्यू पेश किया. ऊपरी प्राइस बैंड के आधार पर कंपनी की वैल्यूएशन लगभग 10.3 लाख करोड़ रुपये रहा.
फ्रेश इश्यू
यह IPO पूरी तरह फ्रेश इश्यू था. इसमें मौजूदा निवेशकों ने ऑफर फॉर सेल के जरिए अपनी हिस्सेदारी नहीं बेची. कंपनी की योजना इश्यू से मिलने वाली रकम में से 27,500 करोड़ रुपये तक का इस्तेमाल अपनी सहायक कंपनी रिलायंस जियो इन्फोकॉम के कर्ज चुकाने के लिए करने की है.
जियो को मिली मजबूत मांग ऐसे समय में आई, जब सितंबर में 22,562 करोड़ रुपये का NSE IPO भी आया था. इससे संकेत मिलता है कि भारतीय बाजार कम समय में कई बड़े इश्यू को एडजस्ट करने की क्षमता दिखा रहा है.
संकेत पॉजिटिव, लेकिन सफलता की गारंटी नहीं
जियो IPO की सफलता दूसरे बड़े इश्यू के लिए पॉजिटिव संकेत जरूर है, लेकिन यह अपने आप में इस बात की गारंटी नहीं है कि आने वाले सभी मेगा IPO को इसी तरह की मांग मिलेगी. कंपनियों की वैल्यूएशन, निवेशकों को मिलने वाले रिटर्न और शेयर बाजार की स्थिति से ही तय होगा कि भारत का IPO बाजार इस तेजी को कितनी दूर तक कायम रख पाता है.