₹30 लाख की सैलरी, ITR नहीं भरा तो लगी ₹3.74 लाख की पेनल्टी; ITAT ने अब हटाई, जानें पूरा मामला

30.22 लाख रुपये की सैलरी इनकम वाले एक टैक्सपेयर ने Assessment Year 2019-20 में ITR दाखिल नहीं किया. Income Tax Department ने मामला दोबारा खोलने के बाद पूरी इनकम स्वीकार कर ली, लेकिन 3.74 लाख रुपये की पेनल्टी लगा दी. Delhi ITAT ने कहा कि Income Under-Report नहीं हुई थी और Form 26AS में TDS भी मौजूद था. इसके बाद पेनल्टी हटा दी गई.

आईटीआर Image Credit:

ITR Penalty: अगर आपकी सैलरी से TDS कट गया है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि ITR दाखिल करने की जिम्मेदारी खत्म हो गई. हालांकि, ITR दाखिल नहीं करने और Income Under-Reporting के बीच फर्क है. दिल्ली के Income Tax Appellate Tribunal (ITAT) के एक हालिया मामले में इसी अंतर को अहम माना गया है.

मामले में एक सैलरीड टैक्सपेयर ने असेसमेंट ईयर 2019-20 के लिए ITR दाखिल नहीं किया था. बाद में इनकम टैक्स डिपोर्टमेंट ने मामला दोबारा खोला. टैक्सपेयर ने नोटिस मिलने के बाद 30,22,900 रुपये की पूरी इनकम घोषित की. Assessing Officer ने भी इस पूरी इनकम को स्वीकार कर लिया और कोई अतिरिक्त इनकम नहीं जोड़ी. इसके बावजूद टैक्सपेयर पर 374,072 रुपये की पेनल्टी लगा. अब Delhi ITAT ने यह पेनल्टी हटा दी है.

क्या है पूरा मामला?

यह मामला Pravesh Aggarwal vs CIT (Appeals), NFAC, Delhi का है. टैक्सपेयर वित्त वर्ष 2018-19 में नौकरी कर रहा था और इसी दौरान उसने नौकरी बदली थी.

टैक्सपेयर ने ट्रिब्यूनल को बताया कि समय पर ITR दाखिल करने के लिए उसे दोनों employers से जरूरी documents, खासकर Form 16, नहीं मिल पाए थे. साथ ही उसे यह भरोसा था कि employers ने उसकी सैलरी पर TDS सही तरीके से काटकर जमा कर दिया है और उसकी पूरी इनकम भी रिपोर्ट कर दी है. TDS की जानकारी उसके Form 26AS में भी दिखाई दे रही थी.

Income Tax Department ने केस क्यों खोला?

Income Tax Department के पास जानकारी थी कि टैक्सपेयर को 30 लाख रुपये से ज्यादा की सैलरी इनकम मिली थी, लेकिन उसने ITR दाखिल नहीं किया था. इसके बाद 19 अप्रैल 2023 के Section 148A(d) के order के बाद Section 148 के तहत नोटिस जारी किया गया और मामला दोबारा खोला गया. नोटिस मिलने के बाद taxpayer ने 30,22,900 रुपये की कुल आय दिखाते हुए ITR दाखिल किया.

इसके बाद Assessing Officer ने Section 143(2) और Section 142(1) के तहत आगे की जानकारी मांगी. जांच के बाद taxpayer की घोषित पूरी आय को स्वीकार कर लिया गया और उसमें कोई बदलाव नहीं किया गया. लेकिन इसके बाद भी Section 270A के तहत penalty की कार्रवाई शुरू की गई.

₹3.74 लाख की penalty क्यों लगी?

Assessing Officer ने taxpayer की पूरी 3022900 रुपये की घोषित इनकम को Under-Reported Income मान लिया. इसकी वजह यह थी कि taxpayer ने Section 139(1) के तहत समय पर original ITR दाखिल नहीं किया था. इसके आधार पर 3,74,072 रुपये की पेनल्टी लगाई गई. आदेश के मुताबिक, यह उस रकम पर बनने वाले tax का 50% थी, जिसे Under-Reported Income माना गया.

taxpayer ने इस पेनल्टी के खिलाफ CIT(A) के सामने अपील की, लेकिन उसकी अपील खारिज हो गई. इसके बाद मामला ITAT पहुंचा.

Taxpayer ने क्या दलील दी?

taxpayer ने कहा कि ITR दाखिल नहीं कर पाना जानबूझकर नहीं था और उसका मकसद टैक्स बचाना या इनकम छिपाना नहीं था. उसने नौकरी बदलने, समय पर दोनों employers से Form 16 नहीं मिलने और Form 26AS में TDS दिखाई देने की बात बताई.

उसने यह भी कहा कि Section 148 का नोटिस मिलने के बाद उसने पूरा सहयोग किया, ITR दाखिल किया और अपनी पूरी income disclose की. बाद में Income Tax Department ने भी उसकी पूरी इनकम को स्वीकार कर लिया और कोई अतिरिक्त इनकम नहीं जोड़ी. दूसरी तरफ रेवेन्यू ने दलील दी कि अगर Section 148 का नोटिस जारी नहीं होता, तो taxpayer ITR दाखिल नहीं करता और उसकी income assessment से बाहर रह सकती थी.

ITR नहीं भरना और Income Under-Reporting एक ही बात नहीं

यही अंतर इस मामले में सबसे अहम रहा. Section 270A Under-Reporting of Income पर पेनल्टी से जुड़ा है. Tribunal ने संबंधित प्रावधानों को देखते हुए कहा कि हर स्थिति में ITR दाखिल न करना अपने आप Under-Reporting of Income नहीं बन जाता.

Tribunal ने देखा कि taxpayer ने बाद में जितनी इनकम घोषित की, डिपार्टमेंट ने उसे पूरी तरह स्वीकार कर लिया. यानी टैक्सपेयर ने अपनी वास्तविक इनकम से कम इनकम नहीं दिखाई थी. ITAT ने कहा कि मामले में टैक्सपेयर की घोषित इनकम को डिपार्टमेंट ने स्वीकार किया है. इसलिए यह ऐसा मामला नहीं था, जिसमें taxpayer ने अपनी वास्तविक इनकम से कम इनकम दिखाई हो.

Form 26AS क्यों बना अहम?

इस मामले में Form 26AS की भूमिका भी अहम रही. वेतन से जुड़ा TDS पहले से ही Form 26AS में दिखाई दे रहा था और यह जानकारी आयकर विभाग के पास भी थी. न्यायाधिकरण ने माना कि करदाता का यह कहना कि उसे भरोसा था कि वेतन पर TDS काटा जा चुका है और Form 26AS में भी दिखाई दे रहा है, एक सही और वास्तविक धारणा थी. न्यायाधिकरण को मामले में आय छिपाने या तथ्यों को गलत तरीके से पेश करने की बात नहीं मिली.

ITAT ने ₹3.74 लाख का जुर्माना हटाया

पूरे मामले और Section 270A के प्रावधानों को देखने के बाद दिल्ली ITAT ने माना कि करदाता ने उस तरह आय कम नहीं दिखाई थी, जिस पर इस प्रावधान के तहत जुर्माना लगाया जा सके. न्यायाधिकरण ने खास तौर पर यह देखा कि Section 148 के तहत तय हुई आय, करदाता की ओर से घोषित आय से ज्यादा नहीं थी. साथ ही, करदाता का TDS पहले से Form 26AS में दिखाई दे रहा था और न्यायाधिकरण ने उसकी सफाई को सही माना. इसके बाद ITAT ने 374,072 रुपये का जुर्माना हटा दिया और करदाता की अपील स्वीकार कर ली.

वेतन पाने वालों के लिए क्या सीख?

इस फैसले का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि वेतन से TDS कटने के बाद ITR दाखिल करने की जरूरत नहीं है. यह फैसला इस खास मामले के तथ्यों पर आधारित है. इसमें करदाता ने बाद में अपनी पूरी 30,22,900 रुपये की आय घोषित की, विभाग ने उस आय को बिना किसी अतिरिक्त रकम के स्वीकार किया, TDS पहले से Form 26AS में दिखाई दे रहा था और न्यायाधिकरण ने करदाता की सफाई को सही माना.

इस मामले से यह समझ आता है कि ITR दाखिल न करना और कानून के तहत आय कम दिखाना हमेशा एक ही बात नहीं है. अगर आयकर विभाग की ओर से नोटिस मिलता है, तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय समय पर जवाब देना और जरूरी ITR दाखिल करना जरूरी है. साथ ही Form 16, Form 26AS और आय से जुड़े दूसरे दस्तावेज आपस में मिलाकर रखना भी जरूरी है.

इसे भी पढ़ें- बैंकिंग सबूतों के लिए भारत को 135 साल बाद मिला नया कानून, डिजिटल रिकॉर्ड बनेंगे कोर्ट में एविडेंस; जानें 5 बड़े बदलाव

Loading...
Unable to load recommendations.