रिटायरमेंट के बाद ये कमाई न करें नजरअंदाज, इन 7 तरह की इनकम पर लग सकता है टैक्स

रिटायरमेंट के बाद सैलरी बंद हो जाती है, लेकिन पेंशन, FD का ब्याज, किराया, शेयर और म्यूचुअल फंड से कमाई जारी रह सकती है. इनमें से कई आय टैक्स के दायरे में आती हैं. पुरानी टैक्स व्यवस्था में पात्र सीनियर सिटीजन को Section 80TTB के तहत ब्याज आय पर 50000 रुपये तक की कटौती मिल सकती है. Form 15H से ब्याज टैक्स फ्री नहीं होता.

टैक्स

Highlights

  • पेंशन, FD के ब्याज और किराये की आय पर लग सकता है टैक्स.
  • शेयर और म्यूचुअल फंड बेचने से हुए मुनाफे पर भी टैक्स नियम लागू होते हैं.
  • Form 15H जमा करने से ब्याज टैक्स फ्री नहीं होता, सिर्फ TDS से राहत मिल सकती है.

Senior Citizens Tax Rules: रिटायरमेंट के बाद सैलरी बंद हो जाती है, लेकिन कमाई के कई दूसरे रास्ते बने रहते हैं. पेंशन, बैंक एफडी का ब्याज, किराया, शेयर और म्यूचुअल फंड से होने वाली कमाई जैसी कई इनकम पर टैक्स लग सकता है. इसलिए सीनियर सिटीजन के लिए यह समझना जरूरी है कि रिटायरमेंट के बाद कौन-कौन सी कमाई टैक्स के दायरे में आती है.

1. पेंशन पर लग सकता है टैक्स

रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली नियमित यानी Uncommuted Pension आम तौर पर सैलरी की इनकम मानी जाती है और इस पर टैक्स लग सकता है. हालांकि, लागू नियमों और चुनी गई टैक्स व्यवस्था के हिसाब से Standard Deduction का फायदा मिल सकता है.

2. एफडी और बचत के ब्याज पर टैक्स

बैंक Savings Account, Fixed Deposit (FD), Recurring Deposit (RD), Post Office Deposit और Senior Citizens’ Savings Scheme (SCSS) से मिलने वाला ब्याज भी टैक्स के दायरे में आता है. अगर कोई सीनियर सिटीजन पुरानी टैक्स व्यवस्था चुनता है, तो Section 80TTB के तहत पात्र ब्याज इनकम पर 50000 रुपये तक की कटौती का फायदा मिल सकता है. नई टैक्स व्यवस्था में यह फायदा नहीं मिलता.

3. किराए से होने वाली कमाई

रिटायरमेंट के बाद अगर घर या दूसरी संपत्ति किराए पर दी गई है, तो उससे मिलने वाला किराया भी टैक्स के दायरे में आ सकता है. जहां लागू हो, वहां किराये की आय पर 30 फीसदी Standard Deduction और पात्र होम लोन के ब्याज जैसी दूसरी कटौतियों का फायदा मिल सकता है. किराए पर दी गई व्यावसायिक संपत्ति पर भी आम तौर पर इसी तरह के टैक्स नियम लागू होते हैं.

4. शेयर और म्यूचुअल फंड बेचने पर कमाई

शेयर, म्यूचुअल फंड, जमीन-मकान या दूसरी संपत्तियां बेचने से होने वाला मुनाफा भी टैक्स के दायरे में आ सकता है. इस पर कितना टैक्स लगेगा, यह संपत्ति के प्रकार, उसे कितने समय तक रखा गया और लागू पूंजीगत लाभ के नियमों पर निर्भर करता है. इसलिए शेयर बेचने, म्यूचुअल फंड से पैसा निकालने या एक योजना से दूसरी योजना में पैसा बदलने के दौरान सही जानकारी ITR में देना जरूरी है.

5. बीमा से मिलने वाली पेंशन और वार्षिकी

बीमा कंपनियों से मिलने वाली Annuity या बीमा पेंशन भी आम तौर पर उस साल की टैक्स योग्य आय मानी जाती है, जिस साल पैसा मिला है.

6. Dividend Income पर भी टैक्स

शेयरों से मिलने वाला Dividend भी टैक्स के दायरे में आता है. इसलिए रिटायरमेंट के बाद सैलरी बंद होने के बावजूद शेयरों और निवेश से मिलने वाली आय का हिसाब रखना जरूरी है.

7. इन कमाई पर भी रखें नजर

कुछ ऐसी इनकम भी हैं, जिन पर सीनियर सिटीजन का ध्यान नहीं जाता. इनमें Cumulative FD पर जमा हुआ ब्याज, Income Tax Refund पर मिलने वाला ब्याज, परिवार को मिलने वाली Family Pension, Consultancy या Part-time काम से होने वाली कमाई शामिल हैं.

इसके अलावा कुछ निवेश योजनाओं से होने वाली टैक्स योग्य निकासी और म्यूचुअल फंड को बदलने या बेचने से होने वाला मुनाफा भी टैक्स के दायरे में आ सकता है.

Form 15H भरने से ब्याज टैक्स फ्री नहीं होता

सीनियर सिटीजन के बीच यह गलतफहमी भी रहती है कि Form 15H जमा करने के बाद एफडी या दूसरी जमा राशि से मिलने वाला ब्याज टैक्स फ्री हो जाता है. ऐसा नहीं है. Form 15H की पात्र शर्तें पूरी होने पर जमा राशि के ब्याज पर TDS कटने से राहत मिल सकती है, लेकिन इससे ब्याज की आय टैक्स फ्री नहीं हो जाती. अगर कुल आय पर टैक्स देनदारी शून्य है, तब भी कुछ मामलों में ITR दाखिल करने की जरूरत हो सकती है, खासकर जहां लागू हो वहां Section 87A की बढ़ी हुई छूट का फायदा लेने के लिए.

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