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इनकम टैक्स रिटर्न (ITR)

इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइलिंग का समय शुरू होते ही करोड़ों टैक्सपेयर्स के लिए अपनी आय, निवेश और टैक्स से जुड़े दस्तावेजों को व्यवस्थित करने की प्रक्रिया तेज हो जाती है. नौकरीपेशा कर्मचारियों से लेकर कारोबारी, फ्रीलांसर और निवेशक वर्ग के लिए समय पर ITR दाखिल करना जरूरी माना जाता है. सही समय पर रिटर्न फाइल करने से न केवल कानूनी अनुपालन सुनिश्चित होता है, बल्कि टैक्स रिफंड जल्दी मिलने, लोन आवेदन में वित्तीय रिकॉर्ड मजबूत होने और भविष्य की वित्तीय योजना बनाने में भी मदद मिलती है. हर साल सरकार अलग-अलग आय वर्ग और टैक्स कैटेगरी के अनुसार ITR फॉर्म जारी करती है, इसलिए सही फॉर्म चुनना बेहद अहम होता है. सैलरी, बिजनेस इनकम, कैपिटल गेन, किराया आय, ब्याज से कमाई या दूसरे स्रोतों से होने वाली आय की सही जानकारी देना जरूरी है. इसके अलावा, टैक्स बचत निवेश, कटौतियां और छूट से जुड़े दस्तावेजों को पहले से तैयार रखना प्रक्रिया को आसान बनाता है. इस पेज पर आपको ITR फाइलिंग से जुड़ी हर जरूरी जानकारी मिलेगी. रिटर्न भरने की प्रक्रिया, जरूरी दस्तावेज, डेडलाइन, टैक्स नियमों में बदलाव, रिफंड स्टेटस, टैक्स सेविंग टिप्स और विशेषज्ञों की सलाह मिलेगी ताकि आप बिना किसी परेशानी के अपना ITR समय पर दाखिल कर सकें.

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रिटायरमेंट के बाद सैलरी बंद हो जाती है, लेकिन पेंशन, FD का ब्याज, किराया, शेयर और म्यूचुअल फंड से कमाई जारी रह सकती है. इनमें से कई आय टैक्स के दायरे में आती हैं. पुरानी टैक्स व्यवस्था में पात्र सीनियर सिटीजन को Section 80TTB के तहत ब्याज आय पर 50000 रुपये तक की कटौती मिल सकती है. Form 15H से ब्याज टैक्स फ्री नहीं होता.

आयकर विभाग के मुताबिक, आकलन वर्ष 2026-27 के लिए 31 जुलाई तक 5.9 करोड़ से अधिक ITR दाखिल किए गए. विभाग ने समय पर रिटर्न भरने वाले करदाताओं का धन्यवाद दिया और इसे बेहतर टैक्स अनुपालन का संकेत बताया.

वित्तीय विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अपने वित्तीय डेटा की पहले ही अच्छी तरह जांच कर लें. यह पहले से तैयारी करने वाला कदम सही और बिना गलती वाला रिटर्न जमा करने का सबसे अच्छा तरीका है.

अगर आपने AY 2026-27 के लिए ITR दाखिल कर दिया है, लेकिन अभी तक रिफंड नहीं मिला है, तो इसकी वजह बैंक डिटेल्स में गलती, e-Verification लंबित होना, PAN से जुड़ी समस्या, Form 26AS या AIS से जानकारी का मेल न खाना और ITR में गलतियां हो सकती हैं. रिफंड में देरी होने पर ई-फाइलिंग पोर्टल पर जाकर अपना स्टेटस जांचें.

आयकर विभाग के अनुसार AY 2026-27 के लिए 4 करोड़ से ज्यादा ITR दाखिल हो चुके हैं. विभाग ने करदाताओं से 31 जुलाई की अंतिम तारीख का इंतजार न करने और समय रहते ITR-1 व ITR-2 दाखिल करने की अपील की है.

31 जुलाई की ITR फाइलिंग डेडलाइन नजदीक है. ऐसे में जल्दबाजी में रिटर्न भरना महंगा पड़ सकता है. AIS में गड़बड़ी, ब्याज आय छूटना, F&O की गलत रिपोर्टिंग, विदेशी संपत्ति का खुलासा न करना और दूसरी छोटी गलतियां नोटिस, अतिरिक्त टैक्स या टैक्स लाभ छिनने की वजह बन सकती हैं.

31 जुलाई को ITR-1 और ITR-2 भरने की आखिरी तारीख है. पिछले साल की तरह इस बार डेडलाइन बढ़ने की संभावना कम मानी जा रही है. क्योंकि ITR फॉर्म समय पर जारी हुए हैं, ई-फाइलिंग पोर्टल भी सुचारु रूप से काम कर रहा है. ऐसे में टैक्सपेयर्स को आखिरी समय तक इंतजार नहीं करना चाहिए.

आयकर विभाग ने असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए ITR फाइलिंग में 'Receipts not in the nature of income' नाम से नया कॉलम जोड़ा है. इसमें रिश्तेदारों से मिले गिफ्ट, लोन, पूंजीगत प्राप्तियां और ग्रामीण कृषि भूमि बेचने से मिली रकम की जानकारी दी जा सकेगी. इससे कोई नया टैक्स नहीं लगेगा, लेकिन सही रिपोर्टिंग होने से अनावश्यक टैक्स नोटिस की आशंका कम हो सकती है.

वित्त वर्ष 2025-26 (आकलन वर्ष 2026-27) के लिए आईटीआर-1 और आईटीआर-2 दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 जुलाई 2026 है. तय समय तक रिटर्न दाखिल नहीं करने पर जुर्माना लग सकता है. इसके अलावा कुछ टैक्स रिजीम चुनने का विकल्प सीमित हो सकता है और एलिजिबल लॉस को अगले सालों में आगे ले जाने की सुविधा भी प्रभावित हो सकती है.

इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के बाद 30 दिनों के भीतर e-Verification करना अनिवार्य है. ऐसा नहीं करने पर आयकर विभाग आपके ITR को प्रोसेस नहीं करेगा और उसे अमान्य माना जा सकता है.

वित्त वर्ष 2025-26 के लिए आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने की तैयारी शुरू हो चुकी है. रिटर्न भरने से पहले सभी जरूरी दस्तावेज तैयार रखना बेहद महत्वपूर्ण है. फॉर्म-16, AIS, 26AS, निवेश और कटौती से जुड़े प्रमाण पत्रों की मदद से टैक्सपेयर्स गलतियों से बच सकते हैं, जिससे नोटिस या रिफंड में देरी जैसी समस्याओं की आशंका कम हो जाती है.

इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन आखिरी तारीख का इंतजार करना आपके लिए महंगा साबित हो सकता है. समय पर ITR दाखिल करने से न सिर्फ लेट फीस और ब्याज से बचा जा सकता है, बल्कि कैपिटल लॉस को आगे ले जाने, बेहतर क्रेडिट प्रोफाइल बनाए रखने और लोन या वीजा आवेदन में मदद जैसे कई फायदे भी मिलते हैं.

इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की प्रोसेस को आसान और गलती रहित बनाने के लिए टैक्सपेयर्स को जरूरी डॉक्यूमेंट पहले से तैयार रखने चाहिए. फॉर्म 16, फॉर्म 26AS, AIS, बैंक स्टेटमेंट, होम लोन स्टेटमेंट और कैपिटल गेन डॉक्यूमेंट की सही जानकारी देने में मदद करते हैं. सही डॉक्यूमेंट होने से कटौती और छूट का लाभ आसानी से मिल सकता है.

अगर आप पिछले वर्षों का ITR भरना भूल गए हैं, तो अब भी आपके पास कानूनी विकल्प मौजूद हैं. आयकर विभाग करदाताओं को ‘ITR-U’ और ‘Condonation of Delay’ जैसे दो अहम रास्ते देता है, जिनकी मदद से पुरानी गलती सुधारी जा सकती है या रिफंड का दावा किया जा सकता है. हालांकि दोनों विकल्प अलग परिस्थितियों में लागू होते हैं और इनके नियम भी अलग हैं.

अगर आप जल्दबाजी में 15 जून से पहले ITR फाइल करने की सोच रहे हैं, तो सावधान हो जाइए. टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक, Form 16, AIS और Form 26AS पूरी तरह अपडेट होने से पहले रिटर्न दाखिल करने पर डेटा मिसमैच, टैक्स नोटिस और रिफंड में देरी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. जानिए क्यों सही और एरर-फ्री ITR के लिए 15 जून तक इंतजार करना जरूरी माना जा रहा है.

आयकर रिटर्न (ITR) फाइलिंग के नियमों में AY 2026-27 के लिए कई बड़े बदलाव किए गए हैं. अब revised return दाखिल करने के लिए ज्यादा समय मिलेगा, दो हाउस प्रॉपर्टी की जानकारी ITR-1 और ITR-4 में दी जा सकेगी, जबकि शेयर बाजार ट्रेडिंग, विदेशी आय और बैंक बैलेंस से जुड़े नए खुलासे भी अनिवार्य कर दिए गए हैं.