8th Pay Commission: पुराने पेंशनर्स को भी मिल सकता है पेंशन बढ़ोतरी का फायदा! DoPT ने आगे बढ़ाई मांग, 1985 की मिसाल बनी उम्मीद

8वें वेतन आयोग को लेकर पुराने केंद्रीय पेंशनर्स के लिए बड़ी खबर है. DoPT ने 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हुए कर्मचारियों की पेंशन संशोधन की मांगों को व्यय विभाग के पास भेज दिया है. हालांकि, अभी सरकार की मंजूरी नहीं मिली है. 1985 की मिसाल से पेंशनर्स को उम्मीद जगी है.

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8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों के साथ-साथ पुराने पेंशनर्स की उम्मीदें भी बढ़ गई हैं. 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हुए केंद्रीय कर्मचारियों की पेंशन में संशोधन की मांग अब एक कदम आगे बढ़ी है. कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने इस संबंध में कर्मचारी और पेंशनर संगठनों से मिले अभ्यावेदनों को व्यय विभाग (Department of Expenditure) के पास भेज दिया है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सरकार ने पेंशन बढ़ाने की मांग को मंजूरी दे दी है.

किन पेंशनर्स के लिए उठी मांग?

ऑल इंडिया RMS, MMS एंड पोस्टल पेंशनर्स एसोसिएशन और ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AIDEF) ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के Terms of Reference यानी कार्यक्षेत्र में बदलाव की मांग की है. संगठनों का कहना है कि आयोग के दायरे में उन पेंशनर्स को भी साफ तौर पर शामिल किया जाना चाहिए, जो 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हो चुके हैं.

DoPT ने 18 अगस्त 2026 के कार्यालय ज्ञापन के जरिए इन दोनों संगठनों के अभ्यावेदन व्यय विभाग को भेजे हैं. अब इन मांगों पर आगे की कार्रवाई और फैसला व्यय विभाग के स्तर पर होना है.

क्यों महत्वपूर्ण है 1985 का मामला?

पुराने पेंशनर्स के लिए सबसे बड़ी उम्मीद 1985 की एक ऐतिहासिक मिसाल से जुड़ी है. उस समय चौथे केंद्रीय वेतन आयोग के Terms of Reference में बदलाव किया गया था. नवंबर 1985 में सरकार ने आयोग को पुराने और भविष्य के दोनों पेंशनर्स के लिए उचित पेंशन व्यवस्था की समीक्षा करने का दायित्व दिया था.

पेंशनर संगठन इसी पुराने उदाहरण का हवाला देकर मांग कर रहे हैं कि 8वें वेतन आयोग के दायरे में भी पुराने पेंशनर्स को स्पष्ट रूप से शामिल किया जाए.

पेंशनर्स की दूसरी मांगें भी अहम

पेंशन संशोधन के अलावा संगठनों ने कई दूसरी मांगें भी उठाई हैं. इनमें 3.833 का फिटमेंट फैक्टर, न्यूनतम वेतन को बढ़ाकर 69,000 रुपये करने और पेंशन कम्यूटेशन की बहाली की अवधि घटाने जैसी मांगें शामिल हैं. कुछ संगठनों ने सिविलियन कर्मचारियों के लिए One Rank One Pension की मांग भी रखी है.

अभी क्या होगा?

फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि DoPT द्वारा मांगों को आगे भेजना सिर्फ प्रक्रिया में आगे बढ़ने का संकेत है, अंतिम मंजूरी नहीं. अब व्यय विभाग इन प्रस्तावों पर विचार करेगा. इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि 8वें वेतन आयोग के Terms of Reference में पुराने पेंशनर्स को शामिल करने के लिए कोई बदलाव किया जाता है या नहीं.

अगर सरकार 1985 की तरह इस बार भी नियमों में बदलाव करती है, तो 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हुए केंद्रीय कर्मचारियों के लिए पेंशन संशोधन का रास्ता खुल सकता है. फिलहाल पेंशनर्स की नजर सरकार और 8वें वेतन आयोग के अगले कदम पर है.

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