मिनिमम ड्यू भरते रहे तो बढ़ सकता है कर्ज! Credit Card इस्तेमाल करने वालों को समझना होगा ये बात
क्रेडिट कार्ड का मिनिमम ड्यू सिर्फ बकाया का न्यूनतम पेमेंट है. 30,000 रुपये के बिल पर 5% मिनिमम ड्यू होने पर 1,500 रुपये जमा करना होगा, लेकिन बाकी 28,500 रुपये पर ब्याज लग सकता है. बार-बार मिमिमम ड्यू भरने से क्रेडिट यूटिलाइजेशन बढ़ सकता है और लंबे समय में यह डेट ट्रैप का कारण बन सकता है. इसलिए संभव हो तो पूरा बिल समय पर चुकाएं.

क्रेडिट कार्ड खरीदारी या अचानक होने वाले खर्च को संभालने का आसान तरीका है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि अगर ग्राहक पेमेंट की तय तारीख तक पूरा बकाया चुका देता है, तो उसे एक्स्ट्रा ब्याज नहीं देना पड़ता. लेकिन कई लोग मिनिमम ड्यू को लेकर गलतफहमी का शिकार हो जाते हैं. उन्हें लगता है कि सिर्फ मिनिमम ड्यू भरने से ब्याज से बचा जा सकता है, जबकि ऐसा नहीं है. आइए जानते हैं कैसे.
क्या होता है Minimum Due?
मिनिमम ड्यू वह सबसे कम रकम है, जिसे बैंक हर महीने क्रेडिट कार्ड बिल पर जमा करने के लिए कहता है, ताकि अकाउंट ओवरड्यू न हो और लेट फीस से बचा जा सके. HDFC Bank के एक ब्लॉग पोस्ट के मुताबिक, Credit Card Bill पर मिनिमम ड्यू आमतौर पर कुल बकाया रकम का 5 फीसदी से 10 फीसदी तक हो सकता है. इसमें जमा ब्याज, फीस या नए चार्ज भी शामिल हो सकते हैं. हालांकि, वास्तविक रकम क्रेडिट कार्ड और बैंक की नीतियों पर निर्भर करती है.
₹30,000 के बिल पर कितना होगा मिनिमम ड्यू?
मान लीजिए क्रेडिट कार्ड का कुल बकाया 30,000 रुपये है और Minimum Due 5% है. ऐसे में मिनिमम ड्यू 1500 रुपये होगा यानी ग्राहक अगर सिर्फ 1500 रुपये जमा करता है, तो बाकी 28,500 रुपये अगले बिलिंग साइकल में चला जाएगा.
सिर्फ मिनिमम ड्यू भरने से ब्याज से नहीं बचेंगे
यहीं क्रेडिट कार्ड का बड़ा जोखिम सामने आता है. मिनिमम ड्यू समय पर जमा करने से अकाउंट ओवरड्यू होने से बच सकता है, लेकिन बाकी बकाया रकम अगले बिल में चली जाती है और उस पर कार्ड की लागू ब्याज दर के हिसाब से ब्याज लग सकता है. साथ ही नए खर्च पर मिलने वाली ब्याज-मुक्त अवधि भी खत्म हो सकती है.
मिंट की पहले की रिपोर्ट के मुताबिक, कई क्रेडिट कार्ड पर मासिक ब्याज दर करीब 3% से 4% तक होती है. साधारण सालाना हिसाब से यह करीब 36% से 48% बैठती है. ऐसे में क्रेडिट कार्ड का बकाया लंबे समय तक रखना महंगा पड़ सकता है. हालांकि, कुछ शर्तें पूरी होने पर ब्याज-मुक्त अवधि दोबारा मिल सकती है. अगर किसी बिलिंग साइकल में यह सुविधा खत्म हो गई है, तो लगातार कुछ महीनों तक पूरा और समय पर भुगतान करने की सलाह दी जाती है. इसके बाद Credit Card कंपनी ब्याज-मुक्त अवधि को फिर से शुरू कर सकती है.
Credit Score पर क्या असर पड़ेगा?
हर महीने सिर्फ Minimum Due भरने से अपने आप Credit Score खराब नहीं होता, बशर्ते भुगतान समय पर किया जा रहा हो. लेकिन अगर लंबे समय तक बड़ी बकाया रकम बनी रहती है, तो Credit Utilisation Ratio बढ़ सकता है. यानी उपलब्ध Credit Limit का ज्यादा हिस्सा इस्तेमाल होने लगता है. लगातार ज्यादा Credit Utilisation आपके Credit Profile पर नकारात्मक असर डाल सकता है और भविष्य में Loan या Credit हासिल करने की शर्तों को प्रभावित कर सकता है.
बन सकता है डेट ट्रैप
अगर मिनिमम ड्यू को नियमित भुगतान का तरीका बना लिया जाए, तो बकाया रकम लगातार बढ़ सकती है. CRIF High Mark की रिपोर्ट के मुताबिक, इससे यह संकेत मिल सकता है कि ग्राहक अपनी Repayment या Spending को ठीक से मैनेज नहीं कर पा रहा है. स्थिति ज्यादा बिगड़ने पर यह डेट ट्रैप में बदल सकती है. यानी पुराना क्रेडिट कार्ड बकाया चुकाने के लिए नया Loan लेना पड़े और फिर उसे चुकाने के लिए दोबारा उधार लेना पड़े. यह सिलसिला चलता रहे तो कर्ज का बोझ लगातार बढ़ सकता है.
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