क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करते हैं तो स्टेटमेंट डेट और पेमेंट डेट समझ लें का फर्क, एक गलती पड़ सकती है भारी!

क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते समय स्टेटमेंट डेट और पेमेंट ड्यू डेट का अंतर समझना बेहद जरूरी है. स्टेटमेंट डेट पर महीने का बिल बनता है, जबकि पेमेंट ड्यू डेट तक उस बिल की रकम चुकानी होती है. इन दोनों तारीखों को समझने से ब्याज, लेट फीस और क्रेडिट स्कोर पर पड़ने वाले नकारात्मक असर से बचने में मदद मिल सकती है.

क्रेडिट कार्ड Image Credit: money9live

Credit Card Statement Date vs Payment Due Date: क्रेडिट कार्ड का सही तरीके से इस्तेमाल सिर्फ समय पर बिल भरने तक सीमित नहीं है. क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करने वालों के लिए बिलिंग साइकल की दो तारीखें बेहद अहम होती हैं. पहली है स्टेटमेंट डेट और दूसरी है पेमेंट ड्यू डेट. दोनों तारीखें एक ही बिलिंग चक्र का हिस्सा होती हैं, लेकिन दोनों का काम अलग-अलग है. इनका अंतर समझना इसलिए जरूरी है, क्योंकि इससे आपको यह पता चलता है कि आपका बिल कब बनेगा और उस बिल का भुगतान कब तक करना है.

स्टेटमेंट डेट क्या होती है?

स्टेटमेंट डेट वह तारीख होती है, जिस दिन क्रेडिट कार्ड जारी करने वाला बैंक या कंपनी महीने का बिल तैयार करती है. इस तारीख तक किए गए उन लेनदेन को संबंधित बिलिंग चक्र में शामिल किया जाता है, जिनका भुगतान उस बिल में करना होता है. यानी आसान भाषा में कहें तो स्टेटमेंट डेट यह तय करने में मदद करती है कि कौन-से लेनदेन मौजूदा क्रेडिट कार्ड बिल में शामिल होंगे.

मान लीजिए आपके क्रेडिट कार्ड की स्टेटमेंट डेट महीने की 10 तारीख है. ऐसे में उस बिलिंग चक्र में शामिल लेनदेन के आधार पर 10 तारीख को आपका बिल तैयार किया जाएगा.

पेमेंट ड्यू डेट क्या होती है?

पेमेंट ड्यू डेट वह आखिरी तारीख होती है, जिस तक आपको क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट में बताई गई रकम का भुगतान करना होता है. इस तारीख का ध्यान रखना सबसे ज्यादा जरूरी है. अगर कुल बकाया रकम समय पर चुका दी जाती है, तो ब्याज और लेट पेमेंट शुल्क से बचने में मदद मिलती है.

वहीं अगर सिर्फ न्यूनतम रकम का भुगतान किया जाता है, तो बाकी रकम बकाया रह सकती है. इससे ब्याज का खर्च बढ़ सकता है और उधार लेने की लागत भी ज्यादा हो सकती है.

दोनों तारीखों में क्या है अंतर?

इसे बहुत आसान तरीके से समझें.

स्टेटमेंट डेट = आपका क्रेडिट कार्ड बिल कब बनेगा.

पेमेंट ड्यू डेट = उस बिल की रकम कब तक चुकानी है.

यानी स्टेटमेंट डेट बिल तैयार होने की तारीख है, जबकि पेमेंट ड्यू डेट भुगतान की आखिरी तारीख है. इन दोनों तारीखों के बीच का समय कार्डधारक को बिल देखने, खर्च की जांच करने और भुगतान की योजना बनाने का मौका देता है.

बड़ी खरीदारी की योजना बनाने में भी मदद

स्टेटमेंट डेट को समझना बड़ी खरीदारी की योजना बनाने में भी मदद कर सकता है. अगर कोई लेनदेन स्टेटमेंट तैयार होने के तुरंत बाद किया जाता है, तो वह आम तौर पर अगले बिलिंग चक्र में शामिल होगा. ऐसे में उस लेनदेन का भुगतान करने के लिए कार्डधारक को ज्यादा समय मिल सकता है.

हालांकि, हर बैंक या क्रेडिट कार्ड जारी करने वाली कंपनी का बिलिंग चक्र और पेमेंट की शर्तें अलग हो सकती हैं. इसलिए कार्डधारक को अपने क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट में दी गई तारीखों और शर्तों को जरूर देखना चाहिए.

पेमेंट ड्यू डेट को क्यों देना चाहिए ज्यादा महत्व?

क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करते समय दोनों तारीखों पर नजर रखना जरूरी है, लेकिन भुगतान के लिहाज से पेमेंट ड्यू डेट सबसे अहम है. इस तारीख तक कुल बकाया रकम का पेमेंट नहीं करने पर ब्याज और लेट पेमेंट शुल्क लग सकता है. इसके अलावा भुगतान में देरी आपके क्रेडिट प्रोफाइल पर भी नकारात्मक असर डाल सकती है.

इसलिए सिर्फ बिल बनने की तारीख जानना काफी नहीं है. यह भी देखना जरूरी है कि उस बिल का भुगतान किस तारीख तक करना है.

क्रेडिट कार्ड बिलिंग को आसान कैसे बनाएं?

क्रेडिट कार्ड का बेहतर प्रबंधन करने के लिए सबसे पहले स्टेटमेंट डेट को समझें. इससे आपको पता रहेगा कि किसी खास बिल में कौन-कौन से लेनदेन शामिल हैं. इसके बाद पेमेंट ड्यू डेट को प्राथमिकता दें और कोशिश करें कि कुल बकाया रकम समय पर चुका दी जाए.

दोनों तारीखों की जानकारी होने से खरीदारी, रोजमर्रा के खर्च और नकदी की योजना बेहतर तरीके से बनाई जा सकती है. साथ ही अनावश्यक ब्याज और लेट पेमेंट शुल्क से बचने में भी मदद मिल सकती है.

कुल मिलाकर, स्टेटमेंट डेट यह बताती है कि आपका बिल कब बनेगा, जबकि पेमेंट ड्यू डेट यह बताती है कि उस बिल का भुगतान कब तक करना है. इन दोनों के अंतर को समझना क्रेडिट कार्ड के बेहतर और जिम्मेदार इस्तेमाल के लिए जरूरी है.

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