इनकम टैक्स रिफंड पर मिला ब्याज न करें नजरअंदाज, जानें 5 जरूरी नियम
इनकम टैक्स रिफंड के साथ मिला ब्याज फ्री इनकम नहीं है. यह पूरी तरह टैक्सेबल होता है और इसे इनकम फ्रॉम अदर सोर्सेस के तहत ITR में दिखाना जरूरी है. धारा 437 के तहत ब्याज दिया जाता है, जबकि धारा 92 के अनुसार इस पर आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है.
रिफंड पर मिला ब्याज टैक्सेबल हैअगर आपको इनकम टैक्स रिफंड के साथ ब्याज मिला है तो यह पूरी तरह टैक्स के दायरे में आता है. इसे फ्री इनकम न समझें. यह राशि इनकम फ्रॉम अदर सोर्सेस के तहत जोड़ी जाती है और आपके टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगता है.
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किस वित्त वर्ष में जोड़ना होगारिफंड पर मिला ब्याज उसी साल की आय माना जाता है जिस साल आपको यह प्राप्त हुआ. उदाहरण के लिए अगर वित्त वर्ष 2024 25 में ब्याज मिला है तो इसे अगले असेसमेंट में शामिल करना होगा. ITR भरते समय इसे अलग से दिखाना जरूरी है.
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कितनी दर से मिलता है ब्याजटैक्स विभाग रिफंड पर 6 फीसदी सालाना साधारण ब्याज देता है. यह हर महीने 0.5 फीसदी के हिसाब से जोड़ा जाता है. अगर आपने रिटर्न देर से फाइल किया है तो ब्याज की कैलकुलेशन फाइलिंग की तारीख से शुरू होती है.
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किन हालात में नहीं मिलेगा ब्याजअगर रिफंड की राशि कुल टैक्स देनदारी के 10 फीसदी से कम है तो ब्याज नहीं मिलेगा. साथ ही अगर देरी आपकी गलती से हुई है तो उस अवधि का ब्याज नहीं दिया जाएगा.
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कानून में क्या कहती हैं धारा 437 और 92इनकम टैक्स एक्ट 2025 की धारा 437 रिफंड पर ब्याज देने का प्रावधान करती है. वहीं धारा 92 के तहत यह ब्याज इनकम फ्रॉम अदर सोर्सेस माना जाता है. इसलिए इसे ITR में शामिल करना अनिवार्य है.