टैक्सपेयर्स अलर्ट! ITR भरने की नई तारीखें जारी, शेयर बाजार, विदेशी कमाई और FD वालों के लिए नए नियम जरूरी
आयकर रिटर्न (ITR) फाइलिंग के नियमों में AY 2026-27 के लिए कई बड़े बदलाव किए गए हैं. अब revised return दाखिल करने के लिए ज्यादा समय मिलेगा, दो हाउस प्रॉपर्टी की जानकारी ITR-1 और ITR-4 में दी जा सकेगी, जबकि शेयर बाजार ट्रेडिंग, विदेशी आय और बैंक बैलेंस से जुड़े नए खुलासे भी अनिवार्य कर दिए गए हैं.

Income Tax Return 2026: अगर आप नौकरीपेशा हैं, कारोबारी हैं या शेयर बाजार से कमाई करते हैं, तो यह खबर आपके लिए सबसे जरूरी है. असेसमेंट ईयर (AY) 2026-27 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने के नियमों में सरकार ने बड़े बदलाव कर दिए हैं. इस बार सिर्फ सही आंकड़े भरना काफी नहीं है, बल्कि उन्हें बिल्कुल सही जगह और सही तरीके से दिखाना होगा. जरा सी भी लापरवाही आपको सीधे इनकम टैक्स विभाग का नोटिस थमा सकती है. क्लीयरटैक्स की वेबसाइट पर दी जानकारी के मुताबिक, आइए जानते हैं कि इस साल टैक्सपेयर्स के लिए क्या-क्या बदल गया है और आपको किन नई डेडलाइन्स का ध्यान रखना है.
ITR फाइल करने की नई डेडलाइन्स
सरकार ने अलग-अलग कैटगरी के टैक्सपेयर्स के लिए रिटर्न दाखिल करने की आखिरी तारीखें तय कर दी हैं:
- सैलरीड क्लास और पेंशनर्स (ITR-1 और ITR-2): 31 जुलाई 2026
- बिजनेस क्लास (बिना ऑडिट वाले केस – ITR-3 और ITR-4): 31 अगस्त 2026
- ऑडिट वाले बिजनेस केस (ITR-3): 31 अक्टूबर 2026 (इसके लिए ऑडिट रिपोर्ट 30 सितंबर 2026 तक जमा करनी होगी)
- रिवाइज्ड रिटर्न (बिना लेट फीस): 31 दिसंबर 2026
रिवाइज्ड रिटर्न के लिए बड़ी राहत और लेट फीस
अगर आपसे रिटर्न भरते समय कोई गलती हो जाती है, तो उसे सुधारने (Revised Return) के लिए एक नई टाइमलाइन दी गई है. टैक्सपेयर्स 1 जनवरी 2027 से 31 मार्च 2027 के बीच लेट फीस देकर अपना रिवाइज्ड ITR भर सकते हैं.
- यदि कुल टैक्सेबल इनकम 5 लाख रुपये से अधिक है, तो 5,000 रुपये लेट फीस लगेगी.
- यदि कुल टैक्सेबल इनकम 5 लाख रुपये से कम है, तो 1,000 रुपये लेट फीस देनी होगी.
- इसके लिए सेक्शन 234-I के तहत एक नया कॉलम भी जोड़ दिया गया है.
शेयर बाजार की कमाई और दो मकानों पर नए नियम
- ट्रेडिंग इनकम: अगर आप इंट्राडे (Intraday) या स्पेकुलेटिव बिजनेस (सट्टेबाजी) से कमाई करते हैं, तो अब आपको इसका टर्नओवर और इनकम सीधे ITR-3 में डिक्लेयर करना होगा.
- दो हाउस प्रॉपर्टी की छूट: टैक्सपेयर्स अब दो मकानों (Self-occupied या रेंटेड) की जानकारी सीधे ITR-1 और ITR-4 में दे सकते हैं.
- रेंटल इनकम का नया फॉर्मूला: अब टैक्सपेयर्स अपने ग्रॉस रेंट में से ‘unrealized rent’ (जो किराया नहीं मिला) को घटा सकते हैं. इसका फॉर्मूला है:
{Annual Value} = {Gross Annual Rent} – {Unrealized Rent} – {Municipal Tax}
(नोट: यदि पुराना बकाया या डूबा हुआ किराया वापस मिलता है, तो उसमें 30% की कटौती क्लेम करके बाकी हिस्सा इनकम में जोड़ना होगा.)
बैंक बैलेंस, पॉलिटिकल डोनेशन और कैपिटल गेन्स
बैंक बैलेंस: ITR-4 भरने वालों के लिए 31 मार्च तक का क्लोजिंग बैंक बैलेंस बताना अनिवार्य कर दिया गया है.
लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG): 1,25,000 रुपये तक का LTCG अब ITR-1 और ITR-4 में दिखाया जा सकता है. इससे ज्यादा का गेन होने पर ITR-2 या ITR-3 भरना होगा.
पॉलिटिकल डोनेशन (u/s 80G & 80GGC): अगर आप राजनीतिक दलों को चंदा देकर टैक्स छूट क्लेम कर रहे हैं, तो आपको UPI/Cheque/NEFT का ट्रांजैक्शन रेफरेंस नंबर, पार्टी का नाम और उनका PAN देना जरूरी होगा.
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विदेशी कमाई और अन्य बड़े बदलाव
- फॉरेन इनकम: विदेशी क्लाइंट्स, फ्रीलांसिंग या इंटरनेशनल कॉन्ट्रैक्ट्स से होने वाली कमाई को Schedule FA के पॉइंट G में दिखाना होगा. विदेशी पेंशन या DTAA का लाभ लेने वालों को अब अनिवार्य रूप से ITR-2 या ITR-3 फॉर्म ही भरना होगा.
- अन्य बदलाव: अब नोटिस और कम्यूनिकेशन के लिए वैकल्पिक (Secondary) एड्रेस, ईमेल और मोबाइल नंबर देने का ऑप्शन मिलेगा. इसके अलावा, पार्टनरशिप फर्मों की वित्तीय जानकारी और MSME को किए गए लेट पेमेंट के ब्याज को ITR-3 में दिखाना होगा.
पोर्टल पर लॉगिन करने से पहले अपने सभी डॉक्यूमेंट्स और इन नए नियमों को अच्छे से री-चेक कर लें, क्योंकि आज की तैयारी ही कल के टैक्स नोटिस से आपका बचाव है.