CA या टैक्स कंसल्टेंट की गलती पर क्या आपको भरना पडे़गा जुर्माना? ट्रिब्यूनल के फैसले से समझिए नियम

अगर आपने अपना ITR किसी CA या टैक्स कंसल्टेंट से भरवाया है और उससे गलती हो गई, तो हर मामले में आप पर जुर्माना नहीं लगेगा. चेन्नई ITAT ने साफ किया है कि यदि गलती जानबूझकर नहीं बल्कि अनजाने में हुई है और टैक्सपेयर ने उसे स्वीकार कर अतिरिक्त टैक्स जमा कर दिया है.

AIS, TIS और Form 26AS से सभी जानकारियों का मिलान जरूर करें. Image Credit: CANVA

इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करते समय अधिकतर लोग चार्टर्ड अकाउंटेंट या टैक्स कंसल्टेंट की मदद लेते हैं. लेकिन अगर रिटर्न भरते समय गलती टैक्स कंसल्टेंट से हो जाए, तो क्या उसका जुर्माना भी टैक्सपेयर को भरना होगा. इस सवाल का जवाब हाल ही में चेन्नई इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल यानी ITAT ने दिया है. ट्रिब्यूनल ने साफ किया कि अगर गलती जानबूझकर नहीं बल्कि अनजाने में हुई है, तो उसे इनकम छिपाना नहीं माना जा सकता.

क्या था पूरा मामला

Tax Buddy की रिपोर्ट के मुताबिक, चेन्नई की 81 वर्षीय एस सरोजा ने वित्त वर्ष 2016-17 का ITR भरने के लिए टैक्स प्रोफेशनल की मदद ली थी. सभी जरूरी डॉक्यूमेंट देने के बावजूद रिटर्न में दो गलतियां हो गईं. रेंट की इनकम कम दिखाई गई और इंटरेस्ट की इनकम को गलत हेड में दर्ज कर दिया गया. जांच के दौरान इनकम टैक्स डिपॉर्टमेंट ने यह गलती पकड़ ली.

गलती मानकर तुरंत भर दिया अतिरिक्त टैक्स

जांच के बाद सरोजा ने बिना किसी विवाद के अपनी गलती स्वीकार कर ली. उन्होंने 3.08 लाख रुपये की अतिरिक्त इनकम पर टैक्स भी जमा कर दिया. इसके बावजूद असेसिंग ऑफिसर ने इनकम कम दिखाने को मिसरिपोर्टिंग मानते हुए 1.92 लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया. बाद में आयुक्त अपील ने भी इस जुर्माने को सही ठहराया.

ITAT ने क्यों हटाया पूरा जुर्माना

मामला ITAT चेन्नई पहुंचा, जहां ट्रिब्यूनल ने टैक्सपेयर के पक्ष में फैसला दिया. ट्रिब्यूनल ने कहा कि टैक्स प्रोफेशनल की ईमानदार गलती को जानबूझकर इनकम छिपाना नहीं माना जा सकता. ब्याज इनकम की गलत कैटेगरी से टैक्स पर कोई असर नहीं पड़ा था और किराये की इनकम में कमी भी अनजाने में हुई थी. इसलिए पूरा जुर्माना रद्द कर दिया गया.

टैक्सपेयर के लिए क्या सीख

इस फैसले से साफ है कि हर गलती को मिसरिपोर्टिंग नहीं माना जाएगा. अगर गलती सामने आने पर टैक्सपेयर उसे स्वीकार करता है और तुरंत अतिरिक्त टैक्स जमा करता है, तो यह उसकी ईमानदारी मानी जाएगी. ऐसे मामलों में अदालत राहत दे सकती है.

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ITR फाइल करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

जानकारों का कहना है कि भले ही ITR किसी CA या टैक्स कंसल्टेंट ने तैयार किया हो, लेकिन ई -वेरिफिकेशन से पहले उसे खुद जरूर जांचें. अपनी इनकम का मिलान AIS, TIS और Form 26AS से करें. सभी कटौतियों और इनकम के सही हेड की जांच कर लें. अगर गलती टैक्स प्रोफेशनल से हुई है, तो उसका लिखित स्वीकार पत्र भी संभालकर रखें. इससे भविष्य में किसी विवाद की स्थिति में मदद मिल सकती है.