सेविंग अकाउंट में ब्याज: मंथली या क्वार्टरली क्रेडिट, किसमें मिलता है ज्यादा फायदा?

सेविंग अकाउंट में ब्याज हर महीने या तिमाही जमा होने से कंपाउंडिंग पर थोड़ा असर पड़ता है. ₹3 लाख की रकम पर मंथली क्रेडिट से 3 साल में मामूली अतिरिक्त फायदा मिल सकता है, लेकिन ब्याज दर का असर ज्यादा बड़ा होता है.

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अगर आपके सेविंग अकाउंट में पैसा पड़ा रहता है तो बैंक उस पर ब्याज देता है. लेकिन क्या आपने कभी यह देखा है कि आपके बैंक में ब्याज हर महीने मिलता है या तीन महीने में एक बार? ब्याज जमा होने का तरीका आपके कुल रिटर्न पर थोड़ा असर डाल सकता है. खासकर तब, जब अकाउंट में लंबे समय तक बड़ी रकम रखी हो.

मंथली और क्वार्टरली ब्याज में क्या अंतर है?

कई बैंक सेविंग अकाउंट का ब्याज हर तिमाही यानी तीन महीने में खाते में जमा करते हैं. वहीं कुछ बैंक हर महीने ब्याज क्रेडिट करते हैं. मंथली क्रेडिट में मिलने वाला ब्याज जल्दी आपके खाते के बैलेंस में जुड़ जाता है और उसके बाद उस रकम पर भी ब्याज मिलना शुरू हो सकता है.

यानी यहां कंपाउंडिंग यानी ब्याज पर ब्याज का फायदा मिलता है. हालांकि सिर्फ ब्याज क्रेडिट होने की frequency के आधार पर बड़ा अंतर नहीं बनता. बैंक की ब्याज दर का असर आमतौर पर इससे कहीं ज्यादा होता है.

₹3 लाख जमा करने पर कितना फर्क?

मान लीजिए दो लोगों ने अपने-अपने सेविंग अकाउंट में ₹3 लाख रखे हैं. दोनों बैंकों की ब्याज दर 3% सालाना है. एक बैंक हर महीने ब्याज जोड़ता है और दूसरा हर तिमाही. रिपोर्ट के मुताबिक 1 साल बाद मंथली क्रेडिट वाले खाते में करीब ₹3,09,136 और क्वार्टरली क्रेडिट वाले खाते में ₹3,09,102 होंगे. यानी करीब ₹34 का अंतर.

2 साल बाद यह अंतर लगभग ₹70 और 3 साल बाद करीब ₹109 हो जाता है. अगर ब्याज दर 4% मानें तो ₹3 लाख की रकम 3 साल में मंथली कंपाउंडिंग के साथ करीब ₹3,38,181.56 और क्वार्टरली कंपाउंडिंग के साथ करीब ₹3,38,047.51 हो सकती है. अंतर करीब ₹134 है.

ब्याज दर ज्यादा महत्वपूर्ण है

जानकारों के मुताबिक ब्याज कितनी बार खाते में जमा होता है, इसका फायदा सीमित होता है. इसके मुकाबले ब्याज दर में 1 प्रतिशत अंक का अंतर ज्यादा असर डाल सकता है. इसलिए सिर्फ मंथली ब्याज मिलने के कारण बैंक अकाउंट चुनना सही तरीका नहीं है.

नया सेविंग अकाउंट खोलते समय क्या देखें?

अकाउंट चुनते समय ब्याज दर के साथ मिनिमम बैलेंस, बैंक चार्ज, ATM और ब्रांच की सुविधा, ट्रांजैक्शन लिमिट, डिजिटल बैंकिंग और कस्टमर सर्विस भी देखनी चाहिए.

अगर खाते में बड़ी रकम लंबे समय तक रखनी है तो ब्याज दर और दूसरी शर्तों को खास तौर पर जांचें. वहीं रोजमर्रा के खर्च और इमरजेंसी फंड के लिए पैसे रखने वाले अकाउंट में आसान पहुंच और बैंकिंग सुविधा भी महत्वपूर्ण हैं.

कुल मिलाकर, मंथली ब्याज क्रेडिट से कंपाउंडिंग का थोड़ा अतिरिक्त फायदा मिल सकता है, लेकिन सेविंग अकाउंट चुनते समय इसे अकेला आधार नहीं बनाना चाहिए.

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