8th Pay Commission: पेंशनर्स के लिए बदल सकते हैं DR के नियम, हर 3 महीने हो सकता है रिविजन; जानें क्या है मांग
8th Pay Commission में केंद्रीय पेंशनर्स के DR को लेकर बदलाव की मांग उठी है. Bharat Pensioners Samaj ने DR में हर 3 महीने रिविजन करने का सुझाव दिया है. वहीं FNPO ने 25 फीसदी DR पर इसे बेसिक पेंशन में मर्ज करने और 50 फीसदी DR पर फिटमेंट फैक्टर की समीक्षा की मांग की है.
Highlights
- 8th Pay Commission में DR के नियम बदलने की मांग उठी.
- पेंशनर्स ने हर 3 महीने DR रिविजन का सुझाव दिया.
- 25 फीसदी DR पर बेसिक पेंशन में मर्ज करने की मांग.
8th Pay Commission को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों के साथ पेंशनर्स की भी उम्मीदें बढ गई हैं. आयोग की बैठकों में पेंशनर्स संगठनों की ओर से मंहगाई भत्ता यानी DR को लेकर कई मांगें रखी गई हैं. सबसे अहम मांग DR के रिविजन को लेकर है. भारत पेंशनर्स समाज ने DR और DA में बदलाव हर 3 महीने के आधार पर करने का सुझाव दिया है. फिलहाल DA और DR की दरों में आमतौर पर साल में दो बार बदलाव होता है. इसके अलावा कुछ संगठनों ने DR को बेसिक पेंशन में मर्ज करने और फिटमेंट फैक्टर की दोबारा समीक्षा की मांग भी रखी है. हालांकि, अभी इन प्रस्तावों को मंजूरी नहीं मिली है.
अभी पेंशनर्स को कैसे मिलता है DR
केंद्रीय सरकारी पेंशनर्स को सरकार की ओर से तय दर के आधार पर महंगाई राहत मिलता है. यह रकम आमतौर पर पेंशन के साथ बैंक खाते में जमा होती है. DR का मकसद महंगाई बढ़ने से पेंशन की वास्तविक खरीद क्षमता पर पड़ने वाले असर को कम करना है. DR की दर सरकार समय- समय पर नोटिफाई करती है. आमतौर पर इसमें साल में दो बार बदलाव किया जाता है. यानी पेंशनर्स को जनवरी और जुलाई के आसपास नई दरों का लाभ मिल सकता है.
हर 3 महीने DR बदलने की क्या है मांग
Bharat Pensioners Samaj ने DR की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव का सुझाव दिया है. संगठन चाहता है कि DA और DR में हर 3 महीने बदलाव किया जाए. इसके लिए तीन महीने के औसत आंकड़ों को आधार बनाने की मांग की गई है. इसका मकसद महंगाई में तेजी या कमी का असर पेंशनर्स तक ज्यादा जल्दी पहुंचाना है. हालांकि, यह केवल पेंशनर्स संगठन की मांग है. 8th Pay Commission या केंद्र सरकार ने अभी इसे मंजूरी नहीं दी है.
बेसिक पेंशन में मर्ज की मांग
Federation of National Postal Organisations ने DR को लेकर एक और प्रस्ताव रखा है. संगठन ने सुझाव दिया है कि जब DA या DR 25 फीसदी से ज्यादा हो जाए तो इसे बेसिक पे या बेसिक पेंशन में मर्ज किया जाए. ऐसा होने पर मर्ज की गई रकम आगे की कैलकुलेशन का हिस्सा बन सकती है. हालांकि, इस तरह का बदलाव तभी होगा जब सरकार या आयोग इसे अपनी सिफारिशों में शामिल करे. फिलहाल मौजूदा व्यवस्था में ऐसा कोई नया मर्जर नियम लागू नहीं हुआ है.
फिर से फिटमेंट फैक्टर की समीक्षा
पेंशनर्स संगठनों की मांग सिर्फ DR तक सीमित नहीं है. FNPO ने यह भी सुझाव दिया है कि जब DA या DR 50 फीसदी तक पहुंच जाए तो फिटमेंट फैक्टर की दोबारा समीक्षा की जाए. इसके अलावा एक स्थायी वेतन समीक्षा निकाय बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया है. संगठन का कहना है कि इसका उद्देश्य वेतन और पेंशन से जुडे़ मामलों की समय समय पर समीक्षा करना है. इससे भविष्य में कर्मचारियों और पेंशनर्स को अगले वेतन आयोग का लंबा इंतजार नहीं करना पडे़गा.
बेसिक पेंशन पर समझें DR का हिसाब
मान लीजिए किसी केंद्रीय सरकारी पेंशनर की बेसिक पेंशन 40000 रुपये है और लागू DR दर 60 फीसदी है. ऐसे में DR की रकम 24000 रुपये होगी. यानी बेसिक पेंशन और DR को जोडने पर कुल पेंशन 64000 रुपये होगी. अगर भविष्य में DR की दर बढ़ती है तो इसी आधार पर DR की रकम भी बढे़गी. हालांकि, वास्तविक पेंशन में कम्यूटेड पेंशन या दूसरी लागू कटौतियों का असर हो सकता है.
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8th Pay Commission में क्या बदल सकता है
8th Pay Commission का गठन 3 नवंबर 2025 को हुआ था और इसे अपनी रिपोर्ट देने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है. आयोग फिलहाल कर्मचारियों, पेंशनर्स और दूसरे हितधारकों से सुझाव ले रहा है. पेंशनर्स संगठनों की DR से जुड़ी मांगें भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा हैं. आयोग की अंतिम सिफारिशों में इन मांगों को शामिल किया जाएगा या नहीं, यह अभी तय नहीं है. रिपोर्ट मई जून 2027 के आसपास आने की उम्मीद है. इसके बाद सरकार अंतिम फैसले के आधार पर नई व्यवस्था लागू करेगी.
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