ITR भरने वालों के लिए जरूरी खबर, टैक्स रिजीम बदलने से पहले इन बातों पर करें गौर
इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने की समय सीमा नजदीक आने के साथ न्यू और ओल्ड टैक्स रिजीम को लेकर टैक्सपेयर्स के बीच भ्रम बना हुआ है. न्यू टैक्स रिजीम में 12 लाख रुपये तक की इनकम पर टैक्स राहत का लाभ मिलता है, जबकि पुरानी व्यवस्था में कई कटौतियां और छूट उपलब्ध हैं. साथ ही टैक्स देनदारी शून्य होने पर भी समय पर ITR दाखिल करना जरूरी है.

Income Tax Return: न्यू और ओल्ड टैक्स रिजीम के बीच चुनाव करना आज भी लाखों टैक्सपेयर्स के लिए एक बड़ा सवाल बना हुआ है. इनकम रिटर्न फाइल करने की समय सीमा नजदीक आने के साथ लोग यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि उनके लिए कौन सा विकल्प अधिक फायदेमंद रहेगा. न्यू टैक्स रिजीम में कम टैक्स दरों का लाभ मिलता है, जबकि पुरानी व्यवस्था में कई तरह की छूट और कटौतियां उपलब्ध हैं. सरकार ने वित्त वर्ष 2025 26 से नई व्यवस्था में 12 लाख रुपये तक की इनकम पर टैक्स राहत का प्रावधान किया है. इसके बावजूद अधिक इनकम वाले लोगों को दोनों विकल्पों का सावधानी से मूल्यांकन करना चाहिए. गलत चुनाव करने पर टैक्स बचत का मौका छूट सकता है.
न्यू टैक्स रिजीम में क्या फायदा
न्यू टैक्स रिजीम अब डिफाल्ट टैक्स सिस्टम बन चुकी है. इसमें कम टैक्स दरों का लाभ मिलता है, लेकिन अधिकांश छूट और कटौतियां उपलब्ध नहीं होती हैं. सरकार ने 12 लाख रुपये तक की इनकम पर रिबेट का लाभ दिया है, जिससे इस लिमिट तक की इनकम पर टैक्स देनदारी समाप्त हो सकती है. सैलरीड कर्मचारियों के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन के कारण यह सीमा 12.75 लाख रुपये तक पहुंच जाती है. ऐसे में कम और मीडियम इनकम ग्रुप के लिए नई व्यवस्था आसान और आकर्षक विकल्प बन गई है.
ओल्ड टैक्स रिजीम में मिलती हैं कई फायदें
जो लोग निवेश, बीमा और होम लोन जैसी सुविधाओं का लाभ लेते हैं, उनके लिए पुरानी टैक्स व्यवस्था फायदेमंद हो सकती है. इसमें धारा 80C, 80CCD, 80D और 24 बी के तहत विभिन्न कटौतियां मिलती हैं. हालांकि जानकारों का मानना है कि यदि कुल कटौतियां 3 से 4 लाख रुपये से कम हैं तो पुरानी व्यवस्था का लाभ सीमित रह सकता है. ऐसे में टैक्स की वास्तविक कैलकुलेशन करने के बाद ही विकल्प चुनना बेहतर होगा.
नौकरीपेशा और कारोबारियों के लिए अलग नियम
नौकरीपेशा कर्मचारियों को वित्त वर्ष के दौरान अपने नियोक्ता को चुनी गई टैक्स व्यवस्था की जानकारी देनी होती है. यदि वे ऐसा नहीं करते हैं तो न्यू टैक्स रिजीम स्वतः लागू मानी जाती है. दूसरी ओर, व्यवसाय या पेशेवर आय वाले टैक्सपेयर्स हर साल दोनों व्यवस्थाओं के बीच आसानी से बदलाव नहीं कर सकते. एक बार नई व्यवस्था से बाहर निकलने के बाद वापस आने के विकल्प सीमित हो सकते हैं. इसलिए उन्हें फैसला लेने से पहले पूरी जानकारी हासिल करनी चाहिए.
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ITR दाखिल करना जरूरी
कई टैक्सपेयर्स यह समझते हैं कि यदि उनका टैक्स शून्य है तो उन्हें इनकम रिटर्न दाखिल करने की जरूरत नहीं है. लेकिन नियम इसके विपरीत हैं. न्यू टैक्स रिजीम में 4 लाख रुपये और पुरानी व्यवस्था में 2.5 लाख रुपये से अधिक इनकम होने पर ITR दाखिल करना जरूरी हो सकता है. समय पर रिटर्न नहीं भरने पर जुर्माना और अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है.