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EPFO का बड़ा फैसला! PF के लिए वेतन सीमा ₹15,000 से बढ़कर ₹25,000, करोड़ों कर्मचारियों को फायदा

नई लिमिट लागू होने पर सैलरी पाने वाले और भी कर्मचारी अनिवार्य प्रोविडेंट फंड और पेंशन कवरेज के दायरे में आ जाएंगे. अभी अनिवार्य EPF और EPS कवरेज सिर्फ उन संस्थानों पर लागू होता है जिनमें 20 या उससे ज्यादा कर्मचारी हैं.

ईपीएफ Image Credit: Getty image

Highlights

  • इस बदलाव से सरकार पर भी आर्थिक बोझ बढ़ने की उम्मीद है.
  • मंजूरी के लिए कैबिनेट के सामने रखा जाएगा प्रस्ताव.
  • इस बदलाव से सरकार पर भी आर्थिक बोझ बढ़ने की उम्मीद है.

वित्त मंत्रालय ने अनिवार्य रिटायरमेंट फंड कवरेज के लिए सैलरी की सीमा को 15,000 रुपये प्रति माह से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह करने को मंजूरी दे दी है. यह लिमिट एक दशक से अधिक समय से बदली नहीं है. सूत्रों के मुताबिक, नई लिमिट लागू होने पर सैलरी पाने वाले और भी कर्मचारी अनिवार्य प्रोविडेंट फंड और पेंशन कवरेज के दायरे में आ जाएंगे. इसे कब से लागू किया जाएगा, इसका फैसला कैबिनेट की मंजूरी के बाद लिया जाएगा.

क्या होगा बदलाव?

अब तक हर महीने 15,000 रुपये तक कमाने वाले कर्मचारियों को सरकार की ‘एम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड’ और ‘एम्प्लॉई पेंशन स्कीम’ के दायरे में अनिवार्य रूप से शामिल किया जाता था. इस सीमा (थ्रेशोल्ड) को बढ़ाने से, अब 25,000 रुपये तक की बेसिक सैलरी पाने वाले कर्मचारी भी इस अनिवार्य सरकारी योजना के दायरे में आ जाएंगे. इस कदम से कंपनियों और सरकार, दोनों के लिए नियमों का पालन करने की लागत (कम्प्लायंस कॉस्ट) बढ़ जाएगी.

मंजूरी के लिए कैबिनेट के सामने रखा जाएगा प्रस्ताव

मनीकंट्रोल ने एक अधिकारी के हवाले से बताया कि 25,000 रुपये की लिमिट तय करने से पहले मंत्रालय ने 30,000 रुपये की लिमिट पर भी विचार किया था. सरकारी सूत्र ने कहा, ‘वित्त मंत्रालय ने अब एम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड (EPF) की वेतन सीमा को 25,000 रुपये प्रति माह करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. शुरू में लिमिट को 30,000 रुपये तक बढ़ाने का प्रस्ताव था, लेकिन मंजूर किया गया प्रस्ताव 25,000 रुपये का है. अब इस मामले को मंजूरी के लिए कैबिनेट के सामने रखा जाएगा.’

EPS और EPF के दायरे में किसे रखा जाता है?

मौजूदा समय में सिर्फ वे कर्मचारी जिनकी बेसिक सैलरी 15,000 रुपये प्रति माह तक है, उन्हें अनिवार्य रूप से एम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड (EPF) और एम्प्लॉई पेंशन स्कीम (EPS) के दायरे में रखा जाता है. इससे अधिक कमाने वाले कर्मचारी इससे बाहर रह सकते हैं और एम्प्लॉयर के लिए उन्हें इसमें शामिल करना कानूनी रूप से जरूरी नहीं है.

जब यह लिमिट 25,000 रुपये हो जाएगी, तो 15,000 रुपये से 25,000 रुपये प्रति माह कमाने वाले कर्मचारी भी इसके दायरे में आ जाएंगे. इस बदलाव से प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों के लिए सोशल सिक्योरिटी कवरेज के काफी बढ़ने की उम्मीद है.

बढ़ जाएगी पेरोल लागत

एम्प्लॉयर्स के लिए इसका मतलब है कि अब उनके वर्कफोर्स का एक बड़ा हिस्सा अनिवार्य योगदान के दायरे में आएगा, जिससे पेरोल लागत बढ़ जाएगी.

सरकार भी बढ़ेगा आर्थिक बोझ

इस बदलाव से सरकार पर भी आर्थिक बोझ बढ़ने की उम्मीद है. पेंशन फंड में एम्प्लॉयर (नियोक्ता) बेसिक सैलरी का 8.33% और सरकार बेसिक सैलरी का 1.16% योगदान देती है. 2026-27 के लिए एम्प्लॉइज पेंशन स्कीम (EPS) को 11,144 करोड़ रुपये का बजट आवंटन मिला है.

अभी अनिवार्य EPF और EPS कवरेज सिर्फ उन संस्थानों पर लागू होता है जिनमें 20 या उससे ज्यादा कर्मचारी हैं. छोटी कंपनियां चाहें तो स्वेच्छा से रजिस्टर कर सकती हैं, लेकिन उन पर ऐसा करने की कोई बाध्यता नहीं है. यह बदलाव मुख्य रूप से संगठित प्राइवेट सेक्टर तक ही सीमित है. केंद्र सरकार के कर्मचारी अलग पेंशन व्यवस्था के तहत आते हैं और EPS के दायरे से बाहर हैं.

तुरंत लागू होने की संभावना कम

हालांकि, प्रस्ताव आगे बढ़ रहा है, लेकिन कैबिनेट की मंजूरी के तुरंत बाद इसे लागू किए जाने की संभावना कम है. अधिकारी ने कहा, ‘कंपनियों और एम्प्लॉयर्स को अपने पेरोल सिस्टम, कंप्लायंस प्रोसेस और इससे जुड़े ऑपरेशनल इंतजामों में बदलाव करने के लिए पर्याप्त समय की जरूरत होगी. इसलिए, संशोधित वेज सीलिंग (वेतन सीमा) के लागू होने से पहले कुछ ट्रांजिशन टाइम (बदलाव का समय) दिया जा सकता है.’

आखिरी बार कब हुआ था लिमिट में बदलाव

रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा स्थिति को देखते हुए, उम्मीद है कि संशोधित EPF वेज सीलिंग 1 अप्रैल 2027 से लागू हो सकती है. हालांकि, अंतिम तारीख का फैसला कैबिनेट की मंजूरी और कंपनियों को तैयारी के लिए जरूरी समय को ध्यान में रखकर किया जाएगा. इस सीलिंग में पिछली बार सितंबर 2014 में बदलाव किया गया था, जब इसे बढ़ाकर 15,000 रुपये कर दिया गया था.

इनपुट- पीयूष पांडेय टीवी 9 भारतवर्ष

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