₹54 लाख कैश जमा कर भूला टैक्स देना! ITAT ने क्यों माफ किया पूरा टैक्स?

प्रॉपर्टी डीलर ने बैंक खाते में 54 लाख रुपये कैश जमा किए, लेकिन ITR दाखिल नहीं किया और टैक्स नोटिस का जवाब भी नहीं दिया. ITAT ने दस्तावेजों के आधार पर माना कि रकम उसकी आय नहीं थी और टैक्स हटा दिया.

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इनकम टैक्स से जुड़े एक मामले में दिल्ली ITAT ने अहम फैसला सुनाया है. एक प्रॉपर्टी डीलर ने अपने बैंक खाते में 54 लाख रुपये कैश जमा किए थे. खास बात यह थी कि उसने उस साल ITR दाखिल नहीं किया और इनकम टैक्स विभाग की ओर से भेजे गए कई नोटिस का जवाब भी नहीं दिया. इसके बावजूद बाद में वह ITAT में अपना केस जीत गया. ट्रिब्यूनल ने माना कि बैंक में जमा पूरी 54 लाख रुपये की रकम उसकी अपनी कमाई नहीं थी.

इनकम टैक्स विभाग ने क्यों लगाया टैक्स?

यह मामला वित्त वर्ष 2011-12 का है. इनकम टैक्स विभाग को जानकारी मिली कि प्रॉपर्टी डीलर के बैंक खाते में कुल 54 लाख रुपये नकद जमा हुए थे. विभाग ने इस रकम के बारे में जानकारी मांगते हुए 13 फरवरी 2019 को नोटिस भेजा. लेकिन डीलर की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया.

इसके बाद विभाग ने 28 मार्च 2019 को आयकर कानून की धारा 148 के तहत नोटिस जारी किया. इसके बाद धारा 142(1) के तहत तीन और नोटिस भेजे गए. इन नोटिस का भी जवाब नहीं दिया गया. आखिरकार असेसिंग ऑफिसर ने 16 दिसंबर 2019 को बैंक में जमा 54 लाख रुपये को डीलर की आय मान लिया और उस पर टैक्स लगा दिया.

पहले CIT(A) से भी नहीं मिली राहत

असेसिंग ऑफिसर के फैसले के खिलाफ प्रॉपर्टी डीलर ने अपील की. उसने दावा किया कि बैंक में जमा रकम उसकी कमाई नहीं है. वह प्रॉपर्टी खरीदारों और विक्रेताओं के बीच मध्यस्थ के रूप में काम करता था. खरीदारों से मिलने वाली रकम उसके बैंक खाते में जमा होती थी और बाद में यही पैसा प्रॉपर्टी विक्रेताओं को दिया जाता था.

हालांकि, पहली अपील में उसे राहत नहीं मिली. इसके बाद उसने इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT), दिल्ली का रुख किया.

ITAT के सामने पेश किए कई दस्तावेज

ITAT में सुनवाई के दौरान डीलर ने अपने दावे के समर्थन में कई दस्तावेज पेश किए. इनमें बैंक स्टेटमेंट, तीन प्रॉपर्टी विक्रेताओं के हलफनामे, आठ रजिस्टर्ड सेल डीड और सात खरीदारों के हलफनामे शामिल थे.

इन दस्तावेजों के जरिए उसने बताया कि बैंक खाते में जमा पैसा अलग-अलग प्रॉपर्टी सौदों से जुड़ा था. रकम कुछ समय के लिए उसके खाते से होकर गुजरी और बाद में प्रॉपर्टी बेचने वालों को ट्रांसफर कर दी गई.

ITAT ने क्यों हटाया ₹54 लाख का टैक्स?

22 जुलाई 2026 को मामले की सुनवाई हुई और 30 जुलाई को ITAT ने अपना फैसला सुनाया. ट्रिब्यूनल ने उपलब्ध दस्तावेजों और बैंक लेनदेन को देखते हुए माना कि 54 लाख रुपये को पूरी तरह डीलर की अघोषित आय नहीं माना जा सकता.

ITAT ने पाया कि डीलर ने खरीदारों से रकम प्राप्त करके उसे बैंक में जमा किया और बाद में प्रॉपर्टी विक्रेताओं को भुगतान किया था. इसलिए यह रकम उसकी वास्तविक कमाई नहीं थी. इसी आधार पर ट्रिब्यूनल ने 54 लाख रुपये को आय मानकर लगाए गए टैक्स को हटा दिया.

इस मामले से टैक्सपेयर्स को क्या सीख मिलती है?

इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि बैंक में बड़ी रकम जमा करने या ITR नहीं भरने पर टैक्स विभाग कार्रवाई नहीं करेगा. बड़ी नकद रकम के मामले में उसका स्रोत और इस्तेमाल साबित करने वाले दस्तावेज बेहद जरूरी होते हैं.

इस केस में डीलर को राहत इसलिए मिली क्योंकि वह बाद में बैंक स्टेटमेंट, प्रॉपर्टी की रजिस्टर्ड सेल डीड और खरीदार-विक्रेताओं के हलफनामों के जरिए यह साबित करने में सफल रहा कि 54 लाख रुपये उसकी अपनी आय नहीं थे.

इसलिए अगर आपके बैंक खाते में किसी दूसरे व्यक्ति की रकम आती-जाती है, तो उसका पूरा रिकॉर्ड रखना जरूरी है. वहीं, इनकम टैक्स विभाग का नोटिस मिलने पर समय पर जवाब देना भी बेहद महत्वपूर्ण है. इस मामले में राहत खास परिस्थितियों और उपलब्ध सबूतों के आधार पर मिली है, इसे सभी मामलों पर लागू होने वाला नियम नहीं माना जा सकता.

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