₹2.90 लाख रुपये की डिफेंस खरीद से बदलेगी तस्वीर, इन 3 कंपनियों को मिल सकता है फायदा; मजबूत है ऑर्डर बुक

भारत के बढ़ते डिफेंस खर्च और मिसाइल निर्माण को लेकर Bharat Electronics, Bharat Dynamics और Apollo Micro Systems चर्चा में हैं. मार्च 2026 में 2.38 लाख करोड़ रुपये के डिफेंस खरीद प्रस्तावों को मंजूरी मिली, जबकि इसके बाद करीब 52,000 करोड़ रुपये का एक और पैकेज स्वीकृत हुआ. इन कंपनियों को मिसाइल, एयर डिफेंस सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक्स और महत्वपूर्ण सब-सिस्टम से जुड़े कारोबार में अवसर मिल सकते हैं.

डिफेंस स्टॉक Image Credit: @AI/Money9live

Defence Stocks: भारत अपने मिसाइल और एयर डिफेंस सिस्टम को मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. मार्च 2026 में डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल ने 2.38 लाख करोड़ रुपये के डिफेंस खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी. इसके कुछ महीनों बाद करीब 52,000 करोड़ रुपये के एक और पैकेज को मंजूरी मिली, जिसमें मीडियम रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल, वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम और मैन-पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम शामिल हैं. इससे मिसाइल निर्माण और इससे जुड़े इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सब-सिस्टम कारोबार में भारतीय कंपनियों के लिए अवसर बढ़े हैं. इस बढ़ते मिसाइल इकोसिस्टम में तीन कंपनियां खास तौर पर चर्चा में हैं. इनमें Bharat Electronics, Bharat Dynamics और Apollo Micro Systems शामिल हैं.

Bharat Electronics

Bharat Electronics यानी BEL डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र की प्रमुख कंपनी है. कंपनी के कुल रेवेन्यू में डिफेंस कारोबार की हिस्सेदारी 88 फीसदी है, जबकि 84 फीसदी रेवेन्यू स्वदेशी उत्पादों से आता है. BEL मिसाइलों में इस्तेमाल होने वाले रडार, सीकर, कंट्रोल सेंटर और अन्य महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक सब-सिस्टम उपलब्ध कराती है. कंपनी QRSAM, Long Range SAM, Project Kusha और Akash जैसे कार्यक्रमों से जुड़ी है.

QRSAM कार्यक्रम BEL के लिए करीब 30,000 करोड़ रुपये का संभावित अवसर है. Financial Express की रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई 2026 तक कंपनी का कुल ऑर्डर बुक 72,258 करोड़ रुपये था, जिसमें करीब 90 फीसदी हिस्सा डिफेंस कारोबार का था. कंपनी FY27 में 55,000 करोड़ रुपये से अधिक का ऑर्डर इनफ्लो हासिल करने का लक्ष्य रखती है.

Bharat Dynamics

Bharat Dynamics यानी BDL गाइडेड मिसाइल और वेपन सिस्टम के निर्माण से सीधे तौर पर जुड़ी कंपनी है. इसका ऑर्डर बुक 26,500 करोड़ रुपये था, जो पिछले 12 महीनों के रेवेन्यू का करीब 9.6 गुना है. कंपनी Improved Akash Weapon System के बल्क प्रोडक्शन को मंजूरी मिलने के बाद उत्पादन बढ़ाने की स्थिति में है. इसके अलावा Astra Mk-I और Amogha-III जैसे कार्यक्रम भी कंपनी के लिए महत्वपूर्ण हैं.

BDL Rafael के साथ Spike LR2 मिसाइल पर भी काम कर रही है. कंपनी ने इसके लिए एक समर्पित मैन्युफैक्चरिंग लाइन शुरू की है. FY26 में BDL को एंटी-टैंक और एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम से करीब 5,400 करोड़ रुपये के नए ऑर्डर मिले. आने वाले वर्षों में Helina और Dhruvastra जैसे कार्यक्रमों से भी नए ऑर्डर मिलने की उम्मीद है.

Apollo Micro Systems

Apollo Micro Systems यानी AMS मिसाइलों के महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक और तकनीकी सब-सिस्टम उपलब्ध कराती है. कंपनी Akash, QRSAM, Kusha, BrahMos, एंटी-टैंक, एयर-टू-सर्फेस और अन्य मिसाइल कार्यक्रमों में मौजूद है. QRSAM में कंपनी गाइडेंस सिस्टम, ऑनबोर्ड कंप्यूटर और एक्टुएशन सिस्टम समेत करीब पांच सब-सिस्टम बनाती है.

कंपनी ने Premier Explosives का अधिग्रहण किया है, जिससे मिसाइल और गाइडेड वेपन वैल्यू चेन में उसकी मौजूदगी बढ़ी है. इसका कंसोलिडेटेड ऑर्डर बुक 1,704 करोड़ रुपये था. कंपनी ने 40-45 फीसदी रेवेन्यू ग्रोथ का लक्ष्य रखा है और मार्च 2027 तक अपनी ऑपरेशनल क्षमता को 12 गुना बढ़ाने की योजना बनाई है.

निवेशकों के लिए अहम बात

इन कंपनियों में कारोबार की संभावनाएं मजबूत हैं, लेकिन वैल्यूएशन और ऑर्डर एग्जीक्यूशन महत्वपूर्ण जोखिम बने हुए हैं. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, BEL का ROCE 49.4 फीसदी और ROE 36.4 फीसदी था, जबकि Apollo Micro Systems और BDL के रिटर्न अनुपात इससे कम थे. Apollo Micro Systems और BDL प्रीमियम वैल्यूएशन पर कारोबार कर रहे थे, जबकि BEL अपने तीन साल के औसत की तुलना में अपेक्षाकृत कम वैल्यूएशन पर थी.

इस तरह भारत के बढ़ते मिसाइल खर्च और स्वदेशी रक्षा उत्पादन से इन तीनों कंपनियों को लंबी अवधि में अवसर मिल सकते हैं. हालांकि, किसी भी कंपनी में निवेश करने से पहले उसके ऑर्डर बुक, ऑर्डर एग्जीक्यूशन, कैश फ्लो, मार्जिन, कर्ज और वैल्यूएशन का विश्लेषण करना जरूरी है.

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