शेयर बाजार में मिडकैप स्टॉक का जलवा! Dixon Technologies से Godfrey Phillips India समेत इन 3 कंपनियों पर रखें नजर
भारतीय शेयर बाजार में मिडकैप कंपनियां लगातार शानदार प्रदर्शन कर रही हैं. Dixon Technologies, Waaree Energies और Godfrey Phillips India जैसी कंपनियों ने मजबूत ग्रोथ, बेहतर मुनाफे और मजबूत फंडामेंटल के दम पर निवेशकों का भरोसा जीता है. इन कंपनियों ने बिक्री, प्रॉफिट, ROE, ROCE और EBITDA जैसे प्रमुख वित्तीय मानकों पर बेहतर प्रदर्शन किया है.

Midcap Stocks: भारतीय शेयर बाजार में मिडकैप कंपनियां लगातार निवेशकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं. जहां लार्जकैप कंपनियां स्थिरता का प्रतीक मानी जाती हैं, वहीं मिडकैप कंपनियां बेहतर ग्रोथ की संभावनाओं के कारण लंबी अवधि के निवेशकों के लिए आकर्षक विकल्प बनकर उभरी हैं. साल 2026 में बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद कई मिडकैप कंपनियों ने शानदार प्रदर्शन किया है. इन कंपनियों ने न केवल अपनी बिक्री और मुनाफे में मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की है, बल्कि कैपिटल पर बेहतर रिटर्न और कम कर्ज के दम पर निवेशकों का भरोसा भी जीता है.
Dixon Technologies: इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग की बड़ी ताकत
नोएडा स्थित Dixon Technologies भारत की सबसे बड़ी इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज कंपनी है. कंपनी सैमसंग, शाओमी, मोटरोला और रियलमी जैसी प्रमुख कंपनियों के लिए स्मार्टफोन, एलईडी टीवी, वॉशिंग मशीन, लाइटिंग प्रोडक्ट्स और टेलीकॉम इक्विपमेंट का निर्माण करती है. वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का प्रदर्शन बेहद मजबूत रहा.
इक्विटीमास्टर की रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान उसका रेवेन्यू 28 फीसदी बढ़कर 495.9 अरब रुपये पहुंच गया, जबकि नेट प्रॉफिट 33 फीसदी बढ़कर 16.4 अरब रुपये हो गया. कंपनी का ROCE 44.8 फीसदी रहा, जो इसकी मजबूत ऑपरेशनल क्षमता को दिखाता है. फिलहाल कंपनी की लगभग 90 फीसदी आय मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग से आती है. गुरुवार को कंपनी का शेयर 0.60 फीसदी की गिरावट के साथ 12013 रुपये पर बंद हुआ.
Waaree Energies: सोलर सेक्टर की बड़ी दावेदार
Waaree Energies भारत की प्रमुख सोलर मॉड्यूल निर्माता कंपनियों में शामिल है, लेकिन कंपनी का लक्ष्य केवल सोलर पैनल तक सीमित नहीं है. वह सोलर सेल, बैटरी, इन्वर्टर, ट्रांसफॉर्मर, ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में भी विस्तार कर रही है. वित्त वर्ष 2026 के अंत तक कंपनी के पास लगभग 530 अरब रुपये का ऑर्डर बुक था, जो आने वाले वर्षों के लिए मजबूत आय का संकेत देता है. वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का रेवेन्यू सालाना आधार पर 84 फीसदी बढ़ा, जबकि EBITDA मार्जिन बढ़कर 22.3 फीसदी पहुंच गया.
कंपनी अपनी सेल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को 5.4 गीगावाट से बढ़ाकर 15.4 गीगावाट करने की योजना पर काम कर रही है. वहीं मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता भी 25.8 गीगावाट से बढ़ाकर 28.4 गीगावाट की जाएगी. इसके अलावा 10 गीगावाट इंगट और वेफर निर्माण यूनिट पर भी काम जारी है. डेटा सेंटर, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और बढ़ती बिजली मांग के कारण कंपनी को आने वाले वर्षों में मजबूत ग्रोथ की उम्मीद है. गुरुवार को कंपनी का शेयर 0.64 फीसदी की गिरावट के साथ 3009.40 रुपये पर बंद हुआ.
Godfrey Phillips India: चुनौतीपूर्ण सेक्टर में भी लगातार बेहतर प्रदर्शन
Godfrey Phillips India, केके मोदी ग्रुप और फिलिप मॉरिस ग्लोबल ब्रांड्स की सहयोगी कंपनी है. कंपनी भारत में आठ दशकों से अधिक समय से सिगरेट कारोबार में सक्रिय है. इसके प्रमुख ब्रांड्स में फोर स्क्वेयर, रेड एंड व्हाइट, स्टेलर और कैवेंडर्स शामिल हैं. कंपनी भारत में मार्लबोरो सिगरेट का निर्माण और वितरण भी करती है. तंबाकू उद्योग में लगातार बढ़ते टैक्स, कड़े नियम और नियामकीय चुनौतियों के बावजूद कंपनी ने अपने कारोबार को बेहतर तरीके से संभाला है.
पिछले पांच वर्षों में कंपनी की बिक्री लगभग 20 फीसदी की CAGR दर से बढ़ी है, जबकि नेट प्रॉफिट में 38 फीसदी की CAGR दर्ज की गई है. इसी अवधि में कंपनी का औसत ROE 21 फीसदी रहा है. गुरुवार को कंपनी का शेयर 0.05 फीसदी की बढ़त के साथ 2247.30 रुपये पर बंद हुआ.
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डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.