BRICS की बड़ी मांग, IMF और वर्ल्ड बैंक में इमर्जिंग मार्केट को मिले ज्यादा भागीदारी; टैरिफ पर जताई चिंता

BRICS देशों ने IMF और वर्ल्ड बैंक में उभरते बाजार और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को ज्यादा प्रतिनिधित्व देने की मांग की है. समूह ने कोटा और मतदान हिस्सेदारी में बदलाव पर जोर दिया. BRICS ने एकतरफा टैरिफ और व्यापार से जुड़े कदमों पर भी चिंता जताते हुए कहा कि इससे वैश्विक व्यापार प्रभावित होता है और विकासशील देशों पर ज्यादा दबाव पड़ता है.

BRICS ने एकतरफा टैरिफ पर चिंता जताई. Image Credit:

BRICS देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों ने IMF और वर्ल्ड बैंक में उभरते बाजार और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को ज्यादा प्रतिनिधित्व देने की मांग की है. BRICS का कहना है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में इन देशों की भूमिका काफी बढ़ गई है. ऐसे में ब्रेटन वुड्स संस्थानों की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव किया जाना चाहिए. बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में समूह ने एकतरफा टैरिफ और व्यापार से जुड़े प्रतिबंधों पर भी चिंता जताई. BRICS ने कहा कि ऐसे कदम वैश्विक व्यापार को प्रभावित करते हैं और इनका सबसे ज्यादा असर उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ता है.

IMF और वर्ल्ड बैंक में ज्यादा हिस्सेदारी की मांग

BRICS देशों ने IMF और वर्ल्ड बैंक में उभरते बाजार और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की आवाज मजबूत करने की मांग की है. समूह ने कहा कि इन संस्थानों की प्रशासनिक व्यवस्था में वैश्विक अर्थव्यवस्था में आए बदलाव को दिखाया जाना चाहिए. इसके लिए कोटा और वोटिंग राइट में बदलाव की जरूरत बताई गई है. BRICS का मानना है कि विकासशील देशों को फैसले लेने की प्रक्रिया में उनकी आर्थिक भूमिका के मुताबिक ज्यादा प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए. इससे वैश्विक वित्तीय संस्थानों में इन देशों की भागीदारी और प्रभाव बढ़ सकता है.

IMF के कोटा में जल्द बदलाव की मांग

BRICS ने IMF से कोटा की 16वीं सामान्य समीक्षा के तहत मंजूर कोटा बढ़ोतरी को बिना किसी और देरी के लागू करने की मांग की है. इसके साथ ही कोटा की 17वीं समीक्षा के तहत कोटा में बदलाव की प्रक्रिया जल्द शुरू करने को कहा गया है. समूह ने यह भी कहा कि कोटा तय करने का फार्मूला ऐसा होना चाहिए, जिससे सबसे गरीब सदस्य देशों की हिस्सेदारी सुरक्षित रहे. BRICS ने साफ किया कि किसी देश के इसके कोटा आवंटन, प्रशासनिक प्रतिनिधित्व या वोटिंग पावर का वालंटियर फाइनेंशियल कंट्रीब्यूशन के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए.

वर्ल्ड बैंक के प्रमुख के चयन पर भी जोर

BRICS ने IMF और वर्ल्ड बैंक के प्रमुखों के चयन की प्रक्रिया में बदलाव की मांग की है. समूह का कहना है कि इन संस्थानों के प्रमुखों का चुनाव योग्यता और ट्रांसपेरेंसी के आधार पर होना चाहिए. इसमें विकासशील देशों को भी ज्यादा प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए. BRICS के मुताबिक, अगर अलग-अलग क्षेत्रों और देशों को नेतृत्व में उचित जगह मिलेगी तो विकासशील देशों का इन संस्थानों पर भरोसा बढ़ेगा. यह मांग ऐसे समय की गई है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था में उभरते बाजारों की भूमिका लगातार बढ़ रही है.

टैरिफ पर BRICS ने जताई आपत्ति

BRICS देशों ने बिना किसी देश का नाम लिए एकतरफा व्यापार और वित्त से जुड़े कदमों पर गंभीर चिंता जताई है. समूह ने कहा कि टैरिफ और गैर टैरिफ उपाय बढ़ाने से व्यापार में विकृति पैदा होती है और ये विश्व व्यापार संगठन यानी WTO के नियमों के अनुरूप नहीं हैं. BRICS के मुताबिक ऐसे कदमों का सबसे ज्यादा दबाव उभरते बाजार और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ता है. समूह ने खुले, ट्रांसपेरेंसी और नियम रूल बेस्ड मल्टीलेटरल ट्रेड सिस्टम का सपोर्ट किया और कहा कि इसके केंद्र में WTO होना चाहिए.

अमेरिका की टैरिफ नीति का दिखा असर

BRICS का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका की व्यापार और टैरिफ नीतियों ने वैश्विक व्यापार को प्रभावित किया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 अप्रैल 2025 को कई देशों के खिलाफ टैरिफ की घोषणा की थी. इसमें भारत, ब्राजील, रूस और चीन जैसे देश भी शामिल थे. बाद में टैरिफ व्यवस्था में कई बदलाव हुए और जुलाई 2026 से भारत समेत कई देशों पर अतिरिक्त 10 फीसदी टैरिफ लगाया गया. BRICS ने अपने बयान में किसी देश का नाम नहीं लिया, लेकिन एकतरफा टैरिफ को लेकर उसकी चिंता व्यापक वैश्विक व्यापार तनाव से जुड़ी मानी जा रही है.

लोकल करेंसी में कारोबार को बढ़ावा

BRICS देशों ने आपसी व्यापार और निवेश में स्थानीय करेंसी के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया है. समूह के मुताबिक इसके लिए क्रॉस बॉर्डर ट्रांजेक्शन सिस्टम को मजबूत करने पर काम जारी है. BRICS पेमेंट टास्क पोर्स अलग-अलग पेमेंट और कम्युनिकेशन सिस्टम के बीच आपसी तालमेल की संभावनाओं पर काम कर रहा है. इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच पेमेंट को तेज, कम लागत वाला, सुरक्षित और आसान बनाना है.

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BRICS में वित्तीय सहयोग बढ़ाने की तैयारी

भारत की 2026 की BRICS अध्यक्षता के दौरान वित्तीय और आर्थिक सहयोग से जुड़े कई क्षेत्रों में काम आगे बढ़ाया गया है. समूह ने न्यू डेवलपमेंट बैंक यानी NDB की भूमिका बढ़ाने का भी समर्थन किया है. BRICS चाहता है कि NDB डेवलपमेंट और इंफ्रा प्रोजेक्ट के लिए ज्यादा फाइनेंस उपलब्ध कराए. इसके अलावा लोकल करेंसी में फाइनेंसिंग बढ़ाने और वित्त जुटाने के सोर्स में डॉयवर्सफिकेशन लाने पर भी जोर दिया गया है. इससे BRICS और ग्लोबल साउथ के देशों के लिए विकास प्रोजेक्ट में कैपिटल उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है.