BSE शेयर 3 फीसदी टूटा, NSE IPO ने बढ़ाई टेंशन; खरीदें या करें इंतजार?

BSE के शेयर शुक्रवार को करीब 3 फीसदी गिर गए. NSE के IPO का प्राइस बैंड 1700 से 1785 रुपये तय होने के बाद BSE शेयर पर दबाव बढ़ा. एक्सपर्ट के मुताबिक, 3130 से 3100 रुपये का स्तर अहम सपोर्ट है. इसके टूटने पर शेयर 2970 रुपये तक जा सकता है. दूसरी ओर 3350 से 3370 रुपये रेजिस्टेंस है. NSE का FY26 मुनाफा BSE से चार गुना से ज्यादा रहा है. ऐसे में निवेशकों की नजर दोनों एक्सचेंज की वैल्यूएशन पर है.

BSE के शेयरों में शुक्रवार को करीब 3 फीसदी की गिरावट देखने को मिली. Image Credit:

BSE के शेयरों में शुक्रवार को करीब 3 फीसदी की गिरावट देखने को मिली. NSE की ओर से IPO का प्राइस बैंड घोषित किए जाने के बाद BSE शेयर पर दबाव बढ़ गया. NSE का IPO 17 सितंबर को सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेगा और 21 सितंबर को बंद होगा. कंपनी ने IPO के लिए 1700 से 1785 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है. BSE शेयर पिछले कुछ कारोबारी सत्रों से दबाव में है. ऐसे में निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि शेयर में आगे क्या रणनीति अपनानी चाहिए.

BSE शेयर में लगातार गिरावट

BSE का शेयर शुक्रवार को करीब 3 फीसदी गिरकर बंद हुआ और पिछले सत्र में मिली बढ़त गंवा दी. पिछले चार कारोबारी सत्रों में से तीन में शेयर गिरावट के साथ बंद हुआ है. SBI Securities के सुदीप शाह के मुताबिक BSE शेयर 17 अगस्त से 3474 रुपये से 3132 रुपये की रेंज में कारोबार कर रहा है. तकनीकी संकेतकों से भी फिलहाल शेयर में मजबूत तेजी का संकेत नहीं मिल रहा है. ADX में गिरावट और MACD का जीरो लाइन से नीचे रहना शेयर में कमजोर मोमेंटम की ओर इशारा करता है.

3130 से 3100 रुपये का स्तर अहम

तकनीकी विश्लेषण के मुताबिक BSE शेयर के लिए 3130 से 3100 रुपये का स्तर अहम सपोर्ट जोन है. अगर शेयर इस स्तर से नीचे निर्णायक रूप से टूटता है तो इसमें नई बिकवाली देखने को मिल सकती है. ऐसी स्थिति में शेयर 2970 रुपये के अगले सपोर्ट स्तर तक फिसल सकता है. वहीं तेजी की स्थिति में 3350 से 3370 रुपये का स्तर शेयर के लिए अहम रेजिस्टेंस बन सकता है. इसलिए निवेशकों के लिए फिलहाल इन दोनों स्तरों पर नजर रखना जरूरी है.

NSE IPO का प्राइस बैंड 1700 से 1785 रुपये

NSE का IPO 17 सितंबर को खुलेगा और 21 सितंबर को बंद होगा. एंकर निवेशकों के लिए बोली 16 सितंबर को शुरू होगी. NSE ने IPO का प्राइस बैंड 1700 से 1785 रुपये प्रति शेयर तय किया है. IPO के आने के बाद निवेशकों के बीच NSE और BSE की वैल्यूएशन और मुनाफे की तुलना भी तेज हो गई है. दोनों स्टॉक एक्सचेंज के कारोबार और कमाई को देखते हुए निवेशक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि मौजूदा वैल्यूएशन पर कौन सा शेयर ज्यादा आकर्षक है.

NSE का मुनाफा BSE से चार गुना ज्यादा

FY26 के आंकड़ों के मुताबिक NSE का मार्केट कैप करीब 4.46 लाख करोड़ रुपये है, जबकि BSE का मार्केट कैप करीब 1.31 लाख करोड़ रुपये है. NSE ने FY26 में 10302 करोड़ रुपये का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स दर्ज किया, जबकि BSE का FY26 PAT 2497 करोड़ रुपये रहा. NSE का P E मल्टीपल करीब 42.5 गुना है, जबकि BSE का P E करीब 49 गुना है. NSE IPO की वैल्यूएशन पर एक्सचेंज की वैल्यू BSE से करीब 3.2 गुना होगी, जबकि इसका मुनाफा BSE से चार गुना से ज्यादा है.

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BSE के ट्रेडिंग वॉल्यूम पर चिंता

BSE के शेयर को लेकर ब्रोकरेज फर्म Bernstein का रुख भी सावधान करने वाला रहा है. Bernstein ने BSE पर अंडरपरफॉर्म रेटिंग के साथ कवरेज शुरू किया था. ब्रोकरेज की चिंता BSE के ट्रेडिंग वॉल्यूम को लेकर भी है. BSE मैनेजमेंट ने बताया है कि हाल में शुरू किए गए Closing Auction Session का असर इंडेक्स ऑप्शंस के वॉल्यूम पर पड़ा है. ऑक्शन सेशन में सीमित लिक्विडिटी के कारण निवेशकों की भागीदारी प्रभावित हुई है. ऐसे में निवेशकों को BSE शेयर में जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय तकनीकी सपोर्ट और कंपनी के कारोबार से जुड़े आंकड़ों पर नजर रखनी चाहिए.

डिस्क्लेमर: Money9live कभी भी किसी शेयर, आईपीओ और म्यूचुअल फंड में निवेश की सलाह नहीं देता है. ये खबर केवल आपकी जानकारी के लिए है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.