BSE के शेयर में लगातार दूसरे दिन गिरावट, Nuvama ने घटाई रेटिंग; 21 फीसदी कम किया टारगेट प्राइस

BSE के शेयर में लगातार दूसरे दिन गिरावट रही. नुवामा ने BSE की रेटिंग खरीद से घटाकर होल्ड कर दी और टारगेट प्राइस 21 फीसदी घटाकर 3240 रुपये कर दिया. ब्रोकरेज ने क्लोजिंग ऑक्शन सेशन, सख्त बैंक गारंटी नियमों और बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने की सीमित गुंजाइश को चुनौती बताया.

BSE के शेयर में लगातार दूसरे दिन गिरावट रही. Image Credit:

BSE के शेयर में मंगलवार को लगातार दूसरे दिन गिरावट देखने को मिली. दोपहर 12 बजकर 10 मिनट पर शेयर 1.5 फीसदी गिरकर 3283.10 रुपये पर कारोबार कर रहा था. इसकी वजह ब्रोकरेज फर्म नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की रिपोर्ट को माना जा रहा है. नुवामा ने BSE की रेटिंग को खरीद से होल्ड कर दिया है. साथ ही शेयर का टारगेट प्राइस 21 फीसदी घटाकर 3240 रुपये कर दिया है. ब्रोकरेज ने क्लोजिंग ऑक्शन सेशन और बैंक गारंटी नियमों को BSE के लिए बड़ी चुनौती बताया है.

नुवामा ने घटाई BSE की रेटिंग

नुवामा ने BSE के शेयर की रेटिंग खरीद से घटाकर होल्ड कर दी है. ब्रोकरेज ने शेयर का टारगेट प्राइस भी 21 फीसदी कम कर 3240 रुपये कर दिया है. इसके साथ ही वित्त वर्ष 2027 के लिए प्रति शेयर आय के अनुमान में 6.3 फीसदी की कटौती की गई है. वित्त वर्ष 2028 के लिए आय अनुमान 15 फीसदी घटाया गया है. नुवामा का मानना है कि आने वाले समय में BSE के कारोबार पर कई दबाव बने रह सकते हैं.

क्लोजिंग ऑक्शन से ऑप्शन कारोबार पर असर

नुवामा के मुताबिक क्लोजिंग ऑक्शन सेशन BSE के ऑप्शन कारोबार के लिए चुनौती बन रहा है. पहले एक्सपायरी के करीब ऑप्शन प्रीमियम में गिरावट का अनुमान लगाना आसान था. इससे कम समय की ट्रेडिंग रणनीतियों को फायदा मिलता था. क्लोजिंग ऑक्शन के बाद अंतिम सेटलमेंट कीमत को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है. इससे ऑप्शन प्रीमियम में गिरावट का अनुमान लगाना मुश्किल हुआ है और ट्रेडिंग गतिविधि पर असर पड़ा है.

एक्सपायरी वाले कॉन्ट्रैक्ट में ज्यादा गिरावट

नुवामा के अनुसार क्लोजिंग ऑक्शन का असर खास तौर पर एक्सपायरी वाले कॉन्ट्रैक्ट में ज्यादा दिखाई दे रहा है. एक्सपायरी वाले कॉन्ट्रैक्ट में 33.2 फीसदी की गिरावट आई है. वहीं गैर एक्सपायरी वाले कॉन्ट्रैक्ट में गिरावट 23.6 फीसदी रही. जुलाई से BSE के औसत दैनिक प्रीमियम कारोबार की बाजार हिस्सेदारी भी 130 बेसिस प्वाइंट घटकर 36.3 फीसदी रह गई है. अगस्त में BSE का औसत दैनिक प्रीमियम कारोबार 18100 करोड़ रुपये रहा है.

बैंक गारंटी के नए नियम भी चुनौती

नुवामा ने भारतीय रिजर्व बैंक के सख्त बैंक गारंटी नियमों को भी BSE के लिए निकट अवधि की चुनौती बताया है. इन नियमों से ब्रोकर और अन्य बाजार मध्यस्थों के लिए पूंजी की जरूरत बढ़ सकती है. इससे हाई फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग से जुड़ी कारोबार क्षमता पर असर पड़ सकता है. ब्रोकरेज का मानना है कि इसका असर धीरे धीरे दिखाई देगा. हालांकि इससे वित्त वर्ष 2028 तक BSE की रिकवरी की रफ्तार सीमित हो सकती है.

बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने की गुंजाइश सीमित

नुवामा के अनुसार BSE की कॉन्ट्रैक्ट बाजार हिस्सेदारी पहले ही करीब 52 फीसदी है. ऐसे में आगे बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने की गुंजाइश सीमित दिखाई दे रही है. हालांकि औसत दैनिक प्रीमियम कारोबार में BSE की हिस्सेदारी करीब 36 फीसदी है. इसकी वजह गैर एक्सपायरी वाले दिनों में कम कारोबार है. नुवामा के मुताबिक अगर वीआईएक्स 16 से 18 के स्तर तक पहुंचता है तो प्रति कॉन्ट्रैक्ट प्रीमियम बढ़ सकता है.

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जेफरीज ने भी BSE पर जताई चिंता

नुवामा से पहले वैश्विक ब्रोकरेज जेफरीज ने भी BSE के शेयर की रेटिंग घटाकर अंडरपरफॉर्म कर दी थी. जेफरीज ने शेयर का टारगेट प्राइस 16 फीसदी घटाया था. ब्रोकरेज ने घरेलू प्रोप्राइटरी ट्रेडर्स को BSE के लिए जोखिम बताया है. इन ट्रेडर्स की हिस्सेदारी एक्सचेंज के कुल नॉशनल कारोबार में करीब आधी है. जेफरीज ने ज्यादा सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स, बैंक गारंटी नियम और क्लोजिंग ऑक्शन सेशन को भी प्रमुख चुनौती बताया है.

डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.

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